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शनिवार, 10 जनवरी 2026

विश्व हिन्दी दिवस १० जनवरी : जानिए ये तथ्य और हिन्दी में गिनती World Hindi Day 10 January : Know Important Topics About Hindi Language & Hindi Counting System


-शीतांशु कुमार सहाय 

      विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर जानिए हिन्दी के बारे में महत्त्वपूर्ण तथ्य और सीखिए हिन्दी में गिनती...

      हिन्दी भाषा की बढ़ती व्यापकता को देखते हुए प्रतिवर्ष १० जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हम हिन्दीभाषियों को याद दिलाता है कि हमें हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में हिन्दी विश्व की तीसरी सर्वाधिक बोली जानेवाली भाषा है। अँग्रेजी और मैंडरिन चाइनीज के बाद दुनिया में हिन्दी तीसरी सब से अधिक बोली जानेवाली भाषा है। पर, अब भी हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा का स्थान नहीं पा सकी है। 

      हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा है। भारत सरकार ने एक समिति गठित कर कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और नरसिम्हा गोपालस्वामी आयंगर को भाषा सम्बन्धी कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। डॉ. भीम राव अम्बेदकर को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। १४ सितंबर १९४९ ईस्वी को संविधान के अनुच्छेद ३४३ और ३५१ के तहत बने कानून में हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया। इस के बाद १९५३ ईस्वी से प्रतिवर्ष भारत में १४ सितम्बर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

      आज विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी में गिनती सीखें और अपने बच्चों को भी अवश्य बताएँ जो हिन्दी गणना प्रणाली भूल गये हैं...

  1. एक = १
  2. दो = २
  3. तीन = ३
  4. चार = ४
  5. पाँच = ५
  6. छः = ६
  7. सात = ७
  8. आठ = ८
  9. नौ = ९
  10. दस = १०

गुरुवार, 8 जनवरी 2026

वेदान्त उद्योग समूह के संस्थापक उद्योगपति अनिल अग्रवाल पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा A Mountain of Sorrows Fell Upon Industrialist Anil Agarwal, Founder of Vedanta Group of Industries

 

पिता अनिल व पुत्र अग्निवेश 

-शीतांशु कुमार सहाय 

छोटे से व्यवसाय से वेदान्त कम्पनी ग्रुप तक का कठिन और लम्बा सफ़र तय कर देश-विदेश में अपना और बिहार का नाम रौशन करने वाले अनिल अग्रवाल को जीवन का सब से दर्दनाक घटना का सामना करना पड़ रहा है। उन के बड़े पुत्र अग्निवेश अग्रवाल का उनचास वर्ष की उम्र में सात जनवरी को निधन हो गया। वेदान्त समूह की एक कम्पनी तलवण्डी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) के निदेशक मण्डल में शामिल थे और समूह की प्रगति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। 

अग्निवेश अग्रवाल अपने मित्रों के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गये अग्निवेश स्कीइंग के दौरान ही घटना का शिकार हो गये। अमेरिका के ही न्यूयॉर्क के माउण्ट सिनाई अस्पताल में चिकित्सा के दौरान उन की मृत्यु हो गयी। 

अनिल अग्रवाल बिहार के रहने वाले हैं और उद्योगपति के रूप में विश्व प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पिता के छोटे से व्यवसाय से उद्योग-व्यवसाय की बारीकियों को सीखा और परिश्रम के बल पर आज खरबों रुपयों का टर्नओवर वाले वेदान्त (Vedanta) उद्योग समूह के स्वामी हैं। भारत सहित कई देशों में उन के कारोबार फैले हैं। अनिल जी फेसबुक पर मेरे मित्र भी हैं। मैं जब एक NRI पत्रिका 'युगपत्र' का सम्पादकीय प्रभारी था तो अनिल जी के संघर्षपूर्ण जीवन से सफल मुकाम तक पहुँचने की शोधपरक कहानी का प्रकाशन किया था। नये उद्योगपति उन के संघर्षपूर्ण दास्तान से सीख लेते हैं। उन्होंने फेसबुक के एक पोस्ट में लिखा कि संसार में उन्हें सब से अधिक सुकून पटना में ही मिलता है। शुरुआत से अबतक पटना से लगाव का ही परिणाम था कि बड़े पुत्र अग्निवेश का भी जन्म पटना में ही हुआ था। 

अनिल अग्रवाल की दो सन्तानों में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। बड़ी सन्तान के रूप में पुत्र अग्निवेश का जन्म तीन जून 1976 को पटना में हुआ था जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। दूसरी सन्तान पुत्री प्रिया है। प्रिया फिलहाल वेदांत समूह के बोर्ड में शामिल हैं और समूह की कम्पनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

अग्निवेश ने अजमेर के मेयो महाविद्यालय में पढ़ाई की। उन्हें बॉक्सिंग और घुड़सवारी का भी शौक था। उन्होंने समूह के अन्तर्गत Fujeirah Gold कंपनी को खड़ा किया था। वह समूह की कम्पनी हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के अध्यक्ष भी थे।

इस दुखद घड़ी में हम अनिल अग्रवाल जी के साथ हैं। 

पुत्र अग्निवेश को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ!