-शीतांशु कुमार सहाय
भारत में पिछले ग्यारह वर्षों में इण्टरनेट के उपयोगकर्ताओं में भारी वृद्धि हुई है। साथ डिजिटल तकनीक पर निर्भरता भी द्रुत गति से बढ़ी है जो अनवरत् जारी है। यह सब सम्भव हुआ है भारत सरकार द्वारा लागू 'डिजिटल इण्डिया योजना' के कारण। इस एक दशक से अधिक की अवधि में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, आर्थिक गतिविधियों, सरकारी योजनाओं-परियोजनाओं, विभिन्न उद्योगों, व्यापार सहित कई अन्य आर्थिक और गैर-आर्थिक कार्यों में डिजिटल तकनीक का उपयोग तेज गति से बढ़ा है।
● ५१ लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचायी गयी।
● भारत में ४२ लाख रूट किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार हुआ। ऑप्टिकल फाइबर से अबतक दो लाख बीस हज़ार गाँव जुड़े हैं।
● डिजिटल लेन-देन में विश्व में सब से आगे भारतीय हैं। इस क्षेत्र में PhonePe और PayTm जैसी भारतीय कम्पनियाँ अब कई देशों में अपनी सेवा दे रही हैं। विश्व का हर दूसरा डिजिटल ट्रान्जेक्शन भारत में हो रहा है।
● भारत में सत्तर करोड़ से अधिक लोग डिजिलाॅकर का उपयोग कर रहे हैं।
● भारत में केन्द्रीय और राज्य सरकारों की ढाई हजार से अधिक सेवाएँ डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध हैं। मोबाइल फोन या कम्प्यूटर पर इण्टरनेट के माध्यम से सरकारी सेवाओं का लाभ लोग उठा रहे हैं।
● इण्टरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण 4G और 5G के डेटा सस्ते हुए हैं।
● सेमीकण्डक्टर बनानेवाली बारह उत्पादन इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं।
● स्टार्टअप इण्डिया और अटल इनोवेशन मिशन से डीप-टेक को बढ़ावा मिल रहा है।

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