मंगलवार, 25 अगस्त 2015

धर्म आधारित भारत की जनगणना 2015 : हिंदुओं से ज्‍यादा बढ़ रही मुस्लिमों की आबादी / Religion-based census data of India : Growing Muslim population than Hindus



देश की आबादी 121.09 करोड़ 

-शीतांशु कुमार सहाय
सरकार ने धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने 2011 तक की जनगणना के आंकड़े मंगलवार 25 अगस्त 2015 शाम को जारी किए हैं। जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत की जनसंख्‍या 121.09 करोड़ है। इसमें हिंदू 79.8 प्रतिशत हैं जबकि दूसरी बड़ी जाति‍ मुस्लिमों की है जो 14.2 प्रतिशत हैं। इनके बाद नंबर है ईसाइयों का जिनका प्रतिशत 2.3 है। देश में सिखों की आबादी 1.7 प्रतिशत है जबकि बौद्ध 0.7 प्रतिशत और जैन 0.4 प्रतिशत हैं। जारी किए गए आकड़ों के अनुसार हिंदुओं का अनुपात 0.7 प्रतिशत की दर से कम हुआ है। वहीं मुस्लिमों की आबादी 24.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। जारी आंकड़ों के अनुसार देश में 96 करोड़ 63 लाख हिंदू हैं वहीं मुस्लिमों की जनसंख्‍या 17 करोड़ 22 लाख है।
देश में हिंदुओं की आबादी 0.7 प्रतिशत घटी है और और मुस्लिमों की आबादी 0.8 प्रतिशत बढ़ी है। यह बात धर्म के आधार पर की गई जनगणना (2010-11) के नतीजों से पता चली है। मोदी सरकार की ओर से मंगलवार को ये आंकड़े जारी किए गए। इन 10 सालों में मुस्लिमों की आबादी बाकी धर्म मानने वालों के मुकाबले तेजी से बढ़ी है। साथ ही यह पहला मौका है जब देश में हिंदुओं की आबादी में गिरावट दर्ज हुई है। 2011 में देश की कुल आबादी 121 करोड़ हो चुकी है। जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम आबादी है। 2001-11 के दौरान भारत में 17.7 प्रतिशत के दर से देश की आबादी में बढ़ोतरी हुई है। 2001-11 के दौरान हिंदू (16.8), मुस्लिम (24.6), ईसाई (15.5), सिख (8.4), बौद्ध (6.1), जैन (5.4) प्रतिशत बढ़े हैं। बीते दिनों केंद्र सरकार ने जाति आधारित जनगणना के आंकड़े नहीं जारी करने का ऐलान किया तो सियासी गलियारों में खूब हलचल मची, वहीं बिहार में‍ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनवरी में किए गए अपने वादे को निभाते हुए मोदी सरकार ने धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में मुसलमानों की तादाद सबसे तेजी से बढ़ रही है, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या की वृद्धि‍ दर दूसरे नंबर पर है। साल 2001 से 2011 के दशक पर आधारित इस जनगणना के मुताबिक, इस दशक में देश की कुल आबादी 17.7 प्रतिशत के रफ्तार से बढ़ी है जबकि मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या इस दौरान सबसे तेजी से 24.6 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी है। इसके ठीक बाद हिंदुओं की जनसंख्या की वृद्धि‍ दर है, जो 16.8 प्रतिशत है। ईसाई समुदाय की जनसंख्या भी एक निर्धारित एक दशक में 15.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।
तीसरे नंबर पर सिख समुदाय---
धर्म आध‍ारित जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हिंदू और मुसलमानों के बाद सिख समुदाय की जनसंख्या तीसरी सबसे बड़ी जनसंख्या है जबकि वृद्धि‍ दर के लिहाज से यह 8.4 प्रतिशत के साथ चौथे नंबर पर है। सिखों के बाद देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाली जनसंख्या बौद्धों की है। 6.1 प्रतिशत वृद्धि‍ दर के साथ बौद्ध धर्म के लोगों की संख्या बढ़ रही है, वहीं जैन धर्म के लोगों की संख्या भी 5.4 प्रतिशत के दर से बढ़ रही है।
किसकी कितनी आबादी---
साल 2011 तक के जनसंख्या के आंकड़े के मुताबिक, देश की कुल आबादी 121.09 करोड़ है। इनमें हिंदुओं की जनसंख्या सबसे अधि‍क 96.63 करोड़ (79.8 प्रतिशत) है। मुसलमानों की आबादी 17.22 करोड़ (14.2 प्रतिशत), ईसाइयों की जनसंख्या 2.78 करोड़ (2.3 प्रतिशत) और सिख समुदाय के लोगों की संख्या 2.08 करोड़ (1.7 प्रतिशत) है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के लोगों की कुल जनसंख्या 0.84 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का 0.7 प्रतिशत है। जैन धर्म के लोगों की जनसंख्या 0.45 करोड़ है और यह कुल आबादी का 0.4 प्रतिशत है। 
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल आबादी के मुकाबले 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। सिखों की जनसंख्या में भी 0.2 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
नहीं जारी किए जातिगत जनगणना के आंकड़े---
सरकार ने सामाजिक, आर्थि‍क और जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जुटा लिए गए हैं, लेकिन उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है। जुलाई महीने में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जातिगत जनगणना के आंकड़ों से भारत की हकीकत जानने में मदद मिलेगी जबकि इससे पहले जनवरी में ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनकी सरकार धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक कर सकती है. धर्म आधारति जनगणना महा पंजीयक और जनणना आयोग ने की है. यह विभाग गृह मंत्रालय के अधीन आता है।
आंकड़े जारी करने पर सवाल---
आलोचकों ने सरकार के द्वारा जारी जनगणना के आंकड़ो की निंदा की है। उनका मानना है कि मोदी सरकार ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले धर्म आधारित आंकड़े जारी कर इलेक्शन कार्ड खेला है। बिहार की 243 सीटों में से 50 पर इसका असर पड़ सकता है।

धर्म         कुल आबादी        प्रतिशत

हिंदू           96.63 करोड़               79.8%
मुस्लिम   17.22 करोड़               14.2 % 
ईसाई         2.78 करोड़                  2.3 %
सिख          2.08 करोड़                  1.7 %
बौद्ध           0.84 करोड़                   0.7 %
जैन           0.45 करोड़                   0.4 %

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