बुधवार, 30 मार्च 2022

नववर्ष २०७९ विक्रम सम्वत् का आरम्भ २ अप्रैल को New Vikram Samvat 2079 From April 2, 2022

 -शीतांशु कुमार सहाय

विक्रम सम्वत् २०७९ चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा (२ अप्रैल २०२२) को आरम्भ हो रहा है। विश्वभर में सनातनधर्मी इसी सम्वत् के आधार पर अपना पर्व-त्योहार मनाते हैं। यह सम्वत् चाँद की दिशा व दशा के आधार पर दिन-तिथि निर्धारित करता है। ग्रन्थों की बात मानें तो चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा के दिन ही आदिशक्ति के आदेश से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना आरम्भ की थी। भारतीय दर्शन में सृष्टि की उत्पत्ति आदिशक्ति से मानी जाती है। उन्होंने अपने रूप को जल, स्थल और वायु के साथ-साथ समस्त देवी-देवताओं, मानव व अन्य जीव-जन्तुओं की करोड़ों श्रेणियों में विभक्त किया। आदिशक्ति ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की और ब्रह्माण्ड के कण-कण में वह स्वयं ही विभिन्न रूपों में विद्यमान हैं।
सर्वप्रथम आदिशक्ति ने नीरव शान्ति और भयंकर अन्धेरे के बीच अपने शब्द-स्वरूप ‘ऊँ’ को प्रकट किया जिससे नीली रश्मि उत्पन्न हुई और सर्वत्र ऊँ व्याप्त हो गया। ऊँ के नाद (स्वर) से ब्रह्माण्ड में उथल-पुथल हुई तो गति उत्पन्न हुई और विभिन्न वायु प्रकट हुए। यों सर्वत्र जल-ही-जल दिखायी देने लगा। तब आदिशक्ति ने नारायण (विष्णु) का पुरुषस्वरूप धारण किया। विष्णु के नाभि से एक कमल प्रकट हुआ जिससे ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई।
आदिदेव ब्रह्मा को आदिशक्ति ने सृष्टि का आदेश दिया। ब्रह्मा ने चारों ओर मुख घुमाकर ब्रह्माण्ड की व्यापकता का दर्शन किया तो उनके चार मुख हो गये। उन्होंने अपने अस्तित्व पर विचार करना और अपनी उत्पत्ति वाले स्थान के अन्वेषण में बहुत समय व्यतीत किया पर पता न चला तो तपस्या में लीन हो गये। सौ दिव्य वर्षों तक तपश्चर्या के दौरान उन्हें अन्तःकरण में दिव्य प्रकाश दिखायी दिया। साथ ही नारायण का दर्शन भी प्राप्त हुआ। नारायण ने उन्हें सृष्टि की रचना के लिए उत्प्रेरित किया। सभी मित्रों को भारतीय नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएँ!
भारतीय नववर्ष का ऐतिहासिक महत्व---
१. यह दिन सृष्टि रचना का पहला दिन है। इस दिन से एक अरब ९७ करोड़ ३९ लाख ४९ हजार ११७ वर्ष पूर्व इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने जगत की रचना प्रारंभ की।
२. विक्रम सम्वत् का पहला दिन : उसी राजा के नाम पर संवत् प्रारंभ होता था जिसके राज्य में न कोई चोर हो, न अपराधी हो, और न ही कोई भिखारी हो। साथ ही राजा चक्रवर्ती सम्राट भी हो। सम्राट विक्रमादित्य ने २०७९ वर्ष पहले इसी दिन राज्य स्थापित किया था।
३. प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक दिवस : प्रभु राम ने भी इसी दिन को लंका विजय के बाद अयोध्या में राज्याभिषेक के लिये चुना।
४. नवरात्र स्थापना : शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है। प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन।
५. गुरु अंगददेव प्रगटोत्सव : सिक्ख परंपरा के द्वितीय गुरु का जन्म दिवस।
६. समाज को श्रेष्ठ मार्ग पर ले जाने हेतु स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज स्थापना दिवस के रूप में चुना।
७. संत झूलेलाल जन्म दिवस : सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।
८. शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस : विक्रमादित्य की भांति शालिनवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
९. युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन : ५११२ वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व---
१. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
२. फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।
३. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।
अत: हमारा नववर्ष कई कारणों को समेटे हुए है, अत: हर्षोउल्लास के साथ नववर्ष  मनायें और दूसरो को भी मनाने के लिए प्रेरित करें।

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में किसे मिली कितनी सीट Final Voting Results From Utter Pradesh, Uttarakhand, Punjab, Goa & Manipur


- शीतांशु कुमार सहाय
   यहाँ जानिये कि विभिन्न चरणों में गत दिनों पाँच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में हुए विधानसभा आम निर्वाचन के परिणाम में किन राजनीतिक दलों को कितने निर्वाचन क्षेत्रों में जीत मिली--

उत्तर प्रदेश 

१) भारतीय जनता पार्टी : भाजपा को कुल २७४ क्षेत्रों में जीत मिली और पिछली बार (२०१७) से ४८ सीट कम हो गयी।  

२) समाजवादी पार्टी गठबन्धन : पिछली बार से ७२ सीट अधिक मिली और कुल १२४ क्षेत्रों में विजय मिली। 

३) काँग्रेस : केवल २ क्षेत्रों की जनता ने काँग्रेस में आस्था दिखायी। वर्ष २०१७ की अपेक्षा ५ सीट का नुकसान हुआ है। 

४) बहुजन समाज पार्टी : २०१७ की अपेक्षा १८ सीट कम हो गयी और एकमात्र सीट पर जीत मिली। 

उत्तराखण्ड :

१) भारतीय जनता पार्टी : वर्ष २०१७ में हुए विधानसभा आम निर्वाचन की अपेक्षा ९ क्षेत्रों की कमी हुई। ४८ सीट पर जीत मिली। 

२) काँग्रेस : पिछली बार से ७ सीट बढ़ गयी। कुल १८ क्षेत्रों में जीत मिली। 

३) बहुजन समाज पार्टी : पहली बार खाता खुला और २ क्षेत्रों में जीत मिली। 

पंजाब :

१) आम आदमी पार्टी : २०१७ में हुए पिछले विधानसभा आम निर्वाचन से इस बार ७२ सीट अधिक मिले। आप को कुल ९२ क्षेत्रों में जीत मिली। 

२) काँग्रेस : कुल १८ क्षेत्रों में जीत मिली और पिछली बार से ५९ सीट कम हो गयी। 

३) शिरोमणि अकाली दल : केवल ४ नेता विधानसभा के लिए चुने गये। पिछली बार से ११ विधायक कम हो गये।

४) भारतीय जनता पार्टी : वर्ष २०१७ की अपेक्षा एक सीट का नुकसान हुआ है और मात्र २ क्षेत्रों में जीत मिली है। 

गोवा : 

१) भारतीय जनता पार्टी : पिछले विधानसभा आम निर्वाचन के परिणाम से ७ सीट का मुनाफा हुआ। २० क्षेत्रों में जीत मिली। 

२) काँग्रेस : पिछली बार से नौ सीट कम हो गयी और ११ प्रत्याशी जीते।

३) आम आदमी पार्टी : पार्टी का खाता खुला और २ क्षेत्रों में जीत मिली। 

४) एमजीपी : एक सीट का नुकसान हुआ है और मात्र दो सीट पर जीत मिली। 

मणिपुर :

१) भारतीय जनता पार्टी : वर्ष २०१७ के विधानसभा आम निर्वाचन के परिणाम से इस बार ११ अधिक सीट पर जीत मिली। कुल ३२ क्षेत्रों में जीत मिली। 

२) एनपीपी : इस दल को पिछले विधानसभा आम निर्वाचन के परिणाम से ४ सीट अधिक मिले और कुल ७ प्रत्याशी जीते। 

३) जनता दल यूनाइटेड : राज्य में इस दल का खाता खुला और ६ क्षेत्रों में जीत मिली। 

४) काँग्रेस : पिछली बार से २३ सीट कम हो गयी और केवल ५ क्षेत्रों में जीत मिली। 

 

गुरुवार, 10 मार्च 2022

दुबारा मुख्यमंत्री बन कई कीर्तिमान बनायेंगे योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath Will Make Many Records By Becoming The Chief Minister Again In Utter Pradesh

अपने कार्यालय में योगी आदित्यनाथ

 

-शीतांशु कुमार सहाय

       उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने रही है। मुख्यमंत्री फिर से भाजपा के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ बनेंगे और कई मिथकों को तोड़ेंगे। 

नोएडा का मिथक तोड़ेंगे 

       उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिथक हमेशा से चर्चा में रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान नोएडा जाता है, उस की कुर्सी अगले चुनाव में चली जाती है। नोएडा से जुड़े इस अंधविश्वास का खौफ नेताओं में इतना अधिक रहा है कि अखिलेश यादव बतौर मुख्यमंत्री एक बार भी नोएडा नहीं गये। उन से पहले उन के पिता मुलायम सिंह यादव, नारायण दत्त तिवारी, कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं ने भी नोएडा से दूरी बनाये रखी। 

       वर्ष २००७ से २०१२ के बीच मायावती ने इस मिथक को तोड़ने के लिए दो बार नोएडा गईं। परिणाम यह हुआ कि वर्ष २०१२ में उन की सरकार गिर जाने के बाद नोएडा का ये मिथक फिर चर्चा में आ गया। 

      वर्ष २०१७ में पहली बार मुख्यमंत्री बनकर भाजपा के योगी आदित्यनाथ अपने कार्यकाल के दौरान कई बार नोएडा गये। इस के बावजूद उन पर नोएडा वाले अन्धविश्वास का असर नहीं हुआ और वह उत्तर प्रदेश के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। मतलब यह कि अब नोएडा वाला मिथक भी टूट गया है।

लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे योगी

       आज़ादी के बाद से उत्तर प्रदेश में अब तक कोई भी मुख्यमंत्री पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद अगले चुनावी नतीजों के उपरान्त मुख्यमंत्री नहीं बन पाया। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनकर योगी आदित्यनाथ यह कीर्तिमान भी अपने नाम कर लेंगे।

अविवाहित मुख्यमंत्री 

       योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के पहले अविवाहित मुख्यमंत्री हैं, जो लगातार दुबारा मुख्यमंत्री के पद पर बैठेंगे। प्रदेश में विधि-व्यवस्था ठीक करने और विकास के नये कीर्तिमान बनाने के कारण ही जनता ने सत्ता की बागडोर उन्हें सौंपी। 

प्रथम संन्यासी मुख्यमंत्री 

       योगी आदित्यनाथ से पहले भारत के किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री के पद पर कोई संन्यासी नहीं बैठा था। यह कीर्तिमान भी योगी के नाम है।

मंगलवार, 1 मार्च 2022

महाशिवरात्रि व्रत कथा Mahashivratri Vrat Katha

 


      महाशिवरात्रि व्रत अत्यन्त महत्त्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत के रहस्य को स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती के सम्मुख व्यक्त किया था।

      नीचे के लिंक पर क्लिक कीजिये और सुनिये कल्याणकारी महाशिवरात्रि व्रत कथा...

महाशिवरात्रि व्रत कथा