रविवार, 29 मार्च 2020

COVID-19 कोरोना नाम से डरिये नहीं, ७ प्रकार के होते हैं कोरोना वायरस Do Not be Afraid to Name of Corona, There are 7 Types of Coronavirus

-शीतांशु कुमार सहाय
         कोरोना विषाणु यानी कोरोना वायरस का नाम सुनते ही लोग डर जाते है। इस ने विश्वस्तर पर कोहराम मचा रखा है। पर, क्या आप जानते हैं कि चीन के हूबेई राज्य के वुहान शहर से ही केवल कोरोना वायरस की शुरुआत नहीं हुई। वुहान से निकलकर जिस वायरस ने विश्वभर में कहर ढाया है, वह वास्तव में नोवेल कोरोना वायरस है यानी बिल्कुल नया प्रकार का कोरोना वायरस। मैं आप को इस बुलेटिन में चीन वाले अत्यन्त हानिकारक और जानलेवा कोरोना वायरस के अलावा छः अन्य कोरोना वायरस के बारे में बताऊँगा।

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         कोरोना वायरस वास्तव में वायरस की एक प्रजाति है। ‘वायरस’ (Virus) अंग्रेजी का शब्द है जिसे हिन्दी में ‘विषाणु’ कहते हैं। इसे न तो पूरी तरह से सजीव कहा जा सकता है और न निर्जीव। यह सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी है। जबतक यह उपयुक्त वातावरण नहीं पाता, तबतक निष्क्रिय पड़ा रहता है। अलग-अलग विषाणु के निष्क्रिय रहने पड़े रहने की निश्चित अवधि होती है। इस अवधि को ही उस की आयु मानी जाती है। जैसे ताम्बे पर नोवेल कोरोना वायरस चार घण्टों तक निष्क्रिय पड़ा रहता है और जब किसी तरीके से शरीर में या अन्य उपयुक्त वातावरण में चला जाता है तो सक्रिय हो जाता है और जानलेवा साबित हो सकता है।       
         अबतक सात प्रकार के कोरोना विषाणु खोजे जा चुके हैं। सातवें कोरोना वायरस को चीन के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ली वेनलियांग ने ३० दिसम्बर २०१९ को खोजा। ली वेनलियांग ने अपने साथी चिकित्सकों को बताया कि उन्होंने कुछ मरीजों में बिल्कुल नये वायरस से उत्पन्न रोग के लक्षण देखे हैं। इस कारण चीन प्रशासन ने उन्हें प्रताड़ित भी किया। बाद में उन की बात सच निकली और नया वायरस कोरोना प्रजाति का निकला जिसे ‘नोवेल कोरोना वायरस’ का नाम दिया गया। इस से उत्पन्न रोग को ‘कोरोनावायरस डिजिज 2019’ की संज्ञा दी गयी जिसे संक्षेप में ‘कोविड-19’ कहा जाता है। इस ने तीन महीने से भी कम समय में पूरे विश्व को अपने चपेट में ले लिया और विश्वभर की समस्त गतिविधियाँ थम गयीं। संसार ने ऐसी महामारी पहले कभी नहीं देखी।
         अगर चीन प्रशासन ली वेनलियांग की बात मान लेता और विश्व को नोवेल कोरोना वायरस के घातक परिणाम की चेतावनी पहले ही दे देता तो विश्व के सैकड़ों देशों को अरबों डॉलर की क्षति नहीं उठानी पड़ती और हज़ारों लोग की जान बच जाती। चीन ने ६ फरवरी २०२० को ली वेनलियांग की मौत की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने जिस नोवेल कोरोना वायरस को खोजा, वही उन की मौत का कारण बना। 
          नोवेल कोरोना वायरस के अलावा अन्य छः कोरोना विषाणुओं के नाम जानने से पहले जानते हैं कि इस का नाम ‘कोरोना’ क्यों पड़ा। कोरोना वास्तव में लैटिन भाषा का शब्द है जिस का अर्थ ‘मुकुट’ होता है। इस वायरस के इर्द-गिर्द उभरे हुए काँटे जैसे ढाँचों से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में मुकुट जैसा आकार दीखता है। इस कारण ही इसे ‘कोरोना’ नाम दिया गया।
         अब जानिये छः अन्य कोरोना विषाणुओं के बारे में। ये छः प्रकार के कोरोना वायरस पहले से ही मौज़ूद हैं। इन में से चार से डरने की ज़रूरत नहीं हैै। ये आप के साथ रहते हैं और अब भी शरीर में उपस्थित हो सकते हैं। ये कोई नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। चीन वाला कोरोना यानी नोवेल कोरोना घातक है। बहुत कम हानि पहुँचानेवाले चार कोरोना वायरस हैं-
         (१) २२९ ई अल्फा कोरोना वायरस (229 E Alpha Coronavirus)
         (२) एनएल ६३ अल्फा कोरोना वायरस (NL 63 Alpha Coronavirus)
         (३) ओसी ४३ बीटा कोरोना वायरस (OC 43 Beta Coronavirus)
         (४) एचकेयू १ बीटा कोरोना वायरस (HKU 1 Beta Coronavirus)
         जिस व्यक्ति के शरीर में ये चारों वायरस होते हैं, उसे पता तक नहीं चलता है। कोरोना प्रजाति के ये चार वायरस किसी भी तरह से जानलेवा नहीं हैं। इन की जाँच सामान्य पैथोलॉजिकल लैब में हो सकती है। तो केवल कोरोना नाम से मत घबराइये।
         अब और तीन कोरोना वायरस को जानते हैं जो ज़्यादा घातक हैं। पाँचवाँ कम लेकिन छठा और सातवाँ प्राणघातक भी साबित होते हैं। इन के नाम जानिये-
         (५) एमईआरएस-सीओवी बीटा कोरोना वायरस (MERS-CoV Beta Coronavirus)
         (६) एसएआरएस-सीओवी बीटा कोरोना वायरस (SARS-CoV Beta Coronavirus)
         (७) एसएआरएस-सीओवी-२ नोवेल कोरोना वायरस  (SARS-CoV-2 Novel Coronavirus)
         यही सातवाँ सब से अधिक जानलेवा है। इस के संक्रमण से कोविड-१९ नाम का घातक रोग उत्पन्न होता है। 
         याद रखिये, ये सातों प्रकार के कोरोना वायरस १४ दिन के अन्दर उपयुक्त वातावरण न मिलने पर स्वयं नष्ट हो जाते हैं। इसलिए नोवेल कोरोना वायरस से होनेवाले जानलेवा रोग कोविड-१९ के संक्रमण की शृँखला यानी इन्फेक्शन चेन को तोड़ने के लिए कम-से-कम तीन सप्ताह के क्वारेनटाइन की आवश्यकता पड़ती है।
..       .....तो परिवार के सदस्यों के साथ स्वस्थ रहिये,  ख़ुश रहिये!

शनिवार, 28 मार्च 2020

शीतांशु टीवी के आग्रह का असर, ईएमआई देनदारी 3 माह टली Impact of Sheetanshu TV's Request, EMI Liability Postponed 3 Months


         शीतांशु टीवी ने अपने अधिकृत ट्विटर हैण्डल से लगातार तीन ट्विट किया। इस में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन को कोट कर कम आय वर्ग के लोग की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया गया था। 23 मार्च 2020 को ये ट्विट किये गये। इस में ईएमआई को 3 माह स्थगित करने का आग्रह किया गया था। 27 मार्च 2020 को भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने ऐसी ही घोषणा कर करोड़ों देशवासियों को राहत दी।
         ट्विट में सरकार से आग्रह करते हुए कहा गया था कि दैनिक कामगार और असंगठित क्षेत्र के कार्मिकों को कोविड-19 महामारी के खतरे से बचाने के लिए देशव्यापी किये गये 21 दिन के लॉकडाउन के कारण रोज़गार और आमदनी में गिरावट आयी। ऐसे लोग सीमित आमदनी के कारण आवश्यकता की महंगी वस्तुओं को किस्त पर खरीदते हैं। ये किस्त देने की स्थिति में नहीं हैं, अतः ईएमआई को तीन महीने आगे बढ़ा दिया जाय। जनहित में शीतांशु टीवी के ये ट्विट बड़े लाभकारी साबित हुए।
  
        भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती की घोषणा शुक्रवार, 27 मार्च 2020 को की। उन्होंने ऋणधारको के लिए भी राहत का ऐलान किया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि वित्तीय बाजार की स्थिरता और आर्थिक वृद्धि संभालने के लिए परंपरागत या लीक से हट कर, सभी प्रकार के विकल्प विकल्प खुले हैं।
नोवेल कोरोना विषाणु के संक्रमण को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन की गयी है। इस कारण अर्थव्यवस्था को भारी आघात पहुँचा है। अर्थव्यवस्था को और अधिक हानि न हो, इस के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़े कदम उठाये हैं। 
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास
         रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की कटौती की। कटौती के बाद रेपो दर 4.4 प्रतिशत पर आ गयी। इस से आनेवाले दिनों में ऋण सस्ता मिलेगा। आरबीआई ने कर्ज देने वाले सभी वित्तीय संस्थानों को सावधिक कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की सलाह दी। गवर्नर ने कहा, कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान को टाले जाने को चूक नहीं माना जायेगा, इस से कर्जदार की रेटिंग (क्रेडिट हिस्ट्री) पर असर नहीं पड़ेगा।
         आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिशत की कमी की गई है। इसी तरह सीआरआर में एक प्रतिशत की कटौती हुई। अब सीआरआर 3 प्रतिशत पर आ गया है। गवर्नर ने कहा, रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी। सीआरआर में कटौती, रेपो दर आधारित नीलामी समेत अन्य कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अतिरिक्त 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकद धन उपलब्ध होगा। 


बुधवार, 25 मार्च 2020

कोविड-१९ : दवाई व टीका तैयार, जेनिफर पर पहला मानव परीक्षण COVID-19 : Medicines and Vaccine Ready, First Human Tested on Jennifer

-शीतांशु कुमार सहाय
         पूरा संसार चीन की मनमानी से उत्पन्न नोवेल कोरोना विषाणु के खिलाफ युद्ध कर रहा है। चीन ने काफ़ी देर से इस नोवेल कोरोना विषाणु से उत्पन्न रोग कोविड-१९ की भयावहता से संसार को परिचय कराया और तब तक इस से संक्रमित लोग चीन से कई देशों तक पहुँच चुके थे और बड़ी तेज गति से इस रोग ने महामारी का रूप ले लिया। इसलिए इसे चीन द्वारा विश्व समुदाय से अघोषित परोक्ष युद्ध की संज्ञा दी गयी है। चीन की इस ख़तरनाक हरक़त से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है। सारी गतिविधियाँ कोरोना युद्ध से जीतने में सिमट गयी है। स्थिति इतनी ख़राब है कि पृथ्वी का पूरा मानव समुदाय नोवेल कोरोना विषाणु से काँप रहा है। 
         नवम्बर २००२ और जुलाई २००३ के बीच कहर बनकर बरपे संक्रामक रोग सार्स भी चीन से ही पनपा था। वास्तव में सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिण्ड्रोम जिसे हिन्दी में गम्भीर तीव्र श्वसन रोग का लक्षण कहा जाता है, इसे ही संक्षेप में SARS यानी सार्स कहा गया। कोरोना वायरस के सम्बन्ध में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग का मानना है कि नोवेल कोरोना वायरस का करीब १७ साल पहले चीन में आतंक मचा चुके सार्स से जुड़ाव ख़तरनाक है। 
        इस भयावह स्थिति के बीच आशाभरी एक खबर संयुक्त राज्य अमेरिका से आयी है। अमेरिका में कोरोना वायरस की दवाई और वैक्सीन तैयार की जा चुकी है। पहले इस का परीक्षण अन्य जन्तुओं पर किया गया। उस के बाद मानव पर भी इस टीके का परीक्षण हो चुका है। खु़शी की बात है कि ये सारे परीक्षण सफल रहे हैं। जो दवा बनायी गयी है वह पहले से मलेरिया रोग के शमन के लिए उपयोग की जा रही दवा क्लोरोक्वीन (cloroquine) और हाड्रोक्सिक्लोरोक्वीन (Hydroxycloroquine) के संयोग से बनायी गयी है। भारत में भी इन दोनों दवाइयों के प्रयोग कोविड-१९ के रोगियों पर हो रहे हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इस से नोवेल कोरोना वायरस को खत्म करने में सफलता हासिल की है। 
         अमेरिका सहित चार देशों में क्लोरोक्वीन और हाड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के संयोग से बनी दवाई और टीके के ट्रायल के शानदार सकारात्मक परिणाम आये हैं। अमेरिका के अलावा चीन, दक्षिण कोरिया और फ्रान्स में अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कोरोना विषाणु को ख़त्म करनेवाले टीके का ट्रायल किया गया है। अब इस के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी मिली है।
       अमेरिका के सेण्टर फॉर डिजिज कण्ट्रोल एण्ड प्रिवेन्शन (CDC) के अनुसार अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन और हाड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के संयोग से एक टीका भी तैयार किया है। अमेरिका की फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इस टीके के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है। फरवरी २०२० से इस टीके के ट्रायल चीन, दक्षिण कोरिया, फ्रान्स और अमेरिका में सफल रहे हैं। जिन मरीजों का इलाज इस टीके से किया गया है, उन में काफी प्रभावी नतीजे मिले हैं।
         नोवेल कोरोना वायरस से उत्पन्न रोग कोविड-१९ का टीका यानी वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण अमेरिका में वॉशिंगटन के सिएटल शहर में यहीं की एक ४३ साल की महिला जेनिफर हॉलर पर किया है। नोवेल कोरोना वायरस से बचाने के लिए बनाये गये वैक्सीन का परीक्षण सोमवार, २३ मार्च २०२० से शुरू हो चुका है। अमेरिका में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) इस परीक्षण के लिए धन मुहैया करा रहा है और यह परीक्षण सिएटल में कैसर परमानेण्ट वॉशिंगटन हेल्थ रिसर्च इन्स्टीट्यूट में हो रहा है। यह परीक्षण ४५ युवा एवं स्वस्थ स्वेच्छाकर्मियों के साथ शुरू हुआ।
         अमेरिकी सरकार जल्द ही इस टीके से चिकित्सा शुरू कर सकती है। अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस को खत्म करने में इस नये टीके ने सफलता हासिल की है। हालाँकि किसी भी टीके को मंजूरी देने में काफी लम्बा समय लगता है लेकिन वैश्विक चुनौती और हालात देखते हुए अगले कुछ दिनों में इसे इलाज के लिए हरी झण्डी मिलने की उम्मीद है। 
         वैज्ञानिको का कहना है कि सार्स वायरस को खत्म करने में इस दवा ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इस बार इस टीके में कोरोना वायरस के जेनेटिकल कोड के हिसाब से बदलाव किये गये हैं। कोरोना वायरस से लड़ने में इस टीके के नतीजे़ काफ़ी आशाजनक हैं। वास्तव में सार्स का ही भयंकर रूप है नोवेल कोरोना वायरस।           भारत के केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्रालय के का कहना है कि अगर किसी टीके को अमेरिका के थ्क्। यानी फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मंजूरी मिल जाती है तो भारत बिना देरी किये इस का इस्तेमाल कर सकता है। आम तौर पर भारत में किसी नयी दवा को चिकित्सा में शामिल करने से पहले लम्बी प्रक्रिया से गुजरना होता है। सामान्य तौर पर मंजूरी मिलने में २ से ३ महीने भी लग जाते हैं।

शनिवार, 21 मार्च 2020

कोविड-१९ : कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ायें Covid-19 : Increase Immunity To Avoid Corona Virus Infection

-शीतांशु कुमार सहाय
कोरोना वायरस डिजिज २०१९ (Corona virus disease 2019) का संक्षिप्त नाम कोविड-१९ (COVID-19) है। चीन के हूबेई राज्य के वुहान शहर से शुरू होकर एक नये प्रकार के कोरोना विषाणु ने पूरे विश्व में जानलेवा संक्रामक रोग उत्पन्न किया। इस कोरोना वायरस को ‘नोवेल कोरोना वायरस’ का नाम दिया गया। यह सब से पहले पिछले वर्ष यानी २०१९ में पता चला। इसलिए नोवेल कोरोना वायरस से उत्पन्न रोग को ‘कोविड-१९’ का नाम दिया गया।

रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ानेवाली औषधियों का वीडियो देखने के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें....

नोवेल कोरोना विषाणु का पता लगानेवाले चीन के चिकित्सक डॉक्टर ली वेनलियांग की सन्देहास्पद मौत बृहस्पतिवार, छः फरवरी २०२० को हो गयी। कहा गया कि ली वेनलियांग की मौत कोविड-१९ के संक्रमण से हुई। जिसे ली ने खोजा उसी नोवेल कोरोना वायरस ने उन की जान ले ली। डॉक्टर ली वेनलियांग वुहान सेण्ट्रल हॉस्पिटल में नेत्र रोग विशेषज्ञ थे। उन्होंने ३० दिसम्बर २०१९ को साथी चिकित्सक से कहा था कि उन्होंने कुछ मरीजों में सार्स कोरोना वायरस जैसे लक्षण देखे हैं। इस पर चीनी प्रशासन ने ली को प्रताड़ित किया और सख्त हिदायत दी कि वह नया रोग बोलकर लोग को भ्रमित न करें। बाद में डॉक्टर ली वेनलियांग की बात सच निकली और सार्स जैसे लक्षणवाले नये वायरस का नाम ‘नोवेल कोरोना वायरस’ रखा गया और इस के संक्रमण से होनेवाले रोग का नाम ‘कोविड-१९’ दिया गया। यह वायरस मनुष्य से मनुष्य में फैलता है।
अब जानते हैं शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति को बढ़ानेवाली आयुर्वेदिक, यूनानी और होमियोपैथिक औषधियों के बारे में।

आयुर्वेदिक उपाय और औषधियाँ

आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ की कमी या अधिकता से ही रोग होते हैं। कोविड19 कफ की गम्भीर बीमारी है जिसे सन्युक्त राष्ट्र संघ सहित दर्जनों देशों ने महामारी घोषित किया है। आयुर्वेद की जन्मभूमि भारत है और यहाँ कोई भी काम करने से पहले हस्तप्रक्षालन यानी हाथों को धोना और पादप्रक्षालन यानी पैरों को साफ करने की परम्परा है।
हाथों और पैरों को दिनभर में पाँच-छः बार साफ करें तो संक्रामक रोगों से बचा जा सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद के मतानुसार, हर बार गर्म या गुनगुना जल पीयें। ज़्यादा ठण्ड या बर्फ़ वाले जल का सेवन करने से कफ के अलावा वात और पित्त के सन्तुलन भी बिगड़ जाते हैं। 
कमजोर प्रतिरोधक क्षमतावाले लोग दूध में हल्दी डालकर पीयें। वयस्क लोग एक गिलास दूध में एक चम्मच और बच्चे आधा चम्मच का उपयोग करें। इसे भोजन के उपरान्त रात में ग्रहण करें।
तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को एक साथ काला नमक या सेन्धा नमक के साथ चबाकर खायें। इन दोनों का काढ़ा बनाकर भी आप पी सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर के रोगी हैं तो काढ़े में नमक न डालें।
इसी तरह शहद के साथ हल्दी खाने से भी इम्यूनिटी अर्थात् रोग से लड़ने की अन्दरूनी शक्ति तेजी से बढ़ती है।
जो बार-बार बीमार पड़ जाते हैं, किसी भी संक्रामक रोग के शिकार हो जाते हैं या मौसम बदलने पर बीमार पड़ जाते हैं तो ऐसे लोग घर पर आयुर्वेदिक औषधि बनायें। दो लीटर स्वच्छ जल लीजिये। अब गिलोय २० ग्राम, सूखा आँवला २० ग्राम, मुलेठी १० ग्राम और सौंफ के १० ग्राम की मात्रा को जल में डालकर धीमी आँच पर इतना उबालें कि जल आधा हो जाय। भोजन के उपरान्त इस काढ़े की छः चम्मच मात्रा वयस्कों को और तीन चम्मच बच्चों को प्रतिदिन दो बार देनी चाहिये। यह बेहतर इम्यूनिटी बुस्टर है।
आप चाहें तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किसी भी आयुर्वेदिक कम्पनी की औषधि भी खरीद सकते हैं। औषधियों के नाम जानिये-गिलोय वटी, तुलसी वटी और नीम वटी। इन तीनों में से दो-दो वटी यानी दो-दो टैब्लेट लीजिये और इन्हें अदरख और नीम्बू के रस के र्साथ भोजन के बाद सुबह-शाम ग्रहण करें। 

यूनानी औषधि

आयुर्वेद की तरह यूनानी चिकित्सा पद्धति में भी हस्तप्रक्षालन और पादप्रक्षालन पर जोर दिया जाता है। यूनानी में कुरान के कुछ नियम अपनाये जाते हैं। नमाज से पहले वजु करने का नियम है। केहुनी तक हाथ और घुटनों तक पैरों को धोने को ही वजु कहते हैं। ईरान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कुवैत, बहरीन जैसे इस्लामिक देशों के लोग वजु का पालन सही ढंग से करते तो वहाँ नोवेल कोरोना वायरस का इतना ज़्यादा संक्रमण नहीं फैलता।
यूनानी में शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेवाली प्रमुख औषधि है- खमीरा मरवारीद। इस की पाँच ग्राम मात्रा प्रतिदिन दूध के साथ ली जानी चाहिये। खमीरा मरवारीद टैब्लेट के रूप में भी उपलब्ध है। इस के अलावा जवारिश शाही, जवारिश कमूनी और माजून दबीदुलवर्द से भी इम्यूनिटी बढ़ती है। इन दवाइयों के रैपर पर प्रयोग विधि दी हुई है।

होमियोपैथिक औषधि       

होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति में बीमारी के आधार पर नहीं, लक्षण के आधार पर चिकित्सा की जाती है। सर्दी, छींक, खाँसी, सिरदर्द, शरीर में दर्द, बुखार, कमजोरी, पाचन में गड़बड़ी, निमोनिया, साँस लेने में तकलीफ कोविड-१९ बीमारी के लक्षण हैं। इसलिए नोवेल कोरोना विषाणु के संक्रमण से बचने के लिए आर्सेनिक एलबम-३० दवा लेनी चाहिये। 
इस रोग के प्रति निरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ रोग का संक्रमण होने पर इसी दवा से इलाज सम्भव है। यदि कोविड-१९ हो गया हो तो होमियोपैथिक दवा आर्सेनिक एलबम-३० तीन बार प्रतिदिन लेनी चाहिये। 
         सतर्क रहिये, इम्यूनिटी बढ़ाइये और स्वस्थ रहिये।

शुक्रवार, 20 मार्च 2020

कोविड-१९ : कोरोना वायरस संक्रमण से बचें, घर पर बनायें सेनिटाइज़र COVID-19 : Avoid Corona Virus Infection, Make Sanitizer At Home

-शीतांशु कुमार सहाय
         नोवेल कोरोना वायरस विषाणु से उत्पन्न कोविड-19 वास्तव में तेज गति से बढ़नेवाला संक्रामक रोग है। यह जानलेवा महामारी विश्वव्यापी गम्भीर समस्या बनकर उभरा है। लोग हैण्डवाश और सेनिटाइज़र का खूब उपयोग कर रहे हैं। हैण्डवाश या सेनिटाइज़र ज़्यादा महंगे पड़ते हैं। अगर इन में रसायनों की उचित मात्रा नहीं दी गयी होगी तो वे वायरस यानी विषाणुओं को ख़त्म करने में सक्षम नहीं होंगे।

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         मैं आप को बता रहा हूँ घर में ही अत्यन्त कम खर्चे पर सेनिटाइज़र कैसे बना सकते हैं। जो सेनिटाइज़र बनाना आप सीखेंगे, वह बाज़ार के केमिकल वाले सेनिटाइज़र से बेहतर साबित होंगे।
         एक लीटर साफ जल लीजिये। इस में नीम के 54 हरी पत्तियों को और तुलसी की 21 पत्तियों को डालें। पत्तियों का आकार छोटा हो तो संख्या बढ़ा दें। धीमी आँच पर इतना उबालें कि जल आधा लीटर रह जाय। इसे उतारकर साफ सूती कपड़े से छान लें।
         अब पुनः छः सौ मिलीलीटर जल चूल्हे पर चढ़ायें और इसे पूरी तरह उबालें। उबलने पर उतार लें और इस में असली कर्पूर का चूर्ण दस ग्राम और फिटकिरी का चूर्ण दस ग्राम डालकर अच्छी तरह मिला दें। 
इस के बाद नीम-तुलसी के काढ़े में कर्पूर-फिटकिरी वाला घोल मिला दीजिये। ठण्डा होने पर बोतल में भर लें। इस तरह कम खर्च पर एक लीटर सेनिटाइज़र तैयार हो गया जो बाज़ार के सेनिटाइज़र से बेहतर है। पूरे विश्वास के साथ इस का उपयोग करें। 
         इस प्राकृतिक सेनिटाइज़र का स्प्रे घर में करें। इस से सूती कपड़ा भींगाकर स्पर्श करनेवाले जगहों को पोंछ दें तो वह विषाणुमुक्त हो जायेगा। 
कोरोना वायरस से डरिये नहीं। स्वच्छता का पूरा ख्याल रखिये और जो सेनिटाइज़र बनाना आप ने सीखा, उसे अपने मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी बताइये; ताकि वे भी कोविड-19 और अन्य संक्रामक रोगों से बचे रहें।

COVID-19 से बचें, घर पर सेनिटाइजर बनायें Make Sanitizer at Home #coronavirus #COVID19 #IndiaFi...

गुरुवार, 19 मार्च 2020

22 मार्च को जनता कर्फ्यू, Coronavirus से उत्पन्न COVID19 पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश Janata curfew on March 22, Full Message to Nation by The Prime Minister of India on COVID19

  •          मेरे प्यारे देशवासियों, आप से मैंने जब भी, जो भी माँगा है, मुझे कभी देशवासियों ने निराश नहीं किया है। ये आप के आशीर्वाद की ताकत है कि हमारे प्रयास सफल होते हैं।
  •          इस समय पूरा विश्व और भारत देश कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है।
  •          आज मैं आप सभी देशवासियों से, आप से, कुछ माँगने आया हूँ। मुझे आप के आनेवाले कुछ सप्ताह चाहिए, आप का आनेवाला कुछ समय चाहिए।
  •          अभी तक विज्ञान, कोरोना महामारी से बचने के लिए, कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इस की कोई वैक्सीन बन पायी है। ऐसी स्थिति में चिंता बढ़नी बहुत स्वाभाविक है। इन देशों में शुरुआती कुछ दिनों के बाद अचानक बीमारी का जैसे विस्फोट हुआ है। इन देशों में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है।
  •          भारत सरकार इस स्थिति पर, कोरोना के फैलाव के इस ट्रैक रिकॉर्ड पर पूरी तरह नजर रखे हुए है।
  •          आज जब बड़े-बड़े और विकसित देशों में हम कोरोना महामारी का व्यापक प्रभाव देख रहे हैं, तो भारत पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ये मानना गलत है।
  •          इसलिए, इस वैश्विक महामारी का मुकाबला करने के लिए दो प्रमुख बातों की आवश्यकता है, पहला- संकल्प और दूसरा- संयम।
  •          आज 130 करोड़ देशवासियों को अपना संकल्प और दृढ़ करना होगा कि हम इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए एक नागरिक के नाते, अपने कर्तव्य का पालन करेंगे, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के दिशा निर्देशों का पालन करेंगे।
  •          आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएंगे। साथियों, इस तरह की वैश्विक महामारी में, एक ही मंत्र काम करता है- 'हम स्वस्थ तो जग स्वस्थ।'
  •          ऐसी स्थिति में, जब इस बीमारी की कोई दवा नहीं है, तो हमारा खुद का स्वस्थ बने रहना बहुत आवश्यक है। इस बीमारी से बचने और खुद के स्वस्थ बने रहने के लिए अनिवार्य है संयम। और संयम का तरीका क्या है- भीड़ से बचना, घर से बाहर निकलने से बचना।
  •         आजकल जिसे सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) कहा जा रहा है, कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में, ये बहुत ज्यादा आवश्यक है। इसलिए मेरा सभी देशवासियों से ये आग्रह है कि आने वाले कुछ सप्ताह तक, जब बहुत जरूरी हो तभी अपने घर से बाहर निकलें।
  • जितना संभव हो सके, आप अपना काम, चाहे बिजनेस से जुड़ा हो, ऑफिस से जुड़ा हो, अपने घर से ही करें। मेरा एक और आग्रह है कि हमारे परिवार में जो भी सीनियर सिटिजन्स हों, 65 वर्ष की आयु के ऊपर के व्यक्ति हों, वो आने वाले कुछ सप्ताह तक घर से बाहर न निकलें।
  • आज की पीढ़ी इस से बहुत परिचित नहीं होगी, लेकिन पुराने समय में जब युद्ध की स्थिति होती थी, तो गाँव-गाँव में ब्लैकआउट किया जाता था। घरों के शीशों पर कागज़ लगाया जाता था, लाइट बंद कर दी जाती थी, लोग चौकी बनाकर पहरा देते थे।
  •          मैं आज प्रत्येक देशवासी से एक और समर्थन माँग रहा हूँ। ये है जनता-कर्फ्यू। जनता कर्फ्यू यानि जनता के लिए, जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू। इस रविवार, यानि 22 मार्च को, सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक, सभी देशवासियों को, जनता-कर्फ्यू का पालन करना है।
  • साथियों, 22 मार्च को हमारा ये प्रयास, हमारे आत्म-संयम, देशहित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक प्रतीक होगा। 22 मार्च को जनता-कर्फ्यू की सफलता, इसके अनुभव, हमें आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे।
  •          संभव हो तो हर व्यक्ति प्रतिदिन कम-से-कम 10 लोगों को फोन करके कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के साथ ही जनता-कर्फ्यू के बारे में भी बताए। साथियों, ये जनता कर्फ्यू एक प्रकार से हमारे लिए, भारत के लिए एक कसौटी की तरह होगा। ये कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत कितना तैयार है, ये देखने और परखने का भी समय है।
  • आपके इन प्रयासों के बीच, जनता-कर्फ्यू के दिन, 22 मार्च को मैं आपसे एक और सहयोग चाहता हूं।
  • मैं चाहता हूँ कि 22 मार्च, रविवार के दिन हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें। रविवार को ठीक 5 बजे, हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर, बाल्कनी में, खिड़कियों के सामने खड़े होकर 5 मिनट तक ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करें।
  •          पूरे देश के स्थानीय प्रशासन से भी मेरा आग्रह है कि 22 मार्च को 5 बजे, सायरन की आवाज से इसकी सूचना लोगों तक पहुँचाएँ। सेवा परमो धर्म के हमारे संस्कारों को मानने वाले ऐसे देशवासियों के लिए हमें पूरी श्रद्धा के साथ अपने भाव व्यक्त करने होंगे।
  • संकट के इस समय में, आप को ये भी ध्यान रखना है कि हमारी आवश्यक सेवाओं पर, हमारे हॉस्पिटलों पर दबाव भी निरंतर बढ़ रहा है। इसलिए मेरा आप से आग्रह ये भी है कि रूटीन चेक-अप के लिए अस्पताल जाने से जितना बच सकते हैं, उतना बचें।
  • कोरोना महामारी से उत्पन्न हो रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक कोविड-19- इकोनॉमिक रिस्पॉन्स टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया है।
  • ये टास्क फोर्स, ये भी सुनिश्चित करेगी कि, आर्थिक मुश्किलों को कम करने के लिए जितने भी कदम उठाए जाएँ, उन पर प्रभावी रूप से अमल हो। संकट के इस समय में मेरा देश के व्यापारी जगत, उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप जिन-जिन लोगों से सेवाएँ लेते हैं, उन के आर्थिक हितों का ध्यान रखें।
  •          मैं देशवासियों को इस बात के लिए भी आश्वस्त करता हूँ कि देश में दूध, खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ, जीवन के लिए जरूरी ऐसी आवश्यक चीजों की कमी न हो, इस के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
  •         पिछले दो महीनों में, 130 करोड़ भारतीयों ने, देश के हर नागरिक ने, देश के सामने आए इस संकट को अपना संकट माना है, भारत के लिए, समाज के लिए उससे जो बन पड़ा है, उस ने किया है।
  • मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में भी आप अपने कर्तव्यों का, अपने दायित्वों का इसी तरह निर्वहन करते रहेंगे। हां, मैं मानता हूं कि ऐसे समय में कुछ कठिनाइयां भी आती हैं, आशंकाओं और अफवाहों का वातावरण भी पैदा होता है। कुछ दिन में नवरात्रि का पर्व आ रहा है। ये शक्ति उपासना का पर्व है। भारत पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़े, यही शुभकामना है।

सोमवार, 16 मार्च 2020

नवग्रह उपासना-१० : नवग्रह कवच से रोग और शोक से मुक्ति #NavgrahUpasana



         रोग, शोक और हर तरह के दु:ख से बचने के लिए प्रतिदिन प्रातःकाल और सन्ध्या में 'नवग्रह कवच' सुनें या पाठ करें।

शनिवार, 14 मार्च 2020

MATERIALS MANAGEMENT सामग्री प्रबन्धन : Course Details, Job & Training I...


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