गुरुवार, 22 जनवरी 2026

सरस्वती पूजा विधि और शुभ मुहूर्त Saraswati Puja Shubh Muhurat

  

जय माँ सरस्वती

    विक्रम सम्वत् २०८२ में वसन्त पञ्चमी अर्थात् सरस्वती पूजा २३ जनवरी २०२६ को है। ज्ञान व विद्या की देवी माता सरस्वती की आराधना का यह विशेष दिवस होता है। यहाँ जानते हैं इस बार सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में।  

      हालाँकि सरस्वती पूजा के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है; क्योंकि वसन्त पञ्चमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। वैसे ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, विशेष रूप से शुभ चौघडिया मुहूर्त में पूजा पाठ से ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों के लिए यह मुहूर्त विशेष लाभकारी माना जाता है। जिन बच्चे का शिक्षा संस्कार इस दिन किया जाता है, उन्हें भी मुहूर्त का ख्याल करते हुए ही पूजा करनी चाहिए।

शुभ मुहूर्त :

      चल चौघडिया सुबह में ७ बजकर १३ मिनट से ८ बजकर ३३ मिनट तक। लाभ चौघडिया सुबह में ८ बजकर ३३ मिनट से ९ बजकर ५३ मिनट तक। अमृत चौघडिया सुबह ९ बजकर ५३ मिनट से ११ बजकर १३ मिनट तक।                            

सरस्वती पूजा विधि और मंत्र :-

      सरस्वती पूजा के लिए सब से पहले पूजा स्थल को अच्छे से गंगाजल से साफ कर लें। इस के बाद सरस्वती माता की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें और उस लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछा लें। इस के बाद धूप, दीप और गुगुल जलाएँ और फिर पूजा का आरंभ करें।

      सब से पहले हाथ जोड़कर माता सरस्वती का ध्यान करें।

      “ऊँ अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:॥” इस मंत्र को बोलकर पीले फूल से जल को अपने आसन पर तीन बार अर्पित करें। ऐसे करने से आप का आसन शुद्ध होगा।

      अब "ऊँ केशवाय नम:, ऊँ माधवाय नम:, ऊँ नारायणाय नम:" मंत्र बोलते हुए अपने हाथ धोएँ। इस के बाद "ऊँ पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्वं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥" मंत्र बोले।

      अब "चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्, आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।" मंत्र कहते हुए चंदन लगाएँ। इस के उपरान्त हाथ में तिल, फूल, अक्षत, मिठाई, फल आदि लेकर "यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः माघ मासे वसन्त पञ्चमी तिथौ भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।" मंत्र बोलकर सभी चीजें एक एक कर माँ सरस्वती को अर्पित कर दें। 

      इस के बाद गणपतिजी की पूजा करें। पहले गणेशजी का ध्यान करते हुए बोले "गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।"

      अब हाथ में थोड़े अक्षत लेकर गणपति की का आह्वान करें और बोलें "ऊँ गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।।" अब अक्षत अर्पित कर दें। अब गणेशजी को तिलक करें और तिलक करते समय बोलें "एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयं ऊँ गं गणपतये नम:।" रक्त चंदन लगाएँ और बोलें "इदं रक्त चंदनम् लेपनम् ऊँ गं गणपतये नम:।"

      अब गणेशजी को सिंदूर अर्पित करें और बोलें "इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊँ गं गणपतये नम:।" इस के साथ गणेशजी को दूर्वा अर्पित कर दें। अब वस्त्र अर्पित करें और बोलें "ऊँ गं गणपतये दूर्वावस्त्रं च समर्पयामि।" 

      गणेशजी को प्रसाद अर्पित करें और बोलें "इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊँ गं गणपतये समर्पयामि।" मिष्टान्न अर्पित करने के लिए मंत्र है "इदं शर्करा घृतयुक्त नैवेद्यं ऊँ गं गणपतये समर्पयामि।" अब गणेशजी को पान और सुपारी अर्पित करें और बोलें "इदं ताम्बूल पुंगीफल समायुक्तं ऊँ गं गणपतये समर्पयामि।" अब गणेशजी को फूल अर्पित करें और बोलें "एष: पुष्पाञ्जलि ऊँ गं गणपतये नम:।"

सरस्वती पूजा विधि :

      एक घड़ा या लोटा लें और उस पर मौली बाँध दें। उस के ऊपर आम का पल्लव रखें। कलश में पहले गंगा जल डालें और तब सामान्य शुद्ध जल भरें और उस में सुपारी, दूर्वा, अक्षत, मुद्रा रखें। कलश के गले में मौली लपेटें। नारियल पर लाल वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें। अब कलश को हाथ में लेकर वरुण देव का ध्यान करते हुए बोलें "ऊँ तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेऽमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:।"

अब सरस्वती माता का ध्यान करते हुए बोलें :

"या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं।

वीणा-पुस्तकधारिणीं भयदां जाड्यांधकारपहाम्।।

हस्ते स्फटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।"

      इस के बाद हाथ में थोड़े अक्षत लें और बोलें “ॐ भूर्भुवः स्वः सरस्वती देव्यै इहागच्छ इह तिष्ठ" बोलकर अक्षत छोड़े। इस के बाद जल लेकर "एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।” और जल को अर्पित करें। अब प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएँ। "ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ श्री सरस्वत्यै नमः।।" बोलते हुए माँ सरस्वती को स्नान कराएं।

      इस के बाद वस्त्रं समर्पयामि बोलते हुए वस्त्र अर्पित करें। चंदन का तिलक करें। "ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, सरस्वत्यै नमो नमः।।"

      अब फूल अर्पित करें और बोलें "ॐ सरस्वत्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।" इस के बाद "इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊँ सरस्वतयै समर्पयामि” मंत्र बोलते हुए नैवैद्य अर्पित करें।

      अब माँ सरस्वती को भोग लगाएँ और “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊँ सरस्वत्यै समर्पयामि” बालते हुए प्रसाद अर्पित कर दें। प्रसाद के बाद माँ सरस्वती को सुपारी और पान अर्पित करें और बोलें "इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि।"

      अंत में एक फूल लेकर उस में चंदन और अक्षत लगाकर किताब कॉपी पर रखें और रखते हुए बोलें "एष: पुष्पान्जलि ऊँ सरस्वतयै नम:।"

      अंत में सामूहिक रूप से माँ सरस्वती की आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।

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