शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

माता आदिशक्ति के 108 नाम / MAA AADISHAKTI'S 108 NAMES


प्रस्तुति- शीतांशु कुमार सहाय
1.भवप्रीता,  2.भवानी,   3.भवमोचनी, 4.आर्या, 5.दुर्गा, 6.जया, 7.आद्या, 8.त्रिनेत्रा, 9.शूलधारिणी, 10.पिनाकधारिणी, 11.चित्रा, 12.चंद्रघंटा, 13.महातपा, 14.बुद्धि, 15.अहंकारा, 16.चित्तरूपा, 17.चिता, 18.चिति, 19.सर्वमंत्रमयी, 20.सत्ता, 21.सत्यानंदस्वरुपिणी, 22.अनंता, 23.भाविनी, 24.भव्या, 25.अभव्या, 26.सदागति, 27.शाम्भवी, 28.देवमाता, 29.चिंता, 30.रत्नप्रिया, 31.सर्वविद्या, 32.दक्षकन्या, 33.दक्षयज्ञविनाशिनी, 34.अपर्णा, 35.अनेकवर्णा, 36.पाटला, 37.पाटलावती, 38.पट्टाम्बरपरिधाना, 39.कलमंजरीरंजिनी, 40.अमेयविक्रमा, 41.क्रूरा, 42.सुन्दरी, 43.सुरसुन्दरी, 44.नवदुर्गा, 45.मातंगी, 46.मतंगमुनिपूजिता, 47.ब्राह्मी, 48.माहेश्वरी, 49.एंद्री, 50.कौमारी, 51.वैष्णवी, 52.चामुंडा, 53.वाराही, 54.लक्ष्मी, 55.पुरुषाकृति, 56.विमला, 57.उत्कर्षिनी, 58.ज्ञाना, 59.क्रिया, 60.नित्या, 61.बुद्धिदा, 62.बहुला, 63.बहुलप्रिया, 64.सर्ववाहनवाहना, 65.निशुंभशुंभहननी, 66.महिषासुरमर्दिनी, 67.मधुकैटभहंत्री, 68.चंडमुंडविनाशिनी, 69.सर्वसुरविनाशा, 70.सर्वदानवघातिनी, 71.सर्वशास्त्रमयी, 72.सत्या, 73.सर्वास्त्रधारिनी, 74.अनेकशस्त्रहस्ता, 75.अनेकास्त्रधारिनी, 76.कुमारी, 77.एककन्या, 78.कैशोरी, 79.युवती, 80.यत‍ि, 81.अप्रौढ़ा, 82.प्रौढ़ा, 83.वृद्धमाता, 84.बलप्रदा, 85.महोदरी, 86.मुक्तकेशी, 87.घोररूपा, 88.महाबला, 89.अग्निज्वाला, 90.रौद्रमुखी, 91.कालरात्रि, 92.तपस्विनी, 93.नारायणी, 94.भद्रकाली, 95.विष्णुमाया, 96.जलोदरी, 97.शिवदुती, 98.कराली, 99.अनंता, 100.परमेश्वरी, 101.कात्यायनी, 102.सावित्री, 103.प्रत्यक्षा, 104.ब्रह्मवादिनी, 105.अम्बा,  106.पराम्बा,  107.अम्बिका,   108.भुवनेश्वरी।

बिहार के नालन्दा जिले में अपने पैतृक गाँव कल्याण बिगहा स्थित देवी मन्दिर में एक जनवरी 2014 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूजा की। साथ में हैं पुरोहित जो पूजा करवा रहे हैं।

बुधवार, 1 जनवरी 2014

वर्ष 1947 की तरह 2014 / 1947 And 2014 Are Same As Dates & Days



ऐसा संयोग होता रहता है। एक संयोग देखिये कि इस वर्ष यानि सन् 2014 की दिनपत्री ठीक वही है जो सन् 1947 की दिनपत्री थी। दोनों वर्षों के दिनपत्री यानि कैलेण्डर का मिलान करें।


श्रीमद्भगवद्गीता में यज्ञ की महिमा : आत्मा का आत्मा में हवन / YAJANA IN SHRIMADBHAGWADGEETA



-शीतांशु कुमार सहाय 
यज्ञ के कई फायदे हैं। इससे जहाँ वातावरण शुद्ध होता है वहीं स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। वायु, तन व मन की शुद्धि होती है। साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होता है। यज्ञ के सन्दर्भ में कई ग्रन्थों में उल्लेख मिलते हैं। योग के माध्यम से आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने वाले आन्तरिक हवन व यज्ञ करते हैं और श्रीमद्भगवद्गीता का निरन्तर पाठ करते हैं। सामान्य तौर पर विविध हवन सामग्रियों को अग्नि-कुण्ड में डालकर उसे सूक्ष्म रूप से वायुमण्डल में समाहित करा दिया जाता है जिससे उन पशु, पक्षियों व वनस्पतियों को भी लाभ मिलता है जो यज्ञ नहीं कर पाते हैं। यहाँ जानते हैं श्रीमद्भगवद्गीता में यज्ञ का महत्त्व।
गायत्री सद्बुद्धि की देवी और यज्ञ सत्कर्मों का पिता है। सद्भावनाओं एवं सत्प्रवृत्तियों के अभिवर्द्धन के लिए गायत्री माता और यज्ञ पिता का युग्म हर दृष्टि से सफल एवं समर्थ सिद्ध हो सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार परमात्मा के निमित्त किया कोई भी कार्य यज्ञ कहा जाता है। परमात्मा के निमित्त किये कार्य से संस्कार पैदा नहीं होते न कर्म बंधन होता है। श्रीमद्भगवद्गीता के चौथे अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश देते हुए विस्तारपूर्वक विभिन्न प्रकार के यज्ञों को बताया गया है। श्री भगवन कहते हैं-- अर्पण ही ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है, आहुति ब्रह्म है, कर्म रूपी समाधि भी ब्रह्म है और जिसे प्राप्त किया जाना है वह भी ब्रह्म ही है। यज्ञ परब्रह्म स्वरूप माना गया है। इस सृष्टि से हमें जो भी प्राप्त है, जिसे अर्पण किया जा रहा है, जिसके द्वारा हो रहा है, वह सब ब्रह्मस्वरूप है अर्थात सृष्टि का कण-कण, प्रत्येक क्रिया में जो ब्रह्मभाव रखता है वह ब्रह्म को ही पाता है अर्थात ब्रह्मस्वरूप हो जाता है।

आत्मा का आत्मा में हवन--
कर्मयोगी देव यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं तथा अन्य ज्ञान योगी ब्रह्म-अग्नि में यज्ञ द्वारा यज्ञ का हवन करते हैं। देव पूजन उसे कहते हैं जिसमें योग द्वारा अधिदैव अर्थात जीवात्मा को जानने का प्रयास किया जाता है। कई योगी ब्रह्म-अग्नि में आत्मा का आत्मा में हवन करते हैं अर्थात अधियज्ञ (परमात्मा) का पूजन करते हैं।

आत्मसंयम की योगाग्नि में विषयों की आहुति-- 
कई योगी इन्द्रियों के विषयों को रोककर अर्थात इन्द्रियों को संयमित कर हवन करते हैं। अन्य योगी शब्दादि विषयों को इन्द्रिय रूप अग्नि में हवन करते है अर्थात मन से इन्द्रिय विषयों को रोकते हैं। अन्य कई योगी सभी इन्द्रियों की क्रियाओं एवं प्राण क्रियाओं को एक करते हैं अर्थात इन्द्रियों और प्राण को वश में करते हैं, उन्हें निष्क्रिय करते हैं। इन सभी वृत्तियों को करने से ज्ञान प्रकट होता है। ज्ञान द्वारा आत्मसंयम की योगाग्नि प्रज्ज्वलित कर सम्पूर्ण विषयों की आहुति देते हुए आत्म-यज्ञ करते हैं। इस प्रकार भिन्न भिन्न योगी द्रव्य-यज्ञ, तप-यज्ञ तथा दूसरे योग-यज्ञ करने वाले है और कई तीक्ष्णव्रती होकर योग करते हैं। यह स्वाध्याय यज्ञ करने वाले पुरुष शब्द में शब्द का हवन करते है। इस प्रकार यह सभी कुशल और यत्नशील योगाभ्यासी पुरुष जीव बुद्धि का आत्मस्वरूप में हवन करते हैं।
द्रव्य-यज्ञ--
इस सृष्टि से जो कुछ भी हमें प्राप्त है उसे ईश्वर को अर्पित कर ग्रहण करना द्रव्य यज्ञ है।
तप-यज्ञ--
जप कहाँ से हो रहा है इसे देखना तप यज्ञ है। स्वर एवं हठयोग क्रियाओं को भी तप यज्ञ जाना जाता है।
योग-यज्ञ-
प्रत्येक कर्म को ईश्वर के लिया कर्म समझ निपुणता से करना योग यज्ञ है।
तीक्ष्णवृत्ति-- 
यम, नियम, संयम आदि कठोर शारीरिक और मानसिक क्रियाओं द्वारा मन को निग्रह करने का प्रयास. शम, दम, उपरति, तितीक्षा, समाधान, श्रद्धा। मन को संसार से रोकना शम है। बाह्य इन्द्रियों को रोकना दम है। निवृत्त की गयी इन्द्रियों भटकने न देना उपरति है। सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख, हानि-लाभ, मान-अपमान को शरीर धर्म मानकर सरलता से सह लेना तितीक्षा है। रोके हुए मन को आत्म-चिन्तन में लगाना समाधान है।
अपान वायु में प्राण वायु का हवन--
कई योगी अपान वायु में प्राण वायु का हवन करते हैं जैसे अनुलोम-विलोम से सम्बंधित श्वास क्रिया तथा कई प्राण वायु में अपान वायु का हवन करते हैं जैसे गुदा संकुचन अथवा सिद्धासन। कई प्राण और अपान दोनों प्रकार की वायु को रोककर प्राणों का प्राण में हवन करते हैं, जैसे रेचक और कुम्भक प्राणायाम।
कई योगी सब प्रकार के आहार को जीतकर अर्थात नियमित आहार करने वाले प्राण वायु में प्राण वायु का हवन करते हैं अर्थात प्राण को पुष्ट करते हैं। इस प्रकार यज्ञों द्वारा काम, क्रोध एवं अज्ञान रूपी पाप नाश हो जाते हैं अर्थात ज्ञान से परमात्मा को जान लेते हैं।
यज्ञ का अमृत--
यज्ञ से बचे हुए अमृत का अनुभव करने वाले परमात्मा को प्राप्त होते हैं अर्थात यज्ञ क्रिया के परिणाम स्वरूप जो बचता है वह ज्ञान ब्रह्मस्वरूप है। इस ज्ञान रूपी अमृत को पीकर वह योगी तृप्त और आत्म स्थित हो जाते हैं परन्तु जो मनुष्य यज्ञाचरण नहीं करते उनको न इस लोक में कुछ हाथ लगता है न परलोक में। इस प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता एवं वेद में बहुत प्रकार की यज्ञ की विधियाँ बताई गयी हैं। यह यज्ञ विधियाँ कर्म से ही उत्पन्न होती हैं। इस बात को जानकर कर्म की बाधा से जीव मुक्त हो जाता है। ज्ञान ही अमृत है और इस ज्ञान को लम्बे समय तक योगाभ्यासी पुरुष अपने आप अपनी आत्मा में प्राप्त करता है; क्योंकि आत्मा ही अक्षय ज्ञान का स्रोत है। जिसने अपनी इन्द्रियों का वश में कर लिया है तथा निरन्तर उन्हें वशमें रखता है, जो निरन्तर आत्मज्ञान में तथा उसके उपायों में श्रद्धा रखता है- जैसे गुरू, शास्त्र, संत आदि में। ऐसा मनुष्य उस अक्षय ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होते ही परम शान्ति को प्राप्त होता है। ज्ञान प्राप्त होने के बाद उसका मन नहीं भटकता, इन्द्रियों के विषय उसे आकर्षित नहीं करते, लोभ और मोह से वह दूर हो जाता है तथा निरन्तर ज्ञान की पूर्णता में रमता हुआ आनन्द को प्राप्त होता है।
द्रव्य-यज्ञ से ज्ञान-यज्ञ श्रेष्ठ-- 
द्रव्य-यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान-यज्ञ अत्यन्त श्रेष्ठ है। द्रव्य-यज्ञ सकाम यज्ञ हैं और अधिक-से-अधिक स्वर्ग को देने वाले हैं परन्तु ज्ञान-यज्ञ द्वारा योगी कर्म बन्धन से छुटकारा पा जाता है और परम गति को प्राप्त होता है। सभी कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं। ज्ञान से ही आत्म तृप्ति होती है और कोई कर्म अवशेष नहीं रहता। प्रज्ज्वलित अग्नि सभी काष्ठ को भस्म कर देती है उसी प्रकार ज्ञानाग्नि सभी कर्म फलों को; उनकी आसक्ति को भस्म कर देती है। इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला वास्तव में कुछ भी नहीं है; क्योंकि जल, अग्नि आदि से यदि किसी मनुष्य अथवा वस्तु को पवित्र किया जाय तो वह शुद्धता और पवित्रता थोड़े समय के लिए ही होती है, जबकि ज्ञान से जो मनुष्य पवित्र हो जाय वह पवित्रता सदैव के लिए हो जाती है।

सत्कर्मों का पिता है यज्ञ--
यज्ञ की वायु तो सर्वत्र ही पहुँचती है और पशु-पक्षियों, कीटाणुओं एवं वनस्पतियों के आरोग्य की भी यज्ञ से रक्षा होती है। यज्ञ की ऊष्मा मनुष्य के अंतःकरण पर देवत्व की छाप डालती है। जहाँ यज्ञ होते हैं, वह भूमि एवं प्रदेश सुसंस्कारों की छाप अपने अन्दर धारण कर लेता है और वहाँ जाने वालों पर दीर्घकाल तक प्रभाव डालता रहता है। तीर्थ वहीं बने हैं, जहाँ बड़े-बड़े यज्ञ हुए थे। जिन घरों में, जिन स्थानों में यज्ञ होते हैं, वह भी एक प्रकार का तीर्थ बन जाता है और वहाँ जिनका आगमन रहता है, उनकी मनोभूमि उच्च, सुविकसित एवं सुसंस्कृत बनती हैं। महिलाएँ, छोटे बालक एवं गर्भस्थ बालक विशेष रूप से यज्ञ शक्ति से अनुप्राणित होते हैं। उन्हें सुसंस्कारी बनाने के लिए यज्ञीय वातावरण की समीपता बड़ी उपयोगी सिद्ध होती है। कुबुद्धि, कुविचार, दुर्गुण एवं दुष्कर्मों से विकृत मनोभूमि में यज्ञ से भारी सुधार होता है। इसलिए यज्ञ को पापनाशक कहा गया है। यज्ञीय प्रभाव से सुसंस्कृत हुई विवेकपूर्ण मनोभूमि का प्रतिफल जीवन के प्रत्येक क्षण को स्वर्ग जैसे आनन्द से भर देता है, इसलिए यज्ञ को स्वर्ग देने वाला कहा गया है। कर्मकाण्डों, धर्मानुष्ठानों, संस्कारों, पर्वों में यज्ञ आयोजन मुख्य है।

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

नूतनवर्षाभिनन्दन! सदाचार के साथ करें 2014 में नयी पहल / WISH YOU ALL A HAPPY NEW YEAR 2014



-शीतांशु कुमार सहाय/ SHEETANSHU KUMAR SAHAY
नववर्ष 2014 के प्रथम दिवस में नवीन उत्साह और नये स्वप्नों के साथ आपका स्वागत है! ऐसे-वैसे जैसे भी हो, वर्ष 2013 बीत ही गया। नूतन उल्लास के साथ आया है 2014 जिसमें कई हसीन सितारे जड़े हैं। उन सितारों को पाने लिए, उनकी चमक-दमक को आत्मसात् करने के लिए, उसके प्रकाश से विकास का पथ प्रशस्त करने के लिए प्रयत्न तो करना ही पड़ेगा। चूँकि प्रत्येक क्षेत्र में भीड़ है, कहीं अधिक तो कहीं कम; लिहाजा लक्ष्योन्मुखी प्रयत्न करना पड़ेगा। यह प्रयत्न प्रतियोगितात्मक हो, प्रतिद्वन्द्वितात्मक नहीं। किसी से प्रतियोगिता करने का मतलब है कि हमारा प्रयत्न अपने प्रतियोगी की अपेक्षा अधिक सशक्त और अधिक लक्ष्योन्मुखी होना चाहिये। ऐसा होगा तभी सफलता मिलेगी। ऐसी सफलता स्वस्थ परम्परा का परिचायक है। प्रतियोगिता करने से परिश्रम करने की क्षमता में वृद्धि होती है। इसके विपरीत प्रतिद्वन्द्विता से द्वन्द्व अर्थात् खींचतान बढ़ती है। यह खींचतान मन में हो या किसी व्यक्ति से, दोनों ही हानिकारक हैं। किसी की सफलता या समृद्धि से जब हर्ष के बदले ईर्ष्या हो तो समझिये कि ईर्ष्या बीज रूप में मन में अंकुरित-प्रस्फुटित होकर प्रतिद्वन्द्विता को उत्पन्न कर देगी। 

नये वर्ष में लक्ष्य निश्चित करते समय यह भी निर्धारित करें कि 2014 के एक सितारे को पाने के लिए भी प्रतियोगिता के मार्ग पर ही अग्रसर होंगे, प्रतिद्वन्द्विता के मार्ग पर कदापि नहीं।     
नये स्वप्नों को साकार करने के लिए, हसीन जिन्दगी गुजारने के लिए वही करें जो अच्छा है। अच्छा वही है जिसे करने में आनन्द की अनुभूति हो और जिसका परिणाम भी व्यक्गित व सामूहिक रूप से सकारात्मक हो। यकीन मानिये कि अगर आप वो करेंगे जो आपको अच्छा नहीं लगता है तो आपको वो परिणाम मिलेगा जो आपको अच्छा नहीं लगेगा। जब आपको अच्छा नहीं लगेगा तब नये वर्ष के नये स्वप्न बिखर जायेंगे, पूरे नहीं होंगे।
अच्छाई और बुराई के बीच बहुत कम फासला है, पतले धागे-सी सीमा रेखा है इन दोनों के बीच। ये दोनों एक नहीं हो सकते, परस्पर विरोधी हैं दोनों। इनमें से एक ही को चुनना होगा। संगीत के क्षेत्र में एक कहावत प्रचलित है कि जो कलाकार सुर में नहीं है, वह असुर है। सदैव सुर में रहने वाला ही लक्ष्योन्मुखी प्रयत्न कर सकता है, लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। ऐसा व्यक्ति ही विकास के शिखर से शंखनाद कर दूसरों को भी सकारात्मक प्रयत्न से लक्ष्य-प्राप्ति के लिए उत्प्रेरित कर सकता है। ऐसा आप भी कर सकते हैं, बस आवश्यकता है नये संकल्प के साथ और नकारात्मक सोच को त्यागकर लगातार आगे बढ़ जाने की, बढ़ते रहने की। 
वर्ष 2014 का पहला दिन अमावस्या से आरम्भ हो रहा है। घुप्प अन्धेरी रात, जिसमें चाँद भी दिखलाई नहीं देता। ऐसे अन्धेरे को भी नकारात्मक पक्ष मत मानिये। जिसे लोग नकारात्मक मानते हैं, उस नकारात्मकता में भी आप अपने हिस्से की सकारात्मकता खोज सकते हैं। याद रखिये कि गहन अन्धकार में सूई की नोंक-सी रोशनी का लक्ष्य भी स्पष्ट दिखाई देगा जिसे प्राप्त किया जा सकता है। पर, उजाले में, चाँदनी रात में या कृत्रिम प्रकाश-व्यवस्थाओं की चकाचौंध में उक्त लक्ष्य नहीं दिखाई देगा और उसे प्राप्त करने की बात ही अलग है। उपस्थित होने वाले प्रत्येक परिदृश्य से अपने विवेक के आधार पर सकारात्मक पहलू को खोजिये और उसी के सहारे आगे बढ़ जाइये। आप देखेंगे कि नकारात्मकता पीछे, काफी पीछे छुट गयी। यों दुःख की घड़ी में भी सुख के क्षण आप खोज ही लेंगे। प्यार से थोड़ा मुस्कुरा लेंगे तो दिल का बोझ घट जायेगा- सौ बरस की जिन्दगी से अच्छे हैं प्यार के दो-चार दिन!
आप किसी भी मार्ग में जैसे ही आगे बढ़ेंगे तो कई कंटक मिलेंगे, अवरोधक मिलेंगे; उन्हें पार करना होगा- संयम, धैर्य और सूझ-बूझ से। जैसे ही धैर्य कमजोर पड़ेगा, संयम का साथ नहीं मिलेगा और जीवन के मार्ग पर चलने वाला ऐसे चौराहे पर अपने को खड़ा पायेगा, जहाँ से प्रत्येक रास्ता लक्ष्य से दूर, बहुत दूर जाता हुआ दिखाई देता है। ऐसे में पुनः धैर्य व संयम को संजोने के लिए सदाचार का साथ स्वीकारना होगा। वर्तमान परिदृश्य में अनाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार और व्यभिचार के बीच घिरा है सदाचार। चारों ‘चार’ को जब आप नहीं स्वीकारेंगे तभी बीच वाला ‘चार’ आपके सम्मुख प्रकट होगा जिसके सहारे आप किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, किसी भी शिखर को फतह कर सकते हैं। .....तो उत्तरोत्तर विकास की शुभकामना कीजिये स्वीकार और डूब जाइये नववर्ष के उल्लास में!

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

नववर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ, भगवान हनुमान की कृपा आप पर बनी रहे / HAPPY NEW YEAR 2014

प्रस्तुति- शीतांशु कुमार सहाय
भगवान हनुमान आप सबको पूरे वर्ष प्रसन्न रखें। सपरिवार आप खुशहाल रहें, यही मेरी मनोकामना है! पाठ करें हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, संकटमोचन हनुमानाष्टक का।




हनुमान चालीसा

दोहा :
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

चौपाई :
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥
दोहा :
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥



बजरंग बाण

दोहा :
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

चौपाई :
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महं बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायं परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

दोहा :
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥


संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महा मुनि साप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के सँग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को सब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज कियो बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कुछ संकट होय हमारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥
दोहा
लाल देह लाली लसे अरू धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन जय जय जय कपि सूर॥

आमी की शक्तिपीठ माँ अम्बिका भवानी मन्दिर


-शीतांशु कुमार सहाय
माँ अम्बिका भवानी का मन्दिर बिहार के सारण जिले के दिघवारा में स्थित आमी गाँव में है। विश्व में केवल यहीं माँ आदिशक्ति का मिट्टी का ‘शक्ति पिण्ड’ है। इतिहासकार इसे प्रागैतिहासिक काल का मानते हैं। इस मन्दिर पर मैं एक शोधपरक पुस्तक की रचना कर रहा हूँ जिसका प्रकाशन 2014 में होगा। पाठकों व मित्रों के लिए मैं यहाँ माँ अम्बिका भवानी की ‘शक्ति पिण्ड’ का चित्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। माँ आपके लिए नये वर्ष 2014 को अपार प्रसन्नता से भर दें, यही कामना है!



योग-साधना व जप-तप के लिए यह क्षेत्र उत्तम माना जाता है। दूर-दूर के सन्त यहाँ अध्यात्म का गूढ़ रहस्य तपस्या करके जानने-समझने आते हैं।

शनिवार, 28 दिसंबर 2013

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने हैं 12 चुनौतियाँ




गाजियाबाद के ‘कौशाम्बी’ स्थित आम आदमी पार्टी के मुख्यालय से अपने समर्थकों के साथ मैट्रो ट्रेन द्वारा रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने पहुँचे अरविन्द केजरीवाल। मैट्रो स्टेशन से बाहर आने का दृश्य।

-शीतांशु कुमार सहाय
केजरीवाल शनिवार को सुबह 10.45 बजे शपथ ग्रहण के लिए अपने गाजियाबाद के कौशांबी स्थित आवास से बाहर निकले। वह यहां से रामलीला मैदान पहुंचने के लिए मेट्रो स्टेशन की ओर बढ़े। उनके आवास के बाहर मीडियाकर्मियों का हुजूम उमड़ा था। इससे बचने के लिए वह पिछले दरवाजे से अपनी वैगनआर कार से कौशांबी मेट्रो स्टेशन पहुंचे। वहां कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उनके स्वागत में मौजूदा था। केजरीवाल ने अपने स्मार्टकार्ड का उपयोग कर स्टेशन में प्रवेश किया। केजरीवाल की पत्नी सुनीता अपने बच्चों हर्षिता और पुलकित और 'आप' नेता मनीष सिसोदिया के परिजनों के साथ अन्य कोच में सवार थीं। कौशांबी से बाराखंबा रोड मेट्रो स्टेशन तक के 11 स्टेशनों पर भीड़ की वजह से कई यात्री इस मेट्रो में सवार होने से वंचित रह गए। केजरीवाल ने इस आधे घंटे के सफर में किसी से कोई खास बातचीत नहीं की। बाराखंबा पहुंचने पर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई जिससे केजरीवाल को बाहर निकलने में मदद मिल सके। इसके बाद वह कार से रामलीला मैदान के लिए रवाना हो गए।
अरविंद केजरीवाल---
रामलीला मैदान में शनिवार 28 दिसम्बर 2013 को शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजघाट जाकर बापू की समाधि के आगे नमन किया। राजघाट पर उनके साथ सभी मंत्री और भारी तादाद में आम लोग मौजूद रहे। इससे ठीक बाद दिल्ली सचिवालय पहुंचे और मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला। पैंट के साथ बाहर करके पहनी गई आधी बाजू की ढीली ढाली शर्ट, काली मूंछों वाला एक नाटे कद का साधारण सा दिखने वाला आदमी। जो कभी ट्रेन का इंतजार करता प्लेटफॉर्म पर जमीन पर सोते नजर आता, तो कभी ऑटो के लिए सड़क पर इंतजार करता। लोग 45 साल के इस शख्स को अरविंद केजरीवाल के नाम से जानते हैं। जो कभी इनकम टैक्स विभाग में अधिकारी हुआ करता था लेकिन साधारण सी कद काठी वाला यह शख्स कब दिल्ली की सबसे ताकतवर कुर्सी का दावेदार बन गया, यह बाकी पार्टियों को पता भी नहीं चला। हरियाणा के भिवानी जिले के सीवानी मंडी में 16 अगस्त 1968 को गोविंद राम केजरीवाल और गीता देवी के घर जन्माष्टमी के दिन अरविंद का जन्म हुआ, इसीलिए घरवाले प्यार से उन्हें किशन भी बुलाते हैं। हिसार से ही अरविंद ने अपनी हाईस्कूल तक की पढ़ाई पूरी की। देश के नामी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद केजरीवाल ने कुछ समय टाटा स्टील में नौकरी की। वह वर्ष 1989 में टाटा स्टील से जुड़े और वर्ष 1992 में कंपनी को अलविदा कह दिया। उन्होंने कुछ समय कोलकाता के रामकृष्णन आश्रम और नेहरू युवा केन्द्र में बिताया। यूपीएससी में इंटरव्यू देने से पहले अरविंद केजरीवाल कोलकाता गए थे। कोलकाता में उनकी मुलाकात मदर टेरेसा से हुई। अरविंद ने कालीघाट पर काम किया और शायद यहीं से उन्हें दूसरों के लिए जीने का नजरिया मिला। 1995 में अरविंद इंडियन रेवेन्यू सर्विस के लिये चुने गये थे। ट्रेनिंग के बाद दिल्ली में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अस्सिटेंट कमिश्नर बने। लेकिन यहां भी अपने लिये उन्होंने खुद नियम बनाये। वो नियम थे, अपनी टेबल को खुद साफ करना, डस्टबिन की गंदगी को खुद हटाना, किसी काम के लिये चपरासी का इस्तेमाल नहीं करना। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नौकरी करते हुये ही केजरीवाल ने डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार कम करने की मुहिम शुरु कर दी थी।
माता गीता देवी, पिता गोविन्द राम केजरीवाल, पत्नी सुनीता, पुत्र व पुत्री के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल। 

सुनीता से विवाह---
इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) के प्रशिक्षण के दौरान ही अरविंद केजरीवाल ने अपनी बैचमेट सुनीता से विवाह किया। केजरीवाल के एक पुत्र और एक पुत्री है।
'परिवर्तन' के जरिए परिवर्तन---
वर्ष 2000 में अरविंद केजरीवाल ने 'परिवर्तन' नाम के एक एनजीओ की शुरुआत की। बैनर-पोस्टर छपवाये जिन पर लिखा था-- 'रिश्वत मत दीजिये, काम न हो तो हमसे संपर्क कीजिये।' परिवर्तन के जरिए उन्होंने देशभर में सूचना के अधिकार का अभियान चलाया। बिल बेशक केंद्र सरकार ने पारित किया हो लेकिन जनता के बीच जाकर उन्हें जागृत करने का जिम्मा अरविंद और उनके परिवर्तन ने उठाया। अरविंद को 'राइट टू इन्फॉरमेशन' (सूचना का अधिकार ) पर काम के लिये एशिया का नोबल पुरस्कार कहा जाने वाला मैग्सेसे अवार्ड मिला। परिवर्तन की लड़ाई का ही अगला चरण था जनलोकपाल। यह सिलसिला बढ़ता गया और केजरीवाल ने फरवरी 2006 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरे समय के लिए सिर्फ परिवर्तन में ही काम करने लगे। इसके बाद देश में शुरू हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा आंदोलन। आंदोलन को जनसमर्थन तो पूरा मिला, लेकिन जनलोकपाल बिल नहीं बन पाया। केजरीवाल ने राजनीति में आने का फैसला किया। यहीं से अन्ना हजारे और केजरीवाल के रास्ते अलग हो गए, लेकिन केजरीवाल अन्ना के बिना भी आगे बढ़ते गए।
आम आदमी पार्टी अस्तित्व में---
26 नवंबर 2012 में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई। महज एक साल पहले पैदा हुई आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में काबिज कांग्रेस और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा करके सबको चौंका दिया। राजनीतिक पंडित उनके इस फैसले को लेकर अचंभित हो गए। ऐसी चर्चा होने लगी कि केजरीवाल ने अपना राजनीतिक सफर शुरू होने से पहले ही खत्म कर लिया, लेकिन दिसम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से दीक्षित को 23 हजार से अधिक मतों से पराजित कया और उनकी पार्टी ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें हासिल की। केजरीवाल ने 'स्वराज' नाम से एक पुस्तक भी लिखी है। यह पुस्तक 2012 में प्रकाशित हुई।

शनिवार 28 दिसम्बर 2013 को दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल के सामने 12 चुनौतियाँ---
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसे वादे किए हैं जिन्हें पूरा कर पाना उसके लिए चुनौती साबित होगी। इनमें से 12 वादे हैं---
1-भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सत्ता में आने के 15 दिन के भीतर जन लोकपाल विधेयक पारित। इसके दायरे में सभी कर्मचारी होंगे।
2-करीब 3,000 मोहल्ला सभाओं की स्थापना की जाएगी। जहां लोग तय करेंगे कि उनको अपने इलाके में क्या चाहिए -पार्क, स्ट्रीट लाइट, अस्पताल या और कुछ।
3-सरकारी काम के लिए पैसे का भुगतान केवल मुहल्ला सभाओं के काम के संतुष्ट होने के बाद किया जाएगा।
4-बिजली का बिल आधा किया जाएगा और निजी वितरण कंपनियों का आडिट होगा। बढ़ा हुआ बिल सुधारा जाएगा और यदि बिजली वितरण कंपनियां सहयोग नहीं करेंगी तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
5-दो लाख सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे।
6-जो परिवार महीने में 700 लीटर पानी खर्च करेंगे उनसे कोई बिल नहीं वसूला जाएगा। जिन घरेलू उपभोक्ताओं को नवंबर 2013 तक अधिक बिल मिला है उनका भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
7-दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगमों को दिल्ली सरकार के अधिकार के दायरे में लाया जाएगा।
8-अल्पसंख्यकों का संरक्षण होगा और फर्जी एनकाउंटर तथा मुस्लिम युवाओं के खिलाफ फर्जी मामले बंद होंगे।
9-कोई भी सरकारी अधिकारी अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया तो उसे बर्खास्त किया जाएगा, उसे जेल भेजा जाएगा और उसकी संपत्ति जब्त होगी।
10-अशोक खेमका और दुर्गाशक्ति नागपाल जैसे ईमानदार अधिकारियों को प्रोत्साहित और संरक्षित किया जाएगा।
11-हर वार्ड में नागरिक सुरक्षा बल बनाया जाएगा जो संकट में फंसे हर व्यक्ति की मदद करेगा।
12-अगर दिल्ली सरकार वादी होगी तो न्यायालय में कोई भी मामला स्थगित नहीं किया जाएगा।

अपने मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल। 

अरविंद केजरीवाल का मंत्रिमंडल---
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार 28 दिसम्बर 2013 को अपने मंत्रिमंडल के 6 सहयोगियों में विभागों का बंटवारा कर दिया और गृह, वित्त, बिजली और गुप्तचर जैसे प्रमुख विभाग अपने पास रखे। मुख्यमंत्री योजना, सेवा और वह अन्य तमाम विभाग अपने पास रखेंगे जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।
1. मनीष सिसोदिया---
केजरीवाल के सबसे नजदीक समझे जाने वाले मनीष सिसोदिया को राजस्व, लोक निर्माण विभाग, शहरी विकास, शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्थानीय निकाय और भूमि एवं भवन विभाग दिया गया है।
2. सोमनाथ भारती---
आईआईटी दिल्ली से स्नातकोत्तर सोमनाथ भारती प्रशासनिक सुधार, कानून, पर्यटन और संस्कृति का प्रभार संभालेंगे।
3. राखी बिड़ला---
केजरीवाल मंत्रिमंडल की सबसे कम उम्र मंत्री राखी बिड़ला को समाज कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग सौंपे गए हैं। उन्हें महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय तैयार करने का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
4. गिरीश सोनी---
गिरीश सोनी को श्रम, कौशल निर्माण और अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति विभाग दिए गए हैं।
5. सत्येन्द्र जैन---
सत्येन्द्र जैन को स्वास्थ्य, उद्योग और गुरुद्वारा चुनाव का प्रभारी बनाया गया है।
6. सौरभ भारद्वाज---
सौरभ भारद्वाज को दिल्‍ली का परिवहन मंत्री बनाया गया है।

मंत्रिमंडल की पहली बैठक में फैसला---
दिल्ली मंत्रिमंडल की पहली बैठक में फैसला हुआ कि दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री और अधिकारी वाहन पर लाल बत्ती नही लगाएगा। इसके अलावा सभी मंत्रियों के सचिवों को बदलने का भी फैसला लिया गया। राजेंद्र कुमार को नया प्रमुख सचिव बनाया गया।

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

झारखण्ड : 2013 में कम हुई नक्सली घटनाएँ, मुठभेड़ अधिक




-एसपी अमरजीत बलिहार सहित 26 पुलिसकर्मी हुए शहीद
शीतांशु कुमार सहाय/Sheetanshu Kumar Sahay
वर्ष 2013 में झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में कई बड़ी सफलताएँ हासिल कीं। वहीं, पाकुड़ जिले के आरक्षी अधीक्षक (एसपी) अमरजीत बलिहार के साथ-साथ 26 पुलिस जवानों की कुर्बानी देनी पड़ी। पूरे वर्ष में नक्सलियों ने जहाँ घात लगाकर पुलिस दल पर हमला करने की पाँच बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। वहीं पुलिस दल ने मुठभेड़ की 62 घटनाओं में 49 नक्सलियों को मौत के घाट उतारा। पिछले वर्ष नक्सलियो द्वारा पुलिस दल पर हमले की आठ घटनाओं को अंजाम दिया था और पुलिस के साथ हुए 46 मुठभेड़ की घटनाओं में 40 नक्सलियों की जान गयी थी। इन मुठभेड़ों में 26 पुलिस वाले भी शहीद हुए थे। 2012 के मुकाबले 2013 में नक्सली घटनाओं में कमी दर्ज की गयी है। 2012 में 374 नक्सली घटनाएँ हुई थीं। 2013 में यह संख्या घटकर 328 हो गयी।
नक्सली और पुलिस दोनों आक्रामक--
वर्ष 2013 में नक्सलियों ने पाकुड़ के एसपी अमरजीत बलिहार की 2 जुलाई को हत्या कर दी। राज्य गठन के बाद नक्सलियों द्वारा किसी आइपीएस अधिकारी की हत्या की यह पहली घटना है। नक्सलियों ने राज्य गठन से कुछ माह पहले लोहरदगा के तत्कालीन एसपी अजय कुमार सिंह की हत्या की थी। सिर्फ इतना ही नहीं इस वर्ष नक्सलियों ने 26 पुलिसकर्मियों की हत्या की। इससे तय है कि पुलिस को नक्सलियों ने बड़ा नुकसान पहुँचाया है। वहीं दूसरी तरफ इसी वर्ष 49 नक्सली भी मारे गये। इनमें से 17 को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, जबकि दो नक्सलियों को आमलोगों ने मारा, 30 नक्सली आपसी लड़ाई में मारे गये। इससे साफ है कि नक्सली और पुलिस दोनों ही आक्रामक हुए हैं।
नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन-- 
नवंबर माह में नक्सलियों ने लातेहार में पुलिस को ज्यादा परेशान किया। नक्सलियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की बात करें, तो पुलिस ने पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा स्पेशल ऑपरेशन या इंटर स्टेट ऑपरेशन चलाया। लेकिन लांग रेंज पेट्रोलिंग (एलआरपी) में कमी आयी है। इस वर्ष पीएलएफआइ का बढ़ता प्रभाव पुलिस की सबसे बड़ी चिंता रही।
माओवादी और पीएलएफआइ--
इस वर्ष के आँकड़े के मुताबिक, नवंबर माह तक हुए कुल नक्सली-उग्रवादी घटनाओं में भाकपा माओवादी और पीएलएफआइ की बराबर की भागीदारी रही। दोनों संगठनों ने 107-107 घटनाओं को अंजाम दिया है। नक्सली घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा बनायी जाने वाली रणनीति के तहत दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ 10 बार बैठकें हुईं। 14 संयुक्त अभियान चलाये गये। इस दौरान 550 विशेष अभियान भी चलाये गये।
3 जुलाई 2013 को शहीद आरक्षी अधीक्षक अमरजीत बलिहार को श्रद्धांजलि देते झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद

झारखण्ड : 13 वर्षों के इतिहास में 2013 में मामलों के निष्पादन में निगरानी ब्यूरो ने बनाया कीर्तिमान


शीतांशु कुमार सहाय/ Sheetanshu Kumar Sahay
झारखण्ड राज्य गठन के बाद से झारखंड निगरानी ब्यूरो द्वारा वर्ष 2013 के दौरान मामलों के निष्पादन में एक नया कीर्तिमान बनाया है। ब्यूरो ने इस वर्ष अबतक 97 मामलों का निष्पादन किया है। शेष बची अवधि में 30 अन्य मामलों का निष्पादन होने की संभावना है। इस स्थिति में कुल निष्पादित मामलों की संख्या 127 हो जायेगी। यह संख्या राज्य गठन के बाद अबतक किसी भी एक वर्ष में निष्पादित किये गये मामलों में सबसे ज्यादा है। 2012 में घूसखोरी सहित अपराध के कुल 42 मामले पकड़े गये जबकि 40 मामलों की जाँच का निष्पादन किया गया। दोनों को लेकर कुल 82 मामलों का निष्पादन किया गया जबकि 2013 में 20 दिसंबर तक ट्रैप के 26 कांड दर्ज किये गये और जाँच के 51 (कुल 97) मामलों को निष्पादन किया गया। वर्ष 2013 की शेष अवधि में 30 और मामलों की जाँच के निष्पादन होने की संभावना है। आलोच्य वर्ष 2013 में लंबित कांडों व जाँच के निष्पादन में गुणात्मक वृद्धि दर्ज की गयी है।
घूस लेने के कांड-- 
निगरानी ब्यूरो ने 2013 में घूस लेने के 26 कांड अंकित किये और इनमें 28 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में अधीक्षण अभियन्ता, कार्यपालक अभियन्ता, जिला मत्स्य पदाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
घूसखोरों से नकद बरामदगी--
घूसखोरों के पास से 2013 में निगरानी ने 5 लाख 89 हजार 300 रुपये बरामद किये। घर और अन्य स्थानों से 22 लाख 32 हजार 210 रुपये जब्त किये गये। वर्ष 2012 में कुल बरामद 9 लाख 58 हजार 885 रुपये और 2011 में 67 हजार 800 रुपये बरामद किये गये थे। इसी प्रकार बरामद की गयी नकद राशि में कई गुणा वृद्धि हुई है।
बरामद का विवरण (वर्ष 2013)
1. कुल ट्रैप राशि: 5 लाख 89 हजार 300 रुपये।
ट्रैप राशि के अलावा नकद बरामदगी
2. कांड संख्या 01/2013 में 6 लाख 59 हजार रुपये।
3. कांड संख्या 02/2013 में 4 लाख 90 हजार रुपये।
4. कांड संख्या 07/2013 में 16 हजार 500 रुपये।
5. कांड संख्या 24/2013 में 4 लाख 77 हजार 410 रुपये।

बरामद का विवरण (वर्ष 2012) 
1. कुल ट्रैप राशि एक लाख 94 हजार 500 रुपये।
ट्रैप राशि के अलावा नकद बरामदगी
2. कांड संख्या 13/2012 में 7 लाख 64 हजार 385 रुपये।

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

अन्दर की खुशी को बाहर की दुनिया में मत खोजो : स्वामी राधानाथ / SWAMI RADHANATH



-शीतांशु कुमार सहाय/ SHEETANSHU KUMAR SAHAY
सत्य और ईश्वर की खोज में निकले स्वामी राधानाथ ने कहा कि भारत में उन्हें वह सबकुछ मिला, जो सपने में भी उन्होंने कभी नहीं सोचा था। 
एक अमेरिकी स्वामी राधानाथ ने मंगलवार 24 दिसम्बर 2013 को झारखण्ड की राजधानी राँची में कहा कि सारे ऐशो-आराम को छोड़कर भारत के हिमालय के गुफाओं-कंदराओं और वृन्दावन के आश्रम में उन्हें वह सबकुछ मिला जिसकी परिकल्पना भी उन्होंने कभी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि 1973 में जब वे सारे जगह को घूम कर वापस लौटे तो जीवन यात्रा वृत्तान्त लिखने के लिए सैकड़ों लोगों ने आग्रह किया लेकिन दो-तीन कारणों से उन्होंने इसे लिखने से प्रारंभ में मना कर दिया। पहला कारण था कि अपने ऊपर ही किताब लिखने की धृष्टता वह नहीं करना चाहते थे, दूसरी बात यह थी कि अपने यात्रा वृत्तान्त की सच्ची कहानी पर लोगों को विश्वास नहीं होता और तीसरा कारण वह खुद भी एक लेखक नहीं थे। इसी बीच भक्तिदत्त स्वामी जो मृत्यु शय्या पर थे, उन्होंने पुस्तक लिखने का आग्रह किया। तब उन्होंने पुस्तक ’द जर्नी होम’ लिखा। रांची में ही 24 दिसम्बर 2013 को अमेरिकी संन्यासी राधानाथ स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक ’द जर्नी होम’ का हिन्दी संस्करण ’अनोखा सफर’ का विमोचन किया गया।
-रिचर्ड बना 'स्वामी राधानाथ'
भारत की संस्कृति एक महासागर है जिसमें सारी दुनिया की संस्कृतियों का समावेश है। यह तथ्य 1950 में अमेरिका के शिकागो में एक सम्पन्न यहूदी परिवार में जन्में रिचर्ड (रिची) को तब समझ में आया जब उसने 19 वर्ष की उम्र में गृहत्याग कर आध्यात्मिक सफर की शुरूआत की। आज भारत का युवा पश्चिम की चमक-दमक से चकाचैंध है। डीजे, डिस्को, ड्रग्स, सैक्स व उपभोगतावाद के जाल में उलझता जा रहा है। दूसरी तरफ रिचर्ड ने 19 वर्ष की आयु में संपन्नता के शिखर पर बैठे अमेरिकी समाज को छोड़ा था तो वहां संपन्नता से उकताये युवा हिप्पी बन रहे थे। रिचर्ड भी बन सकता था। पर, उसे तलाश थी जीवन के ध्येय की जो उसे मिला भारत की सनातन संस्कृति में। अमेरिका से यूरोप और यूरोप से पश्चिम एशिया का 6 महीने तक रोमांच, अवसाद और खतरों से भरा सफर करते हुए रिचर्ड पाकिस्तान की ओर से भारत में प्रवेश करने के लिए बाघा सीमा पर पहुंचा। वहां भारत के आव्रजन अधिकारी ने धूल-धूसरित फटेहाल अमेरिकी नौजवान रिचर्ड से कहा-  ''भारत में पहले ही बहुत भिखारी हैं, मैं तुम्हें प्रवेश नहीं दूंगा।'' कुछ घंटे बाद जब उसकी ड्यूटी बदली तो एक उम्रदार सरदार जी ड्यूटी पर आए। उन्होंने रिचर्ड की प्रार्थना सुनकर उसे भारत में आने दिया जिसके बाद कई वर्षों तक बिना पैसे के अयाचक भाव से देशभर में घम-घूम कर भारत की आध्यात्मिक परंपराओं का नजदीकी अध्ययन किया। देश संतों से सत्संग किया और अंत में भक्तियोग का मार्ग अपना लिया। उसका नाम हुआ 'स्वामी राधानाथ'। आज स्वामी राधारानाथ का प्रचार क्षेत्र पूरा विश्व है। रिचर्ड (रिची) से राधानाथ स्वामी तक का अनोखा सफर बहुत रोमांचकारी था जिसे 40 वर्ष बाद 2010 में स्वामी जी ने ‘द जर्नी होम’ या ‘अनोखा सफर’ नाम से प्रकाशित अपनी पुस्तकों में लिखा।


-प्रार्थना से प्राप्ति
स्वामी राधानाथ ने ईश्वर की खोज में पग-पग पर मौत का सामना किया और प्रार्थना के बल पर ही विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया। अपराध पर नियन्त्रण को लेकर देश में कई कानून बने, इसके बावजूद लगातार घटनाएँ हो रही हैं। ऐसी स्थिति में जब तक नैतिक मूल्यों को महत्त्व नहीं दिया जायेगा, तब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आयेगा।
-भगवान खोजने की कहानी ‘अनोखा सफर’
स्वामी राधानाथ ने बताया कि यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसमें भगवान खोजने की कहानी है। यह पुस्तक लोगों को प्रेरणा देगी, ऐसी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि लोगों के हृदय में ही सबसे बड़ा खजाना छिपा है लेकिन लोग अन्दर की खुशी को बाहर की दुनिया में खोज रहे हैं। उन्होंने कहा कि मन, बुद्धि व अन्य चीजें उड़ती खुशियां दे सकती है, सच्ची खुशी तो प्रेम के अनुभव से ही प्राप्त होगी। ‘अनोखा सफर’ एक ऐसी सम-सामायिक पुस्तक है जिसे पढ़कर भारत के युवा भारत की सनातन संस्कृति में ही अपनी कुंठाओं के हल खोज सकते हैं। 336 पृष्ठों की यह पुस्तक सरल भाषा में लिखी गयी है। पाठक को लगता है कि वह रोमांचक यात्रा कर रहा है। स्वामी राधारानाथ ने इस्लाम, ईसाइयत, बौद्ध, तांत्रिक व औघड़, हठयोग जैसी अनेक आध्यात्मिक धाराओं का अनुभव किया जिसे खूबसूरती से इस पुस्तक में जड़ दिया। राधारानाथ ने भारत की सनातन संस्कृति की श्रेष्ठता को पुस्तक अनोखा सफर में प्रस्तुत कर दिया। स्वामी राधारानाथ ने संजीदगी और संवेदनशीलता के साथ कृष्णभक्ति और भगवान कृष्ण की लीलास्थली ब्रज क्षेत्र (वृन्दावन) की महिमा को भी प्रस्तुत किया है। वृन्दावन को ही अपने जीवन का अंतिम पड़ाव बनाया।
-खुद को ही भूल गये
स्वामी राधानाथ ने कहा कि लोग खुशियों की तलाश में खुद को ही भूल गये हैं। अमेरिकी स्वामी ने कहा कि सभी आध्यत्मिक परम्पराओं में यही बात कही गयी है। जमीन-जमीन पर चलकर जब वे हिमालय की गुफाओं में पहुँचे तो वहाँ उन्होंने देखा कि साधु-सन्त लंगोट पहने इसी तरह की आन्तरिक खुशियों को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वे वृन्दावन पहुँचे तो काफी खुशी हुई।

-सर्वज्ञान वेद में
अमेरिकी संन्यासी ने कहा कि भारतीय ज्ञान, भक्ति और संस्कृति का सार तत्त्व ही पूरी दुनिया को नयी रोशनी देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के विचारक जिस ज्ञान की खोज कर रहे हैं, वह ज्ञान भारत के वेद व नैतिक मूल्यों से मिल सकता है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्म के बाह्य आडम्बर को छोड़कर मूल तत्त्व को समझने की जरुरत है।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगे अरविंद केजरीवाल : सामने होंगी 12 चुनौतियाँ



-शीतांशु कुमार सहाय

सरकार बनाने पर जनता से रायशुमारी---
देश की राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पार्टी से समर्थन लेकर सरकार बनाने के मुद्दे पर रायशुमारी हुई हो। आप नेता मनीष सिसौदिया ने 23 दिसम्बर 2013 को बताया कि आप पार्टी ने पिछले एक हफ्ते से लोगों से सरकार बनाने पर राय ली। कुल 5 लाख 23 हजार लोगों ने एसएमएस, फोन कॉल्स और इंटरनेट के जरिए अपनी राय दी। इनमें से 74 प्रतिशत लोगों ने कहा कि आप को सरकार बनानी चाहिए। दिल्ली में कुल 274 जनसभा हुई और 257 जगह लोगों ने कहा कि सरकार बनानी चाहिए। रविवार 22 दिसम्बर 2013 को आम आदमी पार्टी की रायशुमारी का आखिरी दिन था। आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में चार जगहों पर जनसभाएं की। वो जहां भी लोगों की भीड़ जुटी। जनता ने रायशुमारी में उनका साथ दिया। इन जनसभाओं में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की थी जिनका मानना है कि आम आदमी पार्टी को सरकार बनानी चाहिए। भले ही वो कांग्रेस के समर्थन से ही क्यों ना हो। आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में बड़े-बड़े वादे किए थे। जनता चाहती है कि आम आदमी पार्टी अब सरकार बनाकर इन वादों को पूरा करे। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला लिया है। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसके लिए उप-राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। मनीष सिसौदिया ने कहा कि विधायक दल ने केजरीवाल को अपना नेता चुना है और वही मुख्यमंत्री बनेंगे।


128 जनसभाओं के आकड़े---
आम आदमी पार्टी ने अब तक कुल 128 जनसभाओं के आकड़ों की जानकारी दी है। उनका कहना है कि 128 जनसभाओं में से 110 में जनता ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपनी सरकार बनाए जबकि 18 जनसभा में जनता की राय दोबारा चुनाव लड़ने की थी। यहां की जनता को भरोसा था कि दोबारा चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी बहुमत से सरकार बनाएगी। ये लोग कांग्रेस से समर्थन लेने के खिलाफ थे लेकिन अरविंद को फैसला बहुमत के आधार पर लेना है। ज्यादातर जनता को उम्मीद यही है कि जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आएगी तो वो भ्रष्टाचार कम करेगी, उस महंगाई से राहत मिलेगी। आम आदमी पार्टी ने एसएमएस और फोन कॉल के जरिए भी लोगों की राय मांगी। इसके अलावा पार्टी की वेबसाइट पर भी लोगों से राय मांगी गई। आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसे सात लाख से ज्यादा लोगों के जवाब मिले हैं। ज्यादातर चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी सरकार बनाए।
12 चुनौतियाँ---
आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसे वादे किए हैं जिन्हें पूरा कर पाना उसके लिए चुनौती साबित होगी। इनमें से 12 वादे हैं---
1-भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सत्ता में आने के 15 दिन के भीतर जन लोकपाल विधेयक पारित। इसके दायरे में सभी कर्मचारी होंगे।
2-करीब 3,000 मोहल्ला सभाओं की स्थापना की जाएगी। जहां लोग तय करेंगे कि उनको अपने इलाके में क्या चाहिए -पार्क, स्ट्रीट लाइट, अस्पताल या और कुछ।
3-सरकारी काम के लिए पैसे का भुगतान केवल मुहल्ला सभाओं के काम के संतुष्ट होने के बाद किया जाएगा।
4-बिजली का बिल आधा किया जाएगा और निजी वितरण कंपनियों का आडिट होगा। बढ़ा हुआ बिल सुधारा जाएगा और यदि बिजली वितरण कंपनियां सहयोग नहीं करेंगी तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
5-दो लाख सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे।
6-जो परिवार महीने में 700 लीटर पानी खर्च करेंगे उनसे कोई बिल नहीं वसूला जाएगा। जिन घरेलू उपभोक्ताओं को नवंबर 2013 तक अधिक बिल मिला है उनका भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
7-दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगमों को दिल्ली सरकार के अधिकार के दायरे में लाया जाएगा।
8-अल्पसंख्यकों का संरक्षण होगा और फर्जी एनकाउंटर तथा मुस्लिम युवाओं के खिलाफ फर्जी मामले बंद होंगे।
9-कोई भी सरकारी अधिकारी अगर भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया तो उसे बर्खास्त किया जाएगा, उसे जेल भेजा जाएगा और उसकी संपत्ति जब्त होगी।
10-अशोक खेमका और दुर्गाशक्ति नागपाल जैसे ईमानदार अधिकारियों को प्रोत्साहित और संरक्षित किया जाएगा।
11-हर वार्ड में नागरिक सुरक्षा बल बनाया जाएगा जो संकट में फंसे हर व्यक्ति की मदद करेगा।
12-अगर दिल्ली सरकार वादी होगी तो न्यायालय में कोई भी मामला स्थगित नहीं किया जाएगा।

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

पण्डित मुकुन्द दत्त द्वारी : नाना ने पहचानी प्रतिभा, दुनिया ने माना संगीत का लोहा / MUKUND DUTT DWARI



-शीतांशु कुमार सहाय/ SHEETANSHU KUMAR SAHAY

वर्ष 1970 से आकाशवाणी के नियमित कलाकार पण्डित मुकुन्द दत्त द्वारी कई पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित हैं। इन्हें 19-20 दिसम्बर 2013 को पटना में आयोजित ‘नटराज कला सम्मान-2013’ से सम्मानित किया जायेगा। इन के साथ प्रसिद्ध कथक नर्तकी शोभना नारायण व नाट्यकर्मी अनिल पतंग भी सम्मानित होंगे।
तिरस्कृत होने वाला वह पत्थर भी सुगन्धित हो उठता है जिस पर चन्दन का घर्षण किया जाता है। वह बोल वन्दित होता है जो संगीत का साहचर्य पाता है। वास्तव में संगीत वही है जो मन को प्रसन्न करे, शान्ति प्रदान करे। जिस से मन उद्वेलित हो जाये, हृदय की धड़कन बढ़ जाये, रक्तचाप ऊपर-नीचे होने लगे और साँस का तारतम्य गड़बड़ा जाये, वह धुन वास्तव में संगीत नहीं कहला सकता। सरगम का वह क्रम जो प्रकृतिवत् तन-मन के लिए लाभप्रद हो, कर्णप्रिय हो; वही संगीत कहलाता है। इसे ही लोकाचार में शास्त्रीय संगीत कहते हैं। शास्त्रीय संगीत के असंख्य साधक हुए पर इन दिनों इस के वास्तविक जानकारों की संख्या काफी कम है। शास्त्रीय संगीत के वास्तविक जानकारों में भी निःशुल्क संगीत शिक्षा देने वाले संगीत गुरुओं की संख्या अँगुलियों के पोरों में ही समा पायेगी। ऐसे ही गिने-चुने संगीत गुरुओं में एक हैं पण्डित मुकुन्द दत्त द्वारी। पण्डित एमडी द्वारी के संक्षिप्त नाम से प्रसिद्ध इस उस्ताद ने दशकों तक देश के विभिन्न नगरों में गुरु-शिष्य परम्परा के तहत संगीत की शिक्षा देने के उपरान्त अपनी जन्म-भूमि वैद्यनाथधाम को पुनः अपना आश्रय-स्थली बनाया है। झारखण्ड के देवघर स्थित वैद्यनाथधाम के हरिहरबाड़ी में ‘जयगुरु संगीत शिक्षा केन्द्र’ के माध्यम से निःशुल्क संगीत प्रशिक्षण दे रहे हैं।
नाना ने पहचानी प्रतिभा
पलुस्कर संगीत घराने के प्रसिद्ध संगीतज्ञ पण्डित मुकुन्द दत्त द्वारी के मानस पटल पर संगीत का बीजारोपण उन के नाना पण्डित शम्भूनाथ खवाड़े ने उस वर्ष किया, जिस वर्ष गणतन्त्र बनकर उभरा था भारत। नाना ने छिपी हुई प्रतिभा को पहचाना और कालान्तर में संसार ने उन की संगीत मर्मज्ञता का लोहा माना। 3 वर्ष की अल्पावस्था से ही सरगम को साथी बनाने वाले मुकुन्द का जन्म 2 जुलाई 1947 को वैद्यनाथधाम में हुआ था। माता हरसुन्दरी देवी व पिता गोविन्द दत्त द्वारी के आँगन को अपने बाल कलरव से गुंजायमान करने वाले बालक में छिपी प्रतिभा को नाना पण्डित शम्भूनाथ खवाड़े ताड़ गये। वे देवघर के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ व लोकप्रिय कीर्तनकार थे। नाती को नाना का सान्निध्य मिला। यों बालक मुकुन्द की कोमल अँगुलियाँ वीणा और तानपूरे के तारों को छेड़ने लगीं, झंकृत करने लगीं जो अनवरत् जारी है।
ईश्वर के प्रति कृतज्ञता
जहाँ तक शास्त्रीय संगीत की बात है तो यह प्रकृतिजन्य है। भगवान शिव के संगीत-स्वरूप नटराज ही संगीत के मूल हैं। उन की नगरी देवघर में जन्म लेकर मुकुन्द भला संगीतहीन कैसे रहते! उन्होंने नटराज का अनुसरण किया और संगीत को भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान का सोपान बनाया। इन तीनों क्षेत्रों में अपने उत्थान के बाबत वे सदैव ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। समस्त भौतिक सुख और मानसिक शान्ति के बीच उन की साधना निरन्तर जारी है, जीवन के 67वें वर्ष में भी।
संगीत शिक्षा की शुरुआत
संगीत साधना के बीच द्वारी ने परम्परागत शिक्षा भी हासिल की। इन्होंने स्नातक की उपाधि हासिल की। देवघर के तत्कालीन प्रख्यात संगीत गुरु विदेश्वर झा से प्रथमतः संगीत की नियमित शिक्षा आरम्भ की। इस के पूर्व नाना पण्डित शम्भूनाथ खवाड़े से संगीत सीखा। पण्डित खवाड़े ने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से इतनी आध्यात्मिक उन्नति की थी कि उन का देहावसान भी भग्वद्-भजन गाते-गाते ही हुआ। रात में कीर्तन करते रहे और प्रातः गोद में पखावज लिये बैठे हुए थे मगर शरीर निस्प्राण हो चुका था।
पलुस्कर घराने में दीक्षित
पण्डित खवाड़े व पण्डित विदेश्वर के पश्चात् मुकुन्द दत्त द्वारी ने पलुस्कर घराने के पण्डित सीताराम हरिदाण्डेकर का सान्निध्य प्राप्त किया। महाराष्ट्र के हरिदाण्डेकर को बिहार के तत्कालीन जलपोत कम्पनी के मालिक बच्चा बाबू ने मुजफ्फरपुर में रहने की व्यवस्था कर दी और उन के समस्त खर्चों का वहन करते थे। देवघर से मुकुन्द नियमित मुजफ्फरपुर जाते और महीनों गुरु के पास रहकर गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत संगीत की सूक्ष्मता को आत्मसात् करते रहे। पण्डित विदेश्वर की संस्था में ही द्वारी को गाते देख प्रभावित होकर पण्डित नाथ बाबा गोखले ने अपने ठिकाने पर बुलाया। हिमालय क्षेत्र में तपस्या करने वाले गोखले यदा-कदा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन को देवघर आते और संगीत मर्मज्ञ होने के नाते स्थानीय संगीत शिक्षालयों में जाते तथा चुनिन्दा विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियाँ सिखाते थे। इन से संगीत के कई आध्यात्मिक पहलुओं को द्वारी ने सीखा। फिर किराना घराने के उस्ताद अमीर खाँ व पलुस्कर घराने के पण्डित नारायण राव पटवर्द्धन से संगीत की उच्च शिक्षा ग्रहण की। हालाँकि संस्थागत संगीत शिक्षा में पण्डित द्वारी स्नात्कोत्तर हैं मगर गुरु-शिष्य परम्परा के तहत उन्होंने संगीत में इतनी पैठ बनायी कि कई शिष्यों ने उन के मार्गदर्शन में संगीत में डॉक्टरेट भी की।
पटना में विशेष चर्चित
वर्ष 1970 से पण्डित द्वारी ने शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देना आरम्भ किया, जब इन्होंने पटना के अनीसाबाद में ‘पण्डित विदेश्वर संगीत केन्द्र’ की स्थापना की। शीघ्र ही वे पटना में इतने चर्चित व लोकप्रिय हो गये कि कई कथित संगीत गुरुओं ने अपने को पण्डित द्वारी बताकर मोटी राशि लेकर संगीत सिखाने लगे थे। इस बारे में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कई रोचक घटनाएँ सुनायीं। पटना के अलावा बोकारो, दिल्ली, सिरसा, भागलपुर, धनबाद, दुमका, बड़ौदा, जोधपुर, कोलकाता में भी संगीत का प्रशिक्षण दिया।
शिष्य परम्परा
देश-विदेश में इन के हजारों शिष्य हैं। इन में कुछ संगीत प्रशिक्षक बने हैं तो कुछ अन्य दूसरे रूप में संगीत को आजीविका का साधन बनाकर सफल जीवन का आनन्द ले रहे हैं। हालाँकि ये कभी दरबारी गायक नहीं रहे फिर भी बड़ौदा के पूर्व रजवाड़े के वर्तमान वारिस महाराज प्रताप सिंह गायकवाड़ इन के शिष्य हैं। यों प्रसिद्ध कथक व भरतनाट्यम केे नृत्यगुरु नागेन्द्र प्रसाद मोहिनी ने अपने गुरु पण्डित द्वारी का नाम रौशन किया। फिल्म जगत के जाने-माने गायक व संगीतकार ज्ञानेश्वर दूबे व संतोष अनीसाबादी, गायिका प्रिया और गायक मोहित इन के ही शागिर्द हैं। 20 वर्षों तक पटना में रहने के कारण उन के सर्वाधिक शिष्य भी पटना में ही हैं। चर्चित संगीत संस्था ‘निनाद’ के निदेशक राजीव सिन्हा जैसे पटना के सैकड़ों कलाकार ने पण्डित द्वारी से संगीत की शिक्षा ली। यों गायन, वादन, नृत्य, संगीत प्रशिक्षण, आकाशवाणी व विभिन्न टेलीविजन चैनलों में इन के कई शिष्य कार्यरत हैं। सोनिया सिन्हा अमेरिका में, अर्पणा विश्वास दक्षिण अफ्रीका में तो सुनीता हॉलैण्ड में संगीत की शिक्षा दे रही हैं जो पण्डित द्वारी की शिष्याएँ हैं।
सरकारी सेवा 
शास्त्रीय संगीत को समर्पित पण्डित द्वारी सरकारी सेवा में भी रहे। पर, इस दौरान संगीत-साधना पर तनिक असर न पड़ा। नियमित रियाज जारी रहा और सिखाने का सिलसिला भी। सन् 1974 में देवघर स्थित गोवर्द्धन साहित्य महाविद्यालय में व्याख्ता नियुक्त हुए। तदुपरान्त केन्द्रीय विद्यालय, पटना में संगीत शिक्षक बने। 2000 ई. में सिरसा, हरियाणा के केन्द्रीय विद्यालय से अवकाश प्राप्त किया।
निःशुल्क संगीत की शिक्षा
सरकारी सेवा से अवकाश प्राप्ति के पश्चात् इन्होंने जन्मभूमि देवघर का रुख किया। बाबा वैद्यनाथ की इस नगरी में ऐतिहासिक व पवित्र शिवगंगा के तट पर स्थित हरिहरबाड़ी में ‘जयगुरु संगीत शिक्षा केन्द्र’ संचालित कर रहे हैं। प्राचीन कला केन्द्र, चण्डीगढ़ से मान्यता प्राप्त इस संस्था में पण्डित द्वारी निःशुल्क संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। इन दिनों संस्था में करीब 800 विद्यार्थी नामांकित हैं।
संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना
चुनिन्दा संगीत कार्यक्रमों में बतौर कलाकार या बतौर निर्णायक शिरकत करने वाले पण्डित द्वारी के दिल में एक कसक शेष है। उन की चाहत है कि बिहार या झारखण्ड में एक संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना हो। विदित हो कि इन दोनों राज्यों के हजारों संगीत केन्द्रों से करोड़ों रुपये बतौर विविध शुल्क अन्य राज्यों में चले जाते हैं। वे विभिन्न स्तरों पर प्रयासरत हैं कि झारखण्ड के देवघर व बिहार के पटना में संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना हो।


कहते हैं कि जो संगीत में माहिर होते हैं, उन में स्वतः कवित्त-शक्ति प्रादुर्भूत हो जाती है। उन की कविता, उन की तुकबन्दी, उन के प्रत्येक बोल किसी-न-किसी राग-रागिनी पर आधृत होते हैं। इस के जीते-जागते उदाहरण हैं नटराज की बस्ती के वासी पण्डित मुकुन्द दत्त द्वारी।



सोमवार, 16 दिसंबर 2013

77 दिनों बाद लालू प्रसाद जेल से निकले


-सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने का करेंगे प्रयास : लालू



-शीतांशु कुमार सहाय
रांची। अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले के एक मामले में सश्रम कारावास की सजा काट रहे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की आज रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से रिहाई हो गयी है। जेल से बाहर निकलने के बाद लालू प्रसाद ने कहा कि वे हस्तिनापुर की गद्दी से सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखने का प्रयास करेंगे।
-सजा व जुर्माना
चाईबासा कोषागार से जुड़े 37.70 करोड़ रुपये के अवैध निकासी से जुड़े आरसी 20ए/96 मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने विगत 3 अक्टूबर 2013 को लालू प्रसाद समेत 44 अभियुक्तों को सजा सुनायी थी। इस मामले में सीबीआई अदालक ने लालू प्रसाद को पांच वर्ष सश्रम कारावास तथा 25लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी। बाद में उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने के बाद आज रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद को 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया। सीबीआई कोर्ट ने बिना अदालत की अनुमति से लालू प्रसाद के विदेश जाने पर भी रोक लगा दी है। सीबीआई की निचली अदालत से 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके पर जमानत का आदेश मिलने पर राजद विधायक दल की नेता अन्नपूर्णा देवी और विधायक संजय प्रसाद सिंह यादव जमानतदार बने,जिसके बाद आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लालू प्रसाद दोपहर में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से बाहर निकल गये।



बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से लालू प्रसाद की रिहाई के वक्त उनके पुत्र तेजस्वी यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्र्ाी जयप्रकाश नारायण यादव, पूर्व सांसद प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक जर्नादन पासवान समेत अन्य नेता-कार्यकर्त्ता उपस्थित थी।
-जो जेल जाने से डरेगा, वह कुछ नहीं करेगा
जेल से बाहर निकलने के बाद लालू प्रसाद ने पत्र्ाकारों से बातचीत में कहा कि पूरे देश में घूम कर सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए लोगों को एकजुट करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जेल कृष्ण भगवान की जन्मभूमि रही है, कंस का विध्वंस जेल में रहने वाले श्रीकृष्ण भगवान ने ही किया था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इतिहास की अनदेखी कर रही है, द्वारका भी श्रीकृष्ण का ही है। लालू प्रसाद ने कहा कि जेल में रहने के कारण वे विचलित नहीं हुए, जो व्यक्ति जेल जाने से डरेगा, वह कुछ नहीं करेगा, यही कारण है कि कृष्ण भगवान की जन्मस्थली में इस बार और इससे पहले मिलाकर करीब एक साल तक जीवन व्यतीत कर चुके है,लेकिन वे डिगे नहीं है।



-सीबीआई ने उनके साथ अन्याय किया
राजद प्रमुख ने कहा कि सीबीआई ने उनके साथ जितना अन्याय किया, उतना किसी के साथ नहीं हुआ होगा। लालू प्रसाद ने कहा कि अन्ना लोकपाल में न्यायपालिका को भी लाना चाहते थे, लेकिन यह न्यायपालिका के लिए घातक होता,इसलिए उन्होंने तब इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि उनका, उनके परिवार और उनकी पार्टी का न्यायपालिका के प्रति पूरी आस्था है। चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के संबंध में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में लालू प्रसाद ने कहा कि चुनाव में हार-जीत लगा रहता है, लेकिन जिन लोगों ने दिल्ली में गलत वायदे कर जीत हासिल की, वे आज वहां सरकार बनाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है।
-देउड़ी मंदिर में पूजा
जेल से निकलने के बाद लालू का पहला दिन पूजा-अर्चना में बीता। दोपहर लगभग तीन बजे काफिले के साथ लालू प्रसाद तमाड़ के निकट देउड़ी मंदिर पहंचे और पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि यह शक्तिपीठ है। जेल जाने से पहले उनकी इच्छा यहां आने की थी, जो आज पूरी हो गयी। बाद में मंदिर के सामने आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस के लोगों ने आरंभ से ही मुझे फंसाने का प्रयास किया। नीतीश कुमार भी इसमें शामिल थे।


-नरेंद्र मोदी पर हमला
भाजपा नेता नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलते हुये उन्होंने कहा कि वह पूंजीपतियों के नेता है और दंगा करने वाले व्यक्तित्व है। उन्होंने कहा कि देश में फिरकापरस्त ताकतों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जदयू के साथ तलाक हो जाने के बाद भाजपा और आरएसएस पस्त पड़ गये है। इस मौके पर उनके पुत्र तेजस्वी यादव, प्रदेश राजद अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह, जयप्रकाश नारायण यादव, प्रभुनाथ राय, कृष्णा यादव, अनिल सिंह आजाद के साथ बड़ी संख्या में राजद नेता और कार्यकर्ता वहां मौजूद थे। आमसभा का आयोजन तमाड़ राजद के नेताओं ने किया था, जहां लालू प्रसाद का छउ नृत्य से स्वागत किया गया।
-मजार पर चादर चढ़ायी
रांची लौटने के बाद देर शाम लालू यादव काफिले के साथ डोरंडा स्थित रिसालदार बाबा की मजार पर पहंुचे और इबादत की और चादर चढ़ायी।



मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

आड़ी-तिरछी रेखाएँ खींची तो अक्षर बन गए



मेरे पौने तीन वर्ष के पुत्र अभ्युदय ने कुछ आड़ी-तिरछी रेखाएँ खींची तो अक्षर बन गए। इन अक्षरों में अगणित शब्द छिपे हैं। किसी की खुशी तो किसी का गम छिपा है। किसी की सफलता तो किसी को मायूस कर देने वाली असफलता छिपी है। इन्हीं के माध्यम से अध्यात्म या विज्ञान के राज उजागर होते हैं और दुराचारियों-घोटालेबाजों के राज छिपाए भी जाते हैं। जो चाहिये, वह मिलेगा इन अक्षरों से।
मित्रों! चुनिये अपने-अपने हिस्से की खुशी और सफलता.....और बस चल पड़िये आगे जीवन की डगर पर।
भेंट कीजिये अभ्युदय से और कीजिये स्वीकार मेरा नमस्कार!
-शीतांशु / SHEETANSHU










रविवार, 8 दिसंबर 2013

झारखण्ड में बदहाली के आँसू बहा रहा पर्यटन उद्योग / Tourism in Jharkhand



-पर्यटन के विकास में असुरक्षा सबसे बड़ी बाधा



वैद्यनाथधाम मन्दिर, देवघर



पारसनाथ, गिरिडीह





हुण्डरू जलप्रपात, राँची




नवलखा मन्दिर, देवघर



-शीतांशु कुमार सहाय / Sheetanshu Kumar Sahay 
झारखण्ड में पर्यटन की असीम संभावनाओं के बावजूद पर्यटन उद्योग अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। राज्य सरकार ने पर्यटन के विकास के कई दावे किये हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। आलम यह है कि सरकार पुराने पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व रख-रखाव में भी विफल साबित हो रही है।
होटल चलाने में सरकार नाकाम
राँची में पर्यटन विभाग के होटल को निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी चल रही है। हटिया डैम में करोड़ों रुपये खर्च कर बोट मँगाये गये थे जो आज जहाँ-तहाँ पड़े हुए हैं। टैगोर हिल की स्थिति और जर्जर हो गयी है। हुंडरू में बने गेस्ट हाउस की स्थिति भी गंभीर है। दशम फॉल में झारखण्ड राज्य बनने के बाद लगभग 25 लोग डूब गये। पर्यटन विभाग यहाँ सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं कर पाया है। जमशेदपुर में बने होटल साकची बिहार की स्थिति भी बिरसा विहार जैसी ही है। इसके संचालन के लिए भी एक निजी एजेंसी चाहिए। यह तो सीधे पर्यटन विभाग की नाकामी है। हुंडरू जलप्रपात के समीप करोड़ों खर्च कर गेस्ट हाउस बना है जिसका उपयोग नहीं हो पाता है। न यहाँ पर्यटक रात गुजारते हैं, न पर्यटन विभाग इसकी पहल करता है; क्योंकि इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सबसे बड़ी बात है।
पर्यटकों की सुरक्षा भगवान भरोसे 
झारखण्ड में भी अधिकतर जल प्रपात नक्सल प्रभावित इलाकों में हैं। राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ के जंगल व पहाड़ पर नक्सलियों का बसेरा है। दुर्गम इलाके में इनकी ही समानांतर सरकार चलती है। इनके अनुसार बसें चलती हैं, दुकानें खुलती हैं। इन इलाकों में पुलिस दिन में भी जाने से कतराती है। जैविक विविधाओं और जंगली जानवरों से भरे बेतला नेशनल पार्क, हजारीबाग, नेतरहाट की वादियाँ निश्चित रूप से पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती हैं। कई बार पर्यटन विभाग ने गाँव में युवकों को जागरूक करने का प्रयास किया लेकिन असफल रही; क्योंकि राज्य सरकार इन नक्सल प्रभावित इलाकों में पर्यटकों को सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने के लिए कभी चर्चा भी नहीं करती है। पर्यटन विभाग में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। कई बार विधानसभा में भी इसकी चर्चा हुई, पर आरोपित अधिकारी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जर्जर हैं सड़कें
झारखण्ड के जिन इलाकों में पर्यटन स्थल हैं, वहाँ की सड़कों की स्थिति भी जर्जर है। इस कारण पर्यटक यहाँ आने से मुँह मोड़ रहे हैं। खराब मौसम में दूरस्थ इलाकों में आवाजाही पर्यटक की राह में रोडे़ हैं। पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए पूरी सुविधा नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाइड और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं हैं।
एयरपोर्ट की भी स्थिति अच्छी नहीं
इसके अलावा राँची एयरपोर्ट की भी स्थिति अच्छी नहीं है। यहाँ से ज्यादा जगहों के लिए हवाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। देवघर में हवाई अड्डा बनाने का कार्य चल रहा है। हवाई अड्डा तैयार होने के बाद यहाँ निश्चित रूप से हलचल बढ़ेगी।
 झारखण्ड में पर्यटन उद्योग की बदहाली के कारण- 
1. झारखण्ड में पर्यटन सुविधाओं का अभाव।
2. पर्यटन विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपित अधिकारी खुलेआम घूम रहे हैं।
3. करोडों रुपये खर्च कर बना टूरिस्ट बंगला पर्यटकों के इंतजार में जर्जर हो रहे हैं।
4. दूसरे राज्य पर्यटन में हर वर्ष एक कदम आगे बढ़ जाते हैं और झारखण्ड एक कदम पीछे।
5. अधिकतर पर्यटन स्थलों में नक्सलियों का बसेरा है, जिससे लोग असुरक्षित महसूस करते हैं।
6. झारखण्ड का पर्यटन स्थल सिर्फ वेबसाइट तक सीमित रह गया है।
7. देवघर में स्थित वैद्यनाथधाम जैसे धार्मिक पर्यटन स्थलों पर पण्डा की घृणित संस्कृति कायम है जहाँ कदम-कदम पर पण्डों द्वारा रुपये-पैसे की माँग की जाती है। इस कारण दुबारा पर्यटक यहाँ आना नहीं चाहते।
8. सड़क मार्ग की स्थिति काफी खराब है।
9. पर्यटन के क्षेत्र में सरकारी या निजी पूँजी निवेश का सर्वथा अभाव है।