गुरुवार, 11 सितंबर 2014

स्वामी विवेकानंद के विश्व बंधुत्व का संदेश / Swami Vivekananda's Message of Universal Brotherhood





अमेरिका पर हुए 9/11 के हमले की 13वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर 11 सितंबर 2001 के हमले और इसी दिन 1893 में शिकागो में दिए गए स्वामी विवेकानंद के भाषण में फर्क बताया। प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर दुनिया स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं पर अमल करती तो 9/11 जैसी कायराना हरकत न होती। 121 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद में विश्व बंधुत्व का संदेश दिया था।

धर्म संसद में भाषण से पहले स्वामी विवेकानंद सिर्फ नरेंद्र थे जो बहुत मुश्किलों का सामना करते हुए जापान, चीन और कनाडा की यात्रा कर अमेरिका पहुंचे थे। उनको तो धर्म संसद में बोलने का मौका भी नहीं दिया जा रहा था लेकिन जब उन्होंने अमेरिका के भाइयों और बहनों के संबोधन से भाषण शुरू किया तो पूरे दो मिनट तक आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में तालियां बजती रहीं। इसके बाद धर्म संसद सम्मोहित होकर स्वामी जी को सुनती रही। अमेरिकी मीडिया ने उन्हें भारत से आया 'तूफानी संन्यासी' 'दैवीय वक्ता' और 'पश्चिमी दुनिया के लिए भारतीय ज्ञान का दूत' जैसे शब्दों से सम्मान दिया। अमेरिका पर स्वामी विवेकानंद ने जो असर छोड़ा वो आज भी कायम है। इसीलिए, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जब भारतीय संसद को संबोधित किया तो स्वामी विवेकानंद का संदेश उनकी जुबान पर भी था। हिंदू धर्म के प्रतीक के रूप में गेरुए कपड़े से अमेरिका का पहला परिचय स्वामी विवेकानंद ने ही कराया था। उनके भाषण ने अमेरिका पर ऐसा असर छोड़ा कि गेरुए कपड़े अमेरिकी फैशन में शुमार किए जाने लगे। शिकागो-भाषण से ही दुनिया ने ये जाना कि भारत गरीब देश जरूर है लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान में वो बहुत अमीर है। 121 साल पहले दुनिया के धर्मों पर हुई विश्व संसद में दिए गए स्वामी विवेकानंद के भाषण ने भारत के बारे में अमेरिका ही नहीं समूची दुनिया की सोच को बदल दिया।
स्वामी विवेकानंद कैसे गए अमेरिका---
अमेरिका जाने से पहले नरेंद्र नाथ मद्रास में थे। तब उन्होंने अखबारों में शिकागो में हो रही धर्म संसद के बारे में सुना था। कहते हैं नरेंद्रनाथ को उनके गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने सपने में आकर धर्म संसद में जाने का संदेश दिया था लेकिन नरेंद्र नाथ के पास पश्चिम देशों में जाने के लिए पैसे नहीं थे। नरेंद्र नाथ ने खेत्री के महाराज से संपर्क किया और उन्हीं के सुझाव पर अपना नाम स्वामी विवेकानंद रख लिया। महाराजा खेत्री की मदद से ही 31 मई 1893 को स्वामी विवेकानंद, चीन-जापान और कनाडा होते हुए अमेरिका की यात्रा पर निकल पड़े।
धर्म संसद में बुलाए नहीं गए थे विवेकानंद---
30 जुलाई 1893 को स्वामी विवेकानंद अमेरिका के शिकागो पहुंचे, लेकिन वो ये जानकर परेशान हो गए कि सिर्फ जानी-मानी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को ही विश्व धर्म संसद में बोलने का मौका मिलेगा। विवेकानंद ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन हेनरी राइट से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें हार्वर्ड में भाषण देने के लिए बुलाया। राइट विवेकानंद से बहुत प्रभावित थे, जब उन्होंने जाना कि धर्म संसद के लिए स्वामी जी के पास किसी संस्था का परिचय नहीं है, तब उन्होंने कहा कि स्वामी जी, आपसे आपके परिचय के लिए पूछना ऐसा ही है जैसे सूरज से पूछा जाए कि स्वर्ग में वो किस अधिकार से चमक रहा है। इसके बाद प्रोफेसर राइट ने धर्म संसद के चेयरमैन को चिट्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि ये व्यक्ति हमारे सभी प्रोफेसरों के ज्ञान से भी ज्यादा ज्ञानी है। स्वामी विवेकानंद धर्मसंसद में किसी संस्था के नहीं बल्कि भारत के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किए गए।
भाषण में स्वामी विवेकानंद ने कहा---
11 सितंबर 1893 को शिकागो में धर्मसंसद शुरू हुई। स्वामी विवेकानंद का नाम पुकारा गया। सकुचाते हुए स्वामी विवेकानंद मंच पर पहुंचे। वो घबराए हुए थे। माथे पर आए पसीने को उन्होंने पोंछा। लोगों को लगा कि भारत से आया ये नौजवान संन्यासी कुछ बोल नहीं पाएगा। स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु का ध्यान किया और इसके बाद उनके मुंह से जो बोल निकले, उसे धर्म संसद सुनती रह गई। स्वामी विवेकानंद के पहले शब्द थे अमेरिका के भाइयो और बहनो। ये सुनते ही वहां करीब दो मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। इसके बाद स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान से भरा ऐसा ओजस्वी भाषण दिया जो इतिहास बन गया। स्वामी विवेकानंद के भाषण में उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का दिया गया वैदिक दर्शन का ज्ञान था। इस भाषण में दुनिया को शांति से जीने का संदेश छुपा था। इसी भाषण में वो संदेश भी है जिसमें स्वामी विवेकानंद ने कट्टरता और हिंसा की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिकता कट्टरता और उसी की भयानक उपज धर्मांधता ने लंबे वक्त से इस सुंदर धरती को जकड़ रखा है। ऐसे लोगों ने धरती को हिंसा से भर दिया है। कितनी ही बार उसे मानव रक्त से रंग दिया, सभ्यताओं को तबाह किया और सभी देशों को निराशा के गर्त में धकेल दिया। इसके बाद जितने दिन भी धर्म संसद चली स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म, और भारत के बारे में दुनिया को वो ज्ञान दिया जिसने भारत की नई छवि बना दी। इस धर्म संसद के बाद स्वामी विवेकानंद विश्व प्रसिद्ध हस्ती बन गए। हाथ बांधे हुआ उनका पोज शिकागो पोज के नाम से जाना जाने लगा। स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के बाद इसे थॉमस हैरीसन नाम के फोटोग्राफर ने खींचा था। हैरीसन ने स्वामी जी की आठ तस्वीरें ली थीं जिनमें से पांच पर स्वामी जी ने अपने हस्ताक्षर भी किए थे। अगले तीन साल तक स्वामी विवेकानंद अमेरिका में और लंदन में वेदांत की शिक्षाओं का प्रसार करते रहे।
विवेकानंद अमेरिका से श्रीलंका पहुंचे---
15 जनवरी 1897 को विवेकानंद अमेरिका से श्रीलंका पहुंचे। उनका जोरदार स्वागत हुआ। इसके बाद वो रामेश्वरम से रेल के रास्ते आगे बढ़े। रास्ते में लोग रेल रोककर उनका भाषण सुनने की जिद करते थे। विवेकानंद विदेशों में भारत के आध्यात्मिक ज्ञान की बात करते थे लेकिन भारत में वो विकास की बात करते थे। गरीबी, जाति व्यवस्था और साम्राज्यवाद को खत्म करने की बात करते थे। रामेश्वरम से मद्रास होते हुए विवेकानंद कोलकाता पहुंचे, वो कोलकाता जो उनकी जन्मभूमि थी और लंबे वक्त तक उनकी कर्मभूमि रही।
राम कृष्ण मिशन की नींव रखी---
शिकागो की धर्म संसद से भारत लौटने पर 1 मई 1897 को स्वामी विवेकानंद ने राम कृष्ण मिशन की नींव रखी। राम कृष्ण मिशन नए भारत के निर्माण के लिए अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और साफ-सफाई के काम से जुड़ गया। स्वामी विवेकानंद नौजवानों के आदर्श बन गए। 1898 में उन्होंने बेलूर मठ की स्थापना की। 4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ में ही स्वामी विवेकानंद का निधन हो गया लेकिन उनके कहे शब्द आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जिसका मूल मंत्र है-- ''उठो, जागो और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रुको मत।'' (Wake up, wake up and do not stop before reaching the target.)

नरेंद्रनाथ के स्वामी विवेकानंद बनने की राह---
रविंद्रनाथ टैगोर, अरविंदो घोष और महात्मा गांधी की तरह स्वामी विवेकानंद को भारत की आत्मा को जगाने वाले भारतीय राष्ट्रवाद के मसीहा के तौर पर देखा जाता है। उनमें छुपे महानता के ये गुण बचपन से ही दिखने लगे थे। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता हाईकोर्ट में वकील विश्वनाथ दत्त और उनकी पत्नी भुवनेश्वरी देवी के घर में नरेंद्र नाथ का जन्म हुआ था। विश्वनाथ दत्त प्रगतिशील सोच वाले शख्स थे, जबकि भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की थीं। नरेंद्र नाथ के जीवन पर माता और पिता दोनों की सोच का गहरा असर पड़ा। बचपन में चंचल स्वभाव वाले नरेंद्र बड़े होकर एक धीर-गंभीर और पढ़ने में रुचि रखने वाले नौजवान में बदल गए। धर्म, दर्शन, साहित्य, इतिहास और विज्ञान हर विषय में उनकी रुचि थी। नरेंद्र ने शास्त्रीय संगीत भी सीखा और 1881 में जनरल एसेंबली इंस्टीट्यूशन नाम से जाने जाने वाले स्कॉटिश चर्च कॉलेज से चित्रकला की परीक्षा पास की। 1884 में उन्हें कला में स्नातक की डिग्री मिली। उनकी बहुमुखी प्रतिभा देख कर जनरल एसेंबली इंस्टीट्यूशन के प्रिसिंपल विलियम हेस्टी ने उन्हें जीनियस कहा था। 28 सितंबर 1895 को शिकागो एडवोकेट नाम के अंग्रेजी अखबार ने उनके बारे में लिखा कि विवेकानंद ऐसी अंग्रेजी बोलता है जैसे वो उसकी मातृभाषा हो। नरेंद्र नाथ जीनियस थे और ज्ञान के लिए इस जीनियस की भूख खत्म नहीं हो रही थी। वो ईश्वर को तलाश रहे थे। इसी तलाश ने उन्हें ब्रह्म समाज के केशुब चंद्र सेन और देवेंद्रनाथ टैगोर वाले धड़े से जोड़ दिया। नरेंद्रनाथ की जिज्ञासा यहां भी शांत नहीं हुई। फिर, एक दिन क्लास में मशहूर कवि विलियम वर्डस् वर्थ की कविता में ट्रांस शब्द का अर्थ समझाते हुए प्रोफेसर हेस्टी ने कहा कि जिसे सचमुच इसका अर्थ जानना हो उसे रामकृष्ण परमहंस से मिलना चाहिए और यहीं से एक शिष्य से गुरु की मुलाकात तय हो गई। कहते हैं गुरु के बिना बुद्धिमान से बुद्धिमान शख्स भी अपने जीवन के लक्ष्य और अर्थ नहीं तलाश पाता है। स्वामी विवेकानंद के साथ भी यही हुआ, जबतक कि उनकी मुलाकात राम कृष्ण परमहंस से नहीं हुई थी।
गुरु रामकृष्ण परमहंस से नरेंद्रनाथ की मुलाकात---
स्वामी विवेकानंद अगर ज्ञान की रौशनी थे तो रामकृष्ण परमहंस वो प्रकाश पुंज थे जिनके ज्ञान की रौशनी ने नरेंद्रनाथ को विवेकानंद बना दिया था। अपने कॉलेज के प्रिंसिपल से रामकृष्ण परमहंस के बारे में सुनकर, नवंबर 1881 को वो उनसे मिलने दक्षिणेश्वर के काली मंदिर पहुंचे थे। रामकृष्ण परमहंस से भी नरेंद्र नाथ ने वही सवाल किया जो वो औरों से कर चुके थे, कि क्या आपने भगवान को देखा है? रामकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया-हां मैंने देखा है, मैं भगवान को उतना ही साफ देख रहा हूं जितना कि तुम्हें देख सकता हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर सकता हूं। रामकृष्ण परमहंस के जवाब से नरेंद्रनाथ प्रभावित तो हुए लेकिन शुरुआत में वो उनकी सोच को समझ नहीं सके। हालांकि इस मुलाकात के बाद उन्होंने नियम से रामकृष्ण परमहंस के पास जाना शुरू कर दिया। वो रामकृष्ण परमहंस के विचारों से सहमत नहीं थे। निराकार ब्रह्म के साथ एकाकार हो जाने के अद्वैतवाद के सिद्धांत को शुरुआत में उन्होंने धर्मविरोधी तक समझा। तर्क-वितर्क में वो रामकृष्ण परहमंस का विरोध करते थे, तब उन्हें यही जवाब मिलता था कि सत्य को सभी कोण से देखने की कोशिश करो। इसके बाद नरेंद्र के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया, जब 1884 में उनके पिता का देहांत हो गया। अमीर घर के नरेंद्र एकाएक गरीब हो गए। उनके घर पर उधार चुकाने की मांग करने वालों की भीड़ जमा होने लगी। नरेंद्र ने रोजगार तलाशने की भी कोशिश की लेकिन नाकाम रहने पर वो रामकृष्ण परमहंस के पास लौट आए। उन्होंने परमहंस से कहा कि वो मां काली से उनके परिवार की माली हालत सुधारने के लिए प्रार्थना करें। रामकृष्ण परमहंस ने कहा कि वो खुद काली मां से प्रार्थना क्यों नहीं करते। कहा जाता है कि नरेंद्र तीन बार काली मंदिर में गए लेकिन हर बार उन्होंने अपने लिए ज्ञान और भक्ति मांगी। इस आध्यात्मिक तजुर्बे के बाद नरेंद्र ने सांसारिक मोह का त्याग कर दिया और राम कृष्ण परमहंस को अपना गुरु मान लिया। राम कृष्ण परमहंस ने स्वामी विवेकानंद को जीवन का ज्ञान दिया। 16 अगस्त 1886 को रामकृष्ण परमहंस के निधन के दो साल बाद नरेंद्र भारत भ्रमण के लिए निकल पड़े।
भारत भ्रमण---
भारत भ्रमण के दौरान वो देश में फैली गरीबी, पिछड़ेपन को देखकर विचलित हो उठे। छह साल तक नरेंद्रनाथ भारत की समस्या और आध्यात्म के गूढ़ सवालों पर विचार करते रहे। कहा जाता है कि इसी यात्रा के अंत में कन्याकुमारी में नरेंद्र को ये ज्ञान मिला कि नए भारत के निर्माण से ही देश की समस्या दूर की जा सकती है। भारत के पुनर्निर्माण का लगाव ही उन्हें शिकागो की धर्मसंसद तक ले गया।

आधार कार्ड का मजाक : भगवान हनुमान का आधार कार्ड नंबर- 2094 7051 9541 / Joke of The AAdhar Card : Lord Hanuman AAdhar Card No. 2094 7051 9541


पवनपुत्र भगवान हनुमान की पहचान तय हो गई है! दुनिया में उनके चाहे जितने भी मंदिर हों लेकिन उनका निवास स्थान भी तय हो गया है! ये भी तय हो चुका है कि हनुमानजी के पिता का क्या नाम है। आप सोच रहे होंगे, आखिर ये क्या बकवास है लेकिन ये हम बिना वजह नहीं कह रहे। हमारे इस बयान पर सरकारी दस्तावेज मुहर लगा रहे हैं। देश की बेहद अहम योजनाओं में शामिल आधार कार्ड को बनाने वाले सरकारी कर्मचारी किस तरह आँखें मूँदकर कार्ड छापते हैं, इसका जीता जागता सबूत राजस्थान के सीकर में मिला है। यहाँ भगवान हनुमान के नाम से आधार कार्ड भी बन गया और तस्वीर की जगह बजरंग बली की फोटो भी लगी है। दरअसल, सीकर में हनुमानजी के नाम से आधार कार्ड जारी हो चुका है। कार्ड पर बाकायदा उनकी तस्वीर छपी है और पिता के नाम पर पवनजी छपा हुआ है। कार्ड का नंबर है 209470519541 और कार्ड पर हनुमानजी का मोबाइल नम्बर भी छपा हआ है। साथ ही उनके जन्म की तारीख 1 जनवरी 1959 दी गई है। सीकर के दांतारामगढ़ में जारी कार्ड पर हनुमान जी का पता है, वार्ड नम्बर 6, दांतारामगढ़, पंचायत समिति के पास, जिला सीकर। जाहिर है इस पते पर कोई भी लिफाफा पहुँचना बेहद मुश्किल था। तीन दिनों तक डाकिया इस पते को खोजता रहा लेकिन उसे हनुमान जी का एक मंदिर तक देखने को नहीं मिला। हारकर पोस्ट ऑफिस स्टाफ ने लिफाफा खोला तो सारी बातें सामने आईं। सवाल ये है कि आखिर आधार कार्ड पर किसके फिंगर प्रिंट्स लिये गए और किसकी आँखों के रेटिना स्कैन किये गए ? तय है कि ये सरासर मजाक है और इस बेआधार मजाक के लिए आधार कार्ड बनानेवाले जिम्मेदार हैं। हनुमान जी के इस आधार कार्ड पर न सिर्फ पंजीयन क्रमांक- 1018 / 18252 / 01821 और कार्ड नंबर- 2094 7051 9541 दर्ज हैं। पवनपुत्र कहलाने वाले हनुमान जी के पिता के नाम वाले कॉलम में 'पवन जी' भी लिखा हुआ है। भगवान हनुमान के नाम पर जारी किए गए इस कार्ड को लेकर अब सबसे ज्यादा परेशानी शहर के डाकिये को हो रही है जो इस बात से परेशान है कि आखिर यह कार्ड कहाँ पहुँचाया जाए। यह कार्ड तीन दिन पहले सीकर के दातारामगढ़ कस्बे के पोस्ट ऑफिस में पहुंचा जिसमें वार्ड नंबर-6, दातारामगढ़ का पता लिखा है। जब यह पता ठीक न होने पर पोस्ट ऑफिस स्टाफ ने लिफाफे को खोला तो उसमें हनुमान जी के नाम का आधार कार्ड मिला। वे इस आधार कार्ड पर पंजीयन क्रमांक और कार्ड नंबर के साथ-साथ मोबाइल फोन नंबर भी देखकर हैरान रह गए। जब उस मोबाइल नंबर पर फोन किया गया, तो पता चला कि वह नंबर अंकित नामक एक युवक का है। अंकित के मुताबिक, दो साल पहले तक वह आधार कार्ड बनाने वाली कंपनी में ही सुपरवाइजर के पद पर तैनात था और उसी समय उसने भी आधार कार्ड के लिए अप्लाई किया था लेकिन किसी कारणवश कार्ड नहीं बन पाया।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर हिन्दुस्थान समाचार की रायशुमारी : जनता ने दिये अच्छे अंक / Completion of 100 Days of The Modi Government, Referendum of Hindusthan Samachar : People Gave Good Marks



प्रस्तुति : शीतांशु कुमार सहाय / Sheetanshu Kumar Sahay
-18 राज्य के 51441 लोगों की राय
-मोदी से 5 साल में अपेक्षित परिणामों की उम्मीद
-मोदी दिखे मनमोहन पर भारी
-सौ दिन का रिपोर्ट कार्ड, अच्छे अंकों से पास हुई मोदी सरकार
-अरूणाचल, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में 80 प्रतिशत से अधिक मोदी के दीवाने
-दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में भी बरकरार है क्रेज
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के सौ दिन पूरे होने पर देश की जनता ने उनकी नेतृत्व में चल रही सरकार को अच्छे अंक दिये हैं। लोगों ने पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी सरकार के शासन को ज्यादा उम्दा बताया है। लेकिन, उनसे अपेक्षित परिणामों की उम्मीद पांच साल में करने की राय 40 फीसदी लोगों ने दी है। जनता ने जहां मोदी की विदेश नीति को सकारात्मक नजरों से देखा है वहीं इस सरकार के पहले बजट से लोगों की उम्मीदों में इजाफा होने का भी संकेत मिला है। हालांकि महंगाई के मुद्दे पर तत्कालिक राहत न मिलने का लोगों में मलाल जरूर दिखा लेकिन भविष्य को लेकर अधिकतर जनता आशान्वित है।
मोदी सरकार के सौ दिन का यह रिपोर्ट कार्ड देश की एकमात्र बहुभाषी न्यूज एजेंसी ‘हिन्दुस्थान समाचार’ द्वारा कराए गए एक सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है। न्यूज एजेंसी ने देश के 18 राज्यों में 51,441 लोगों के बीच जब रायशुमारी की तो पता चला कि 44 प्रतिशत लोग मोदी से पांच साल में अपेक्षित परिणामों की आशा कर रहे हैं। सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि मोदी सरकार से अपेक्षित परिणामों की आशा कब तक करनी चाहिए ? इस सवाल के जवाब में 25 प्रतिशत लोगों ने एक साल का वक्त दिया तो 31 फीसदी की राय दो साल की रही। करीब 26 प्रतिशत लोगों ने अपेक्षित परिणामों के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पांच साल का समय देना उचित माना, जबकि 18 फीसदी इस मत के थे कि मोदी को आगामी कार्यकाल तक का वक्त दिया जाना चाहिये। इस तरह 44 प्रतिशत लोगों को मोदी से पांच साल में अपेक्षित परिणामों की आशा है। एक साल का वक्त देने वालों में सर्वाधिक राय त्रिपुरा, अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम से मिली जहां के क्रमशः 85, 60, 71 और 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि मोदी से अपेक्षित परिणामों की आशा एक साल बाद करनी चाहिए। तीन साल का समय देने वालों में सर्वाधिक संख्या मध्य प्रदेश से 50 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश से 42-42 प्रतिशत, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से 40-40 प्रतिशत और दिल्ली से 36 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसी तरह पांच साल तक का समय देने की वकालत करने वालों में सर्वाधिक संख्या झारखंड और हरियाणा में 39-39 प्रतिशत और बिहार में 37 फीसदी रही। पांच साल बाद अगले कार्यकाल में अपेक्षित परिणामों की उम्मीद करने वालों में सर्वाधिक 60 प्रतिशत लोग पंजाब में मिले।

मनमोहन पर भारी दिखे मोदी---
100 दिनों में मोदी सरकार मनमोहन सरकार की तुलना में कैसी रही ? इस सवाल के जवाब में मात्र 20.6 प्रतिशत लोग ही मोदी सरकार को पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार की तुलना में खराब मान रहे हैं, जबकि करीब 40 प्रतिशत जनता मोदी सरकार को अच्छी और 25.6 प्रतिशत लोग संतोषजनक मान रहे हैं। जिन लोगों को तुलनात्मक जवाब देने में कठिनाई हो रही थी उन्होंने ‘पता नहीं’ विकल्प चुना। ऐसे लोगों की संख्या भी लगभग 15 प्रतिशत रही। इस तरह करीब 80 प्रतिशत लोग मोदी सरकार से संतुष्ट दिखे। चूंकि परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक सम्मानजनक यानि डिस्टिंक्शन मार्क माना जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि मोदी के सौ दिन के रिपोर्ट कार्ड में जनता ने डिस्टिंक्शन मार्क दर्ज कर दिया है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश, दिल्ली, अरूणाचल प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व हरियाणा जैसे राज्यों के क्रमशः 75, 73, 72, 72, 70 और 60 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार को मनमोहन सरकार की अपेक्षा बेहतर माना। उधर, जम्मू-कश्मीर में 52, असम और त्रिपुरा में 50, प0 बंगाल में 47, उत्तराखंड में 42, उत्तर प्रदेश में 37 और महाराष्ट्र में 31 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार को ज्यादा अच्छा बताया। हालांकि बिहार और छत्तीसगढ़ में मोदी सरकार को अव्वल बताने वालों की संख्या क्रमशः 32 और 24 प्रतिशत ही रही लेकिन इसके अलावा क्रमशः 44 और 42 प्रतिशत ऐसे लोग भी रहे जो सरकार को संतोषजनक बता रहे हैं। इन दोनों राज्यों में मोदी सरकार को खराब बताने वालों की संख्या क्रमशः 09 और 14 प्रतिशत रही।
मोदी के प्रति आकर्षण बरकरार---
करीब 36 प्रतिशत लोगों ने माना कि नरेंद्र मोदी के प्रति जनता में आकर्षण अभी भी बरकरार है जबकि 31 प्रतिशत लोगों ने रायशुमारी के दौरान बीचोबीच वाली स्थिति बताई। एक तरह से ये लोग भी मोदी के पक्ष में जाते दिखे। इससे मोदी के प्रति आकर्षण का प्रतिशत 67 हो जाता है। हालांकि 21 फीसदी लोगों की राय में सरकार बनने के बाद मोदी का क्रेज घटा है। 12 फीसदी लोगों ने इस सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें पता नहीं। मोदी के प्रति सर्वाधिक आकर्षण अरूणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में दिखा। इन राज्यों में क्रमशः 97, 85, 80, 71, 72 और 71 प्रतिशत लोग मोदी के दीवाने दिखे। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में यह प्रतिशत क्रमशः 33, 23, 39, 39, 41 व 52 रहा। महाराष्ट्र में मोदी का आकर्षण खराब बताने वालों की संख्या 25 प्रतिशत रही। हालांकि यहां के 35 प्रतिशत लोगों ने इस सवाल के जवाब में बीचोबीच वाली स्थिति बताई। बिहार में भी 52 प्रतिशत लोग बीचोबीच वाली स्थिति के पक्षधर रहे। उधर, महाराष्ट्र में मोदी के प्रति पहले जैसा आकर्षण अब नहीं दिख रहा। वहां मात्र 23 प्रतिशत लोग ही मोदी के आकर्षण को अच्छा मान रहे हैं जबकि खराब मानने वालों की संख्या 25 प्रतिशत है।
महंगाई व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर असमंजस---
महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मोदी को सत्ता सौंपने वाली जनता रायशुमारी के दौरान इन दोनों मुद्दों पर असमंजस में दिखी। हालांकि 38 प्रतिशत लोगों को विश्वास है कि मोदी सरकार महंगाई पर नियंत्रण कर लेगी। 27 प्रतिशत ने भविष्य में इस पर नियंत्रण की संभावना जताई। इस तरह 65 प्रतिशत लोग महंगाई से निजात पाने की उम्मीद किये हैं। हालांकि 21 फीसदी लोग सरकार को महंगाई रोक पाने में अक्षम पा रहे हैं और करीब 14 प्रतिशत ने इस सवाल के जवाब में कहा, ‘‘पता नहीं महंगाई रूक पायेगी अथवा नहीं’’। इसी तरह 36 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सफल माना, जबकि 24 प्रतिशत भविष्य में इस पर नियंत्रण की संभावना देख रहे हैं। यानि 60 प्रतिशत लोगों को विश्वास है कि मोदी भ्रष्टाचार को रोक लेंगे। हालांकि 22 प्रतिशत लोग इस मत के रहे कि सरकार भ्रष्टाचार को नहीं खत्म कर पायेगी वहीं 19 प्रतिशत ने ‘‘पता नहीं’’ का विकल्प भरा।
मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर जनता की राय---
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 38 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की कार्यप्रणाली को अच्छा बताया। इसके अलावा 28 प्रतिशत ने संतोषजनक कहा। इस तरह 66 प्रतिशत लोग मोदी सरकार की कार्यशैली के प्रति सकारात्मक सोच बनाया हैं। हालांकि 18 प्रतिशत लोगों की राय में मोदी सरकार के कामकाज का तरीका ठीक नहीं। वहीं 17 प्रतिशत लोगों ने इस सवाल के जवाब में ‘‘पता नहीं’’ कहा। मोदी सरकार की कार्यशैली को सर्वाधिक पसंद करने वाले लोग मध्य प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और असम राज्यों में मिले जहां क्रमशः 88, 75, 62, 60, 62 और 53 प्रतिशत लोगों ने इसे अच्छा बताया। इन राज्यों में मोदी सरकार की कार्यशैली को खराब कहने वालों का प्रतिशत क्रमशः 01, 00, 02, 04, 06 और 33 रहा। असम में कार्यप्रणाली को खराब कहने वालों की संख्या सर्वाधिक 33 प्रतिशत रही। झारखंड के 43 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की कार्यशैली को अच्छा बताया तो 33 फीसदी लोगों को यह संतोषजनक दिखा। खराब कहने वालों की संख्या 13 प्रतिशत रही। इसी तरह छत्तीसगढ़ के 47 प्रतिशत लोगों की निगाह में मोदी सरकार की कार्यशैली अच्छी है, जबकि 13 प्रतिशत लोग इसे खराब बता रहे हैं और 23 प्रतिशत ने संतोषजनक माना।  उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में ‘‘अच्छी’’ कार्यप्रणाली कहने वालों की संख्या क्रमशः 36, 33 और 30 प्रतिशत है तो खराब बताने वाले क्रमशः 24, 16 व 07 प्रतिशत लोग हैं। हालांकि इन राज्यों के क्रमशः 36, 22 और 42 प्रतिशत लोगों ने सरकार की कार्यप्रणाली को संतोषजनक बताया।
विदेश नीति पर जनता का मिजाज---
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 34 प्रतिशत लोग मोदी सरकार की विदेश नीति को सफल मान रहे हैं। इसके अलावा 28 प्रतिशत भविष्य में इसकी सफलता की संभावना देख रहे हैं। इस तरह 62 प्रतिशत लोग मोदी की विदेश नीति को सही बता रहे हैं। जिन लोगों ने मोदी की विदेश नीति की सफलता को नकारा है, उनकी संख्या 19 प्रतिशत दर्ज की गई। इस सवाल के जवाब में ‘‘पता नहीं’’ कहने वाले भी 19 फीसदी रहे। मध्य प्रदेश में 83 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 66, दिल्ली में 63, उत्तराखंड में 53 और राजस्थान में 52 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की विदेश नीति को सफल बताया। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आसाम, झारखंड, पंजाब व हरियाणा में यह प्रतिशत क्रमशः 30, 32, 41, 38, 46 और 45 दर्ज किया गया। प0 बंगाल, छत्तीसगढ़ और बिहार के क्रमशः 28, 22 और 28 फीसदी लोगों ने ही मोदी की विदेश नीति को सफल माना। हालांकि इन राज्यों में अधिकतर लोगों ने भविष्य की संभावनाओं पर ज्यादा उम्मीद दिखाई।
62 प्रतिशत लोग सरकार के पहले बजट से संतुष्ट---  
सर्वे में एक सवाल मोदी सरकार के पहले बजट पर था। करीब 39 प्रतिशत लोगों ने बजट को देश की अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने वाला बताया, जबकि 23 प्रतिशत ने संतोषजनक कहा। यानि 62 प्रतिशत लोग सरकार के पहले बजट से संतुष्ट दिखे। 20 प्रतिशत लोगों ने इसे अर्थव्यवस्था के प्रतिकूल देखा। हालांकि लगभग 19 प्रतिशत लोगों को इस सवाल का जवाब देने में कठिनाई हुई तो उन्होंने ‘‘पता नही’’ कहा। ‘‘पता नहीं’’ का जवाब देने वालों में सर्वाधिक 64 प्रतिशत संख्या बिहार से दर्ज की गई। इस राज्य में बजट को नकारात्मक मानने वाले 06 प्रतिशत रहे और सकारात्मक मानने वालों की संख्या भी मात्र 02 प्रतिशत ही रही। हालांकि 28 प्रतिशत लोगों ने बजट को संतोषजनक बताया। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मध्य प्रदेश और हरियाणा के क्रमशः 63, 64, 65 और 57 प्रतिशत लोगों ने बजट को अर्थव्यवस्था ठीक करने वाला माना जबकि असम में यह संख्या 52 प्रतिशत, प0 बंगाल में 45, झारखंड में 40, हिमाचल में 45, पंजाब में 53, अरूणाचल में 49, उत्तर प्रदेश में 40 और महाराष्ट्र में 33 प्रतिशत दर्ज हुई।
मोदी की नीतियां और विकास---
रायशुमारी के दौरान 38 प्रतिशत लोगों ने माना कि मोदी सरकार की नीतियां देश के विकास को सही दिशा में रफ्तार देंगी। साथ ही 31 प्रतिशत लोगों ने भविष्य में ज्यादा संभावना देखी। इस तरह 69 प्रतिशत लोग इस उम्मीद में हैं कि मोदी की नीतियां देश के विकास को गति देंगी। हालांकि करीब 20 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की नीतियों को देश के विकास के लिए उपयुक्त नहीं माना। वहीं 11 प्रतिशत ने ‘‘पता नहीं’’ का विकल्प चुना। मोदी सरकार की नीतियों के सर्वाधिक प्रशंसक असम में दिखे जहां के 69 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इन नीतियों से देश के विकास को सही दिशा में गति मिलेगी। इसके बाद अरूणाचल प्रदेश के 65, दिल्ली के 61, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के 60-60, राजस्थान के 53, पंजाब के 52, उत्तराखंड के 59, हरियाणा के 52, उत्तर प्रदेश के 39 और प0 बंगाल के 38 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार की नीतियों के पक्ष में दिखे। इन प्रदेशों से मिली नकारात्मक राय का प्रतिशत क्रमशः 00, 07, 08, 05, 17, 19, 04, 26, 26 और 15 दर्ज किया गया।   
जनता कैसे देख रही मोदी के वादे को---
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार करीब 34 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वादों को पूरा करेंगे। इसके अलावा 31 प्रतिशत लोग इसे संभावित मानकर चल रहे हैं। इस तरह 65 प्रतिशत लोग वादे को पूरा होने को लेकर आशान्वित हैं जबकि 21 प्रतिशत का कहना है कि मोदी अपने वादे पूरा नहीं कर पायेंगे। दरअसल, मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान जनता से ढेर सारे वादे किये थे। अब सरकार बनते ही उनसे जनता की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गयी हैं। इस संबंध में पूछे गये सवाल के जवाब में अरूणाचल प्रदेश के 82 प्रतिशत, मध्य प्रदेश के 75, उत्तराखंड के 62, राजस्थान के 61, बिहार और जम्मू-कश्मीर के 60-60, हिमाचल प्रदेश के 53, दिल्ली के 47, पंजाब के 46, हरियाणा के 45, छत्तीसगढ़ के 37, आसाम और झारखंड के 34-34, प0 बंगाल के 39, चंडीगढ़ के 32, महाराष्ट्र के 29 और उत्तर प्रदेश के 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि मोदी अपने वादे पूरा करेंगे। हालांकि त्रिपुरा के केवल 09 प्रतिशत लोगों में ही मोदी के वादों के प्रति विश्वास दिखा। दरअसल वहां के 71 प्रतिशत लोगों ने ‘‘पता नहीं’’ विकल्प पर अपना मत दिया है।

सर्वे-एक नजर में---
1-मनमोहन की तुलना में अच्छी है मोदी सरकार- करीब 80 प्रतिशत
2-मोदी सरकार का पहला बजट-संतोषजनक- 62 प्रतिशत
3-विकास को रफ्तार देंगी मोदी की नीतियां- सही- 69 प्रतिशत
4-महंगाई को नियंत्रित करेंगी मोदी सरकार- 65 प्रतिशत
5-भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पायेंगे मोदी- 60 प्रतिशत
6-विदेश नीति रहेगी सफल- 62 प्रतिशत
7-अच्छी और संतोषजनक है सरकार की कार्यप्रणाली- 66 प्रतिशत
8-वादे निभायेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- 65 प्रतिशत
9-अभी भी बरकरार है मोदी का आकर्षण- 67 प्रतिशत
10-पांच साल में मोदी से करें अपेक्षित परिणामों की आशा- 44 प्रतिशत

सर्वे का आकार---
मोदी सरकार के प्रति जनता का मिजाज जानने के लिए हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी ने देश के 18 राज्यों की पड़ताल की। इस दौरान 51,441 लोगों का सर्वे सैंपल लिया गया, जिसमें 63 प्रतिशत पुरुष, 37 प्रतिशत महिलाएं थीं। इन सब में करीब 52 प्रतिशत 40 वर्ष से कम के युवा थे। इसमें समाज के सभी वर्ग और क्षेत्र के लोगों की राय ली गई है। सर्वे के दौरान कुल दस सवालों के जवाब पूछे गये थे। सर्वेक्षण का यह कार्य हिन्दुस्थान समाचार के सैकड़ों कर्मठ संवाददाताओं ने कड़ी मेहनत कर 22 से 31 अगस्त के बीच पूरा किया। इसके बाद सम्पूर्ण आकड़े को संकलन प्रपत्र में इकट्ठा कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।
सर्वे में जिन 18 राज्यों को आच्छादित किया गया, उनके नाम हैं-
1-उत्तर प्रदेश
2-मध्य प्रदेश
3-महाराष्ट्र
4-झारखंड
5-बिहार
6-प0 बंगाल
7-छत्तीसगढ़
8-हिमाचल प्रदेश
9-राजस्थान
10-त्रिपुरा
11-जम्मू-कश्मीर
12-आसाम
13-पंजाब
14-अरूणाचल प्रदेश
15-दिल्ली
16-चंडीगढ़
17-उत्तराखंड
18-हरियाणा


      ये थे सवाल और उनके जवाब


मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी सरकार---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
अच्छी        20,071        39
खराब        10,612        21
संतोषजनक    13,173        26
पता नहीं        7,585        15


मोदी सरकार का पहला बजट क्या अर्थव्यवस्था ठीक करेगा---

उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        20,024        39
नहीं        10,142        20
संतोषजनक    11,726        23
पता नहीं        9,549        19


क्या मोदी सरकार की नीतियां विकास को देंगी रफ्तार---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        19,706        38
नहीं        10,254        20
संभावना है    16,037        31
पता नहीं        5,444        11


क्या मोदी सरकार महंगाई पर नियंत्रण कर लेगी---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        19,666        38
नहीं        10,989        21
संभावना है    13,641        27
पता नहीं        7,145        14


क्या मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पायेगी---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        18,314        36
नहीं        11,189        22
संभावना है    12,191        24
पता नहीं        9,747        19


क्या मोदी सरकार की विदेश नीति सफल रहेगी---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        17,708        34
नहीं        9,631        19
संभावना है    14,414        28
पता नहीं        9,688        19

मोदी सरकार की कार्यप्रणाली कैसी है---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
अच्छी        19,539        38
खराब        9,048        18
संतोषजनक    14,212        28
पता नहीं        8,642        17

 
क्या प्रधानमंत्री अपने वादे पूरे कर पायेंगे---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
हां        17,284        34
नहीं        10,710        21
संभावना है    15,850        31
पता नहीं        7,597        15


क्या मोदी का आकर्षण अभी भी बरकरार है---
उत्तर        संख्या        प्रतिशत
अच्छी है        18,348        36
खराब है        10,936        21
बीचोबीच        15,864        31
पता नहीं        6,293        12

मोदी से अपेक्षित परिणामों की आशा कब करनी चाहिये---
उत्तर            संख्या        प्रतिशत
एक साल में        13066        25
तीन साल में        16114        31
पांच साल में        13160        26
आगामी कार्यकाल में    9101        18

मंगलवार, 2 सितंबर 2014

सांप्रदायिक सौहार्द : मुस्लिम परिवार मानता है कि भगवान गणेश ने दी समृद्धि / Communal Harmony : Muslim Family Believes That The Prosperity of Lord Ganesh



गुजरात में 47 साल का एक मुस्लिम कसाई और उसका परिवार सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल देते हुए अपने घर में गणेश उत्सव मना रहा है। इस परिवार का कहना है कि गणपति ने उन्हें खुशहाली और समृद्धि दी है। गुजरात के गोधरा से करीब 60 किलोमीटर दूर पंचमहल जिले में अपने शिवराजपुर गांव में अनीश कुरैशी, उनकी पत्नी और तीन बच्चे पिछले पांच साल से गणेश उत्सव मना रहे हैं। इस बार भी उन्होंने अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की है। खुशी और समृद्धि के देव हैं भगवान गणेश। गणेश पूजन करने वाला हर व्यक्ति ऐसा ही कहता है, अगर ये बात एक मुस्लिम परिवार कहे तो इसके मायने और भी गहरे हो जाते हैं। सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी ही मिसाल पेश करते हैं गुजरात के अनीश कुरैशी। 47 वर्षीय मुस्लिम कसाई अनीश कुरैशी और उनका परिवार अपनी सुख और समृद्धि को भगवान गणेश का आशीर्वाद मानता है। पंचमहल जिले के शिवराजपुर गांव में रहने वाला कुरैशी का परिवार अपने घर में हर साल गणेश चतुर्थी पर गणेश मूर्ति की स्थापना करता है। शिवराजपुर 2002 में दंगों की वजह बने गोधरा से महज 60 किमी की दूरी पर स्थित है।
पांच सालों से मूर्ति स्थापना--- अनीश का परिवार लंबे समय से भगवान गणेश में आस्था रखता है। पांच साल पहले उन्होंने गणेश चतुर्थी पर घर में गणेश स्थापना की शुरुआत की। तब से हर साल विधिवत तरीके से गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना और चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन की परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
मान्यताओं का पालन---  अनीश बताते हैं कि इन दस दिनों के दौरान वे खुद को मांस काटने के काम से अलग रखते हैं। दसवें दिन परिवार पूरी श्रद्धा के साथ दादर नदी में गणेश जी का विसर्जन करता है। अनीश ने सावन महीने में भी मांस बेचने का काम बंद रखा था।
भगवान ने दी समृद्धि---  अनीश की 15 वर्षीय बेटी रुखसाना कहती है कि जबसे हम गणेश पूजन कर रहे हैं परिवार में बहुत बरकत हुई है। हमने अपना घर भी खरीद लिया है। यह सब भगवान गणेश की पूजा का फल है।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल---  गांव के सरपंच कनुभाई सोनी कहते हैं कि इस परिवार ने बंधुत्व और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की है। पूजा के समय ¨हदू परिवार के लोग भी उनके यहां एकत्र होते हैं। हर साल गांव के सभी लोगों के साथ ही कुरैशी परिवार भी दादर में गणेश विसर्जन में हिस्सा लेता है।

सोमवार, 1 सितंबर 2014

मोदी सरकार के 100 दिन के 100 काम / Modi Government's 100-days work 100




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 100 दिन पूरे हो रहे हैं। आपको बता रहे हैं मोदी सरकार के 100 कामों की फेहरिस्त। 100 दिन और 100 कदम। इसमें सरकार के आर्थिक, राजनीतिक, समाजिक, विदेश नीति को लेकर किए गए कार्यों का लेखा जोखा है।


1-पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने की पहल। सार्क देशों के तमाम मुखिया शपथग्रहण समारोह का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली में मौजूद थे। पाक सेना के इनकार के बावजूद नवाज शरीफ भी मोदी को बधाई देने के लिए यहां आए। सभी के साथ द्विपक्षीय बातचीत हुई। मोदी ने खुद कहा कि ये सही वक्त पर लिया गया सही फैसला था।

2-प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही नरेंद्र मोदी ने जनता के लिए अपने द्वार खोल दिए। पीएमओ की वेबसाइट पर एक लिंक चमकने लगा। प्रधानमंत्री के साथ करें बातचीत। मोदी ने कहा कि वो अपनी वेबसाइट के जरिए सरकार की हर जानकारी, नए कदम देश को बताते रहेंगे और ऐसा हुआ भी।

3–26 मई को ही देर रात नरेंद्र मोदी सरकार ने मंत्रालयों के पुनर्गठन पर भी मुहर लगा दी। मोदी ने 17 बड़े मंत्रालयों को मिलाकर 7 टुकड़ों में बांट दिया। ओवरसीज मंत्रालय विदेश मंत्रालय के अधीन हो गया तो कॉरपोरेट अफेयर्स वित्त मंत्रालय के। मकसद यही कि फैसलों के लिए फाइलें एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय में चक्कर ना काटती रहें।

4-27 मई को नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की पहली कैबिनेट की बैठक बुलाई। बैठक में सरकार ने पहला बड़ा फैसला किया कि कालेधन की जांच के लिए SIT बनाई जाएगी। SIT भले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी लेकिन ये भी ध्यान देने वाली बात है कि पिछली यूपीए सरकार लगातार इस फैसले को टालती जा रही थी।

5- 28 मई को नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय के अफसरों से मिले। उन्हें साफ ताकीद की गई कि मोदी सरकार के काम करने का एजेंडा होगा जनता की समस्याएं दूर करना। अफसरों को हर वो फैसले लेने को कहा गया जिससे लोगों की समस्याएं दूर हों, उनकी परेशानी कम हो। अब फैसलों में देरी की गुंजाइश नहीं थी।

6– 30 मई को स्कूली किताबों में अपनी जीवनी पढ़ाने पर नरेंद्र मोदी ने रोक लगा दी। दरअसल पीएम बनने के बाद कई अखबारों में छपा कि चायवाले से पीएम बनने का सफर अब बच्चों को किताबों में पढ़ाया जाएगा। लेकिन मोदी ने खुद ट्वीट करके ये कह दिया कि जीवित व्यक्ति की जीवनी बच्चों को हरगिज ना पढ़ाई जाए।

7- 31 मई को प्रधानमंत्री ने एक झटके में सभी मंत्री समूहों या कहें GOM को खत्म कर दिया। मंत्रालयों और विभागों को मजबूत बनाने के लिए ये एक बड़ा कदम था। सरकार का तर्क था कि अब तमाम मुद्दों पर सीधे मंत्रालय ही फैसला लेंगे और अगर कोई दिक्कत हुई तो PMO की तरफ से मदद की जाएगी।

8- 4 जून को संसद का पहला दिन। सोलहवीं लोकसभा का आगाज हुआ और मेजों की थपथपाहट के साथ नरेंद्र मोदी ने पहली बार लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया। लोकसभा में अपने पहले भाषण में नरेंद्र मोदी ने देश को भरोसा दिलाया कि आम आदमी की उम्मीदों और सपनों को पूरा करने की वो हर मुमकिन कोशिश करेंगे।

9–4 जून को ही प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की। ऐसी बैठक आठ साल के बाद हुई। ढाई घंटे तक चली बैठक में मोदी ने ये जानने की कोशिश की कि अफसर पूरी ताकत के साथ काम क्यों नहीं कर पा रहे हैं। बैठक के बाद मोदी ने अफसरों से कहा कि आप काम करिए। मैं 24 घंटे आपके साथ हूं।

10– 6 जून को प्रधानमंत्री ने बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में एक और सख्त फरमान दिया। ये फरमान था बीजेपी के सभी सांसदों के लिए। जितने दिन संसद की कार्यवाही चले, रोजाना आइए, पूरी तैयारी के साथ आइए, पूरी तैयारी के साथ सदन में सवाल करिए और पूरी तैयारी के साथ बहस में हिस्सा लीजिए। साफ था, मोदी को किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं।

11-7 जून को मोदी सरकार ने नौकरशाहों के लिए अहम निर्देश जारी किया। कैबिनेट सचिव ने अफसरों को 11 निर्देश भेजे जिससे काम करने का तरीका सुधरे। काम करने का माहौल सुधरे। फैसला लेने में देरी ना हो और दफ्तरों में साफ-सफाई हो। मोदी के इस आदेश के बाद अफसरों की मेजों पर लगे फाइलों के ढेर अचानक कम होने लगे।

12–8 जून को प्रधानमंत्री ने अपने घर पर गेटिंग इंडिया बैक ऑन ट्रैक, एन एक्शन एजेंडा फॉर रिफॉर्म किताब का विमोचन किया। इस किताब के जरिए मोदी ने साफ कर दिया कि देश के विकास को पटरी पर लाने के लिए उनकी सरकार का ब्लूप्रिंट क्या है। मोदी ने नीति निर्माण से लेकर स्किल डवलपमेंट पर जोर दिया।

13–10 जून को मोदी सरकार ने कैबिनेट की 4 स्टैंडिंग कमेटियों को भी बर्खास्त कर दिया। यूपीए सरकार के दौरान बनाई गई सुरक्षा, राजनीतिक मामलों, आर्थिक मामलों और संसदीय कार्य से जुड़ी अहम कैबिनेट कमेटियों का भी पुनर्गठन कर दिया गया। इसके बाद हर विभाग के मंत्री को फैसलों की ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी जाने लगी।

14–12 जून को मोदी सरकार ने एक ऐसा फैसला किया जो आठ साल से अटका पड़ा था। ये फैसला था सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का। मोदी के मुख्यमंत्री काल से ही गुजरात सरकार ये मांग कर रही थी। नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 17 मीटर और बढ़ाई जाए, लेकिन मनमोहन सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी। सरकार में आते ही तीन हफ्तों के भीतर मोदी ने फैसला लिया।

15–14 जून को नरेंद्र मोदी गोवा गए। देश के सबसे बड़े जंगी जहाज INS विक्रमादित्य को देश को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सेना से जुड़े उपकरणों और हथियार के निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा। यहीं पर पहली बार मोदी ने इशारा किया कि देश की वित्तीय हालत संभालने के लिए कड़े आर्थिक फैसले लेने होंगे।

16 –15 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले विदेश दौरे पर भूटान गए। मोदी ने भूटान नरेश और प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात की और वहां की संसद को संबोधित किया। मोदी ने दो टूक संदेश दिया कि किसी भी देश में शांति तभी रह पाएगी जब उसके पड़ोसी देश से संबंध अच्छे होंगे। मोदी ने 600 मेगावॉट पनबिजली परियोजना का उद्घाटन भी किया।

17–19 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और अहम और संवेदनशील फैसला किया। ये फैसला था, अफसरों की नियुक्ति में मंत्रियों के दखल पर रोक। मोदी ने आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी से राम विलास पासवान को भी बाहर रखा। मंत्रियों को ये आदेश दिया गया कि वो यूपीए सरकार के दौरान मंत्रियों के अफसरों को अपने स्टाफ में शामिल ना करें।

18-20 जून को वो दिन आया जब नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए एक बेहद ही साहसी फैसला किया। एक झटके में रेल यात्री किराए में 14 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी गई। मालभाड़ा भी साढ़े 6 फीसदी बढ़ा। लोगों ने इस फैसले की आलोचना की, लेकिन ज्यादातर ऐसे थे, जिनका मानना था कि सुविधाएं देने के लिए किराया बढ़ाना सही कदम था।

19-22 जून को सरकार ने फैसला किया कि मंत्रालयों के सचिवों को और जवाबदेह बनाया जाएगा। मोदी ने तय किया कि ऐसे सचिवों को और ज्यादा जिम्मेदार बनाया जाएगा जो अलग-अलग मंत्रालयों में अटकी हुई फाइलों को निकलवाने में अहम भूमिका निभाएंगे। साथ ही ऐसे मामलों में जब फंडिंग दूसरे मंत्रालयों से हो।

20-23 जून को सरकार संभाले हुए मोदी सरकार को लगभग एक महीना होने को था। एक और कड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क 15 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे चीनी की कीमत बढ़ेगी, लेकिन सरकार का तर्क था कि इस फैसले से घरेलू चीनी उद्योग मजबूत होगा।

21-23 जून को ही मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग को देश के तमाम न्यूक्लियर सेंटर की तहकीकात और निगरानी की इजाजत दे दी। अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील के वक्त भारत ने इस प्रस्ताव पर हामी भरी थी। इस इजाजत के साथ ही मोदी सरकार ने दुनिया को ये संदेश भी दिया कि नई सरकार परमाणु मामलों को लेकर गंभीर और जिम्मेदार है।

22-24 जून को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को तीन मंत्र दिए। पहला, लोगों की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई हो। दूसरा, राज्यों और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते और मजबूत करने के लिए काम हो और तीसरा, सेना की सारी जरूरतों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। तमाम मंत्रालयों से संपर्क के दौरान इन तीन मंत्रों पर खास ध्यान दिया जाता है।

23-मोदी के लिए बेहद अहम है देश के युवाओं को रोजगार। 25 जून को मोदी सरकार ने अपने गुजरात में कामयाबी के साथ चले रोजगार कार्यक्रम NEPAM को केंद्र की तरफ से भी लागू करने की मंजूरी दे दी। इस कार्यक्रम के तहत उद्योगों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को नौकरी में रहते हुए ट्रेनिंग और नौकरी पाने के लिए स्किल डवलपमेंट का कोर्स कराया जाता है।

24-26 जून को मोदी सरकार को केंद्र में एक महीना हुआ। इस दिन सीधे जनता से जुड़े कई कई आदेश एक साथ दिए गए। शहरी विकास मंत्रालय ने सारे मंत्रियों और अफसरों से अपील की कि जितना संभव हो सके दिल्ली में आने-जाने के लिए मेट्रो का ही इस्तेमाल करें। सरकार ने उन्हें समझाया कि इससे वक्त बचेगा। ट्रैफिक पर असर पड़ेगा और पर्यावरण का भी फायदा होगा।

25-फिजूलखर्ची रोकने के लिए एक और फैसला हुआ। 26 जून को मोदी सरकार ने अपने सभी मंत्रियों और अफसरों को नई कार खरीदने पर रोक लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी नई कार के बजाय उसी बुलेटप्रूफ कार का इस्तेमाल करते हैं जिससे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चला करते थे। मंत्रियों को ये भी कहा गया कि एक लाख रुपए से ज्यादा खर्च करने से पहले उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से इजाजत लेनी होगी।

26–छब्बीस जून को सरकार का एक महीना पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग लिखकर देश से मिले समर्थन के लिए आभार जताया। ये कहा कि उनकी सरकार का हर फैसला सिर्फ और सिर्फ देश हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पीएम ने ये भी कहा कि पिछली सरकारों को हनीमून पीरियड मिलता रहा है लेकिन उन पर तो पहले दिन से ही सियासी हमले होने लगे।

27-सरकार बनने के एक महीने के भीतर मोदी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जो सिर्फ कागजी नहीं थे। संसद में राष्ट्रपति के भाषण के जरिए मोदी सरकार ने ये साफ कर दिया कि वो कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है। कश्मीरी पंडियों को ये भरोसा दिया गया कि ना सिर्फ उनकी जमीन वापस की जाएगी बल्कि उनको दोबारा बसाने का भी पूरा इंतजाम किया जाएगा।

28-जिस चीन के साथ रिश्ते हमेशा तल्ख रहे। एक महीने के भीतर मोदी सरकार ने उस पर भी मेहनत की। चीनी विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान इंडस्ट्रियल पार्क पर सहमति बनी। ये भी तय हुआ कि छोटे चीनी निवेशकों से कम टैक्स वसूलने का तरीका खोजा जाए। सरकार के इस फैसले से भारत और चीन, दोनों को आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है।

29-रूस के साथ भी रिश्तों में गर्माहट लाने की कोशिश हुई। रूस के उप प्रधानमंत्री ने मोदी से मुलाकात की। कुडनकुलम में रूस के साथ मिलकर दो और न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने पर समझौता हुआ। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी समझौते पर दस्तखत किए गए।

30-कम मॉनसून की आशंका का असर महंगाई दर पर दिखा, लेकिन इसे कम करने के लिए मोदी सरकार ने कई कदम उठाए। आलू और प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में कर दिया गया। राज्य सरकारों को सख्त ताकीद की गई कि वो कालाबाजारियों पर नकेल कसे। छापेमारी करे। आम जनता से जुड़ी चीजों के निर्यात पर पाबंदी लगाकर कीमतों को काबू में करने की कोशिश की गई।

31-सरकार में एक महीना पूरा होने के बाद मोदी ने एक बार फिर अपने सांसदों की नकेल कसी। बाकायदा क्लास लगाकर पहली बार बीजेपी के टिकट पर सांसद बने नेताओं को काम करने का तरीका सिखाया गया। ये भी ताकीद की गई कि वो सदन के भीतर अपना बर्ताव दुरुस्त रखें। मोदी की इस क्लास का असर था कि सालों बाद संसद में इतना काम होता नजर आया।

32-मोदी ने अपनी सरकार के मंत्रियों और अफसरों को एक और नसीहत दी। आप जो काम कर रहे हैं वो अपने लोगों तक पहुंचाएं। मोदी ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर जोर दिया। हर मंत्री और अफसर को अपना ट्विटर अकाउंट खोलकर उसे लगातार अपडेट करने को कहा। मोदी ने प्रशासन में ट्विटर और फेसबुक के इस्तेमाल पर लगी रोक भी हटा दी।

33-30 जून को प्रधानमंत्री ने एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए श्रीहरिकोटा का रुख किया। उन्होंने PSLV C-23 रॉकेट लॉन्चर से 5 उपग्रहों की लॉन्चिंग देखी। इसरो के वैज्ञानिकों को इस कामयाबी की बधाई देने के बाद मोदी ने उनसे ये भी कहा कि सार्क देशों के लिए भी एक सैटेलाइट बनाई जाए जो सभी देशों को विकास में मदद करे।

34-छोटे और सस्ते घरों का सपना पूरा करने के लिए नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर से मदद मांगी। सिंगापुर के विदेश मंत्री की भारत यात्रा के दौरान मोदी ने उनसे कहा कि सिंगापुर वो तकनीक भारत को दे जिससे हमारे यहां भी सस्ते और मजबूत घर बनाए जा सकें। आपको याद दिला दें कि 2022 तक मोदी सरकार का सपना हर भारतीय को एक घर देने का है।

35-2 जुलाई को मोदी सरकार ने तय किया कि देश के ढाई लाख गावों में ब्रॉडबैंड सर्विस मुहैया कराकर, सभी गावों को एक दूसरे से जोड़ दिया जाए। सरकार की कोशिश डेढ़ लाख गावों में इंटरनेट सेंटर स्थापित करने की है। इन सेंटरों को स्थापित करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि क्षेत्रीय भाषाओं की वजह से ये फ्लॉप ना हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे जुड़ें।

36-3 जुलाई को मोदी सरकार ने अहम फैसला करते हुए तय किया कि अब भारत के बच्चों को रोटा वायरस की वैक्सीन समेत तीन नए वैक्सीन दिए जाएंगे। मोदी सरकार का लक्ष्य साल 2015 तक शिशु मृत्यु दर को दो-तिहाई तक घटाने का है। साथ ही सरकार ने ये भी तय किया कि जिन इलाकों में जापानी इंसेफिलाइटिस फैला है वहां बड़ों को भी इसकी वैक्सीन दी जाएगी।

37-प्रधानमंत्री बनने के बाद 4 जुलाई को पहली बार नरेंद्र मोदी जम्मू और कश्मीर गए। उरी में उन्होंने 240 मेगावॉट वाली पनबिजली योजना देश को समर्पित की। मोदी ने देश से फिर वायदा किया कि उनकी सरकार देश से अंधेरा दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां मोदी ने ये भी कहा कि देश में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के नेटवर्क पर भी ध्यान दिया जाएगा।

38- 4 जुलाई को नरेंद्र मोदी ने वैष्णो देवी के भक्तों को तोहफा दिया। कटरा उधमपुर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर नरेंद्र मोदी ने भक्तों को देवी के और करीब ला दिया। मोदी के सुझाव के बाद अब इस ट्रेन का नाम श्रीशक्ति एक्सप्रेस कर दिया गया है। मोदी के उस सुझाव पर भी काम हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि कटरा रेलवे स्टेशन को सौर ऊर्जा आधारित बनाया जाए।

39-देश के घरेलू मुद्दों के अलावा मोदी सरकार एक और मोर्चे पर लगातार काम करती रही। ये था इराक में फंसे भारतीयों को वापस लाना। मोदी सरकार की लगातार कोशिशों का नतीजा था कि तिकरित में फंसी केरल की 46 नर्सें 5 जुलाई को सुरक्षित वापस लौट पाईं। इराक संकट से निपटने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की भी जमकर तारीफ हुई।

40-मनमोहन सरकार के सबसे अहम प्रोजेक्ट में से एक आधार परियोजना को मोदी सरकार ने 5 जुलाई को जीवनदान दे दिया। इस आशंका को दरकिनार करते हुए कि बीजेपी सरकार आने के बाद ये योजना बंद हो जाएगी। नरेंद्र मोदी ने ना सिर्फ आधार के लिए बजट दिया बल्कि ये भी सुनिश्चित किया कि ये प्रोजेक्ट उनकी निगरानी में जारी रहेगा।

41-मोदी सरकार ने बुजुर्गों की सेहत पर भी खास ध्यान दिया। तय किया गया कि केंद्र की तीन योजनाओं, ओल्ड एज पेंशन स्कीम, आम आदमी बीमार योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को मिलाकर एक कर दिया जाए। देश के 20 जिलों में स्मार्ट कार्ड के जरिए इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की तैयारी जोरों पर चल रही है।

42-रेल बजट से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने रेल मंत्रालय को आदेश दिया कि देश में चलने वाली लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में फ्री वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई जाए। लोगों को सहूलियत देने की मुहिम में मोदी सरकार ने रेलवे के इस ऐतराज को भी खारिज कर दिया कि सभी ट्रेनों में वाई-फाई का खर्च बहुत ज्यादा होगा और इससे रेलवे को नुकसान होगा।

43-7 जुलाई को ही नरेंद्र मोदी सरकार ने कर्मचारी पेंशन स्कीम में भी बदलाव कर दिया। तय किया गया कि अब एक महीने में कम से कम एक हजार रुपए पेंशन के तौर पर मिला करेगा। मोदी सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा देश के 28 लाख लोगों को हुआ।

44-मोदी सरकार का पहला रेल बजट आया आठ जुलाई को। बजट में सबसे अहम था मुंबई-अहमदाबाद के बीच 300 किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन के सर्वे का प्रस्ताव। मोदी सरकार ने ये भी ऐलान किया कि देश के 9 बड़े रूटों पर 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हाई स्पीड ट्रेन भी चलाई जाएगी।

45-मोदी सरकार ने ऐलान किया कि अब इंटरनेट से प्रति मिनट 7200 टिकट बुक हो सकेंगे। रेलवे की वेबसाइट पर एक साथ 1 लाख 20 हजार लोग लॉग इन कर सकेंगे। मकसद यही कि इंटरनेट से टिकट बुकिंग कराते वक्त लोगों को होने वाली मुश्किल कम हो सके। रेल बजट में हुए इस वायदे पर अमल भी किया जा चुका है।

46-लोगों को एक और दिक्कत आती है प्लेटफॉर्म टिकट लेते वक्त। मोदी सरकार ने तय किया कि पार्किंग और प्लेटफॉर्म टिकट अब ऑनलाइन भी बुक हो सकेंगे। यही नहीं इंटरनेट के जरिए वेटिंग रूम बुक करने की सुविधा भी लोगों को मुहैया कराने की कोशिश हो रही है।

47-लंबी दूरी की ट्रेनों को वाई-फाई करने के अलावा मोदी सरकार ने ये भी तय किया कि अहम ट्रेनों में कंप्यूटर वर्क स्टेशन भी दिया जाएगा। यानि आपको दफ्तर का कोई काम हो तो अब आप ट्रेन में चलते-फिरते दफ्तर से भी अपना काम कर सकते हैं।

48-रेल बजट में मोदी सरकार ने लोगों की सहूलियत बढ़ाने वाला एक और कदम उठाया। आने वाले दिनों में रेल सफर के दौरान आपका मोबाइल आपका दोस्त बनेगा।मोबाइल पर वेक-अप कॉल आएगी। मोबाइल पर स्टेशन आने से पहले सूचना आएगी और जो स्टेशन गुजरेंगे, उनकी भी जानकारी दी जाएगी। ऐसे में इस बात का भी खतरा नहीं रहेगा कि स्टेशन गुजर जाए और आप उतर ही ना पाएं।

49-मोदी सरकार ने रेल में खाने-पीने की दिक्कतों को दूर करने के लिए भी बड़े फैसले लिए। हर ट्रेन में पहले से तैयार खाना देने का प्रोजेक्ट शुरू किया। यही नहीं, अब खाने पर यात्रियों से फीडबैक लिया जाएगा और अगर लोग संतुष्ट ना हुए तो ठेकेदार का लाइसेंस रद्द होगा। इसके अलावा अब खाने का ऑर्डर भी आनलाइन देने की सुविधा दी जाएगी।

50-सफाई पर पहले दिन से मोदी सरकार का जोर है और हमारी ट्रेनें गंदगी के लिए बदनाम। इसलिए रेल बजट में सफाई का खर्च इस बार 40 फीसदी बढ़ा दिया गया। ट्रेन में बायो टॉयलेट बनाने की योजना भी शुरू की गई। मोदी सरकार ने ये भी वायदा कि अब सभी स्टेशनों पर शौचालयों की सुविधा होगी।

51-नाम छोटे और दर्शन बड़े। मोदी सरकार की कोई भी योजना का नाम लंबा-चौड़ा नहीं है। पुराने दौर के राष्ट्रीय भूमि रिकॉर्ड सुधार कार्यक्रम जैसे कठिन और लंबे नामों के बजाय मोदी सरकार के कार्यक्रमों के नाम छोटे रखे जाते हैं। जैसे जन-धन योजना। ये फैसला हुआ रेल बजट वाले दिन, यानि 8 जुलाई को।

52-10 जुलाई को मोदी सरकार का पहला बजट आया। नौकरीपेशा लोगों को राहत देते हुए टैक्स में छूट की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर ढ़ाई लाख कर दी गई। 80 सी के तहत मिलने वाली छूट की सीमा को भी एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दिया गया। पीपीएफ में भी निवेश की सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दी गई।

53-मोदी सरकार ने ऐलान किया कि देशभर में 100 स्मार्ट सिटी बनाए जाएंगे। इसके लिए बजट में 7600 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी रखा गया। स्मार्ट सिटी के लिए विदेशी निवेश के जरिए पैसा जुटाया जाएगा। सरकार का तर्क है कि अगले दस साल में शहरी आबादी दस फीसदी बढ़ जाएगी और लोगों को सभी सुविधाएं देने के लिए 100 नए शहर जरूरी हैं।

54-गंगा के लिए अपना वायदा निभाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने 2 हजार करोड़ रुपए के साथ नमामि गंगा प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया। सरकार ने ऐसी सैकड़ों फैक्ट्रियों की पहचान कर उन पर रोक लगा दी जो गंगा के पानी को प्रदूषित कर रहीं थीं। बनारस में गंगा घाटों की सफाई का भी अभियान शुरू किया गया है।

55-गंगा को साफ करने के साथ ही पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर भी विकसित करने का ऐलान किया गया। बजट में सरकार ने 4200 करोड़ रुपए इस काम के लिए अलग से रखे। सरकार की योजना है कि अगले 6 साल में इलाहाबाद से हल्दिया तक पानी के जहाजों के लिए जलमार्ग विकसित किया जाए।

56-सरकार ने देश के बड़े हवाई अड्डों पर 6 महीने के भीतर ही ई वीजा की सुविधा शुरू करने का ऐलान किया। यानि दूसरे देशों से आने वाले टूरिस्टों को वीजा मिलने के नियम और आसान हो जाएंगे। टूरिस्टों की संख्या बनाने के लिए मोदी सरकार ने 5 टूरिस्ट सर्किट बनाने का भी फैसला किया।

57-मोदी सरकार ने तय किया कि देश के सभी राज्यों में दिल्ली के एम्स जैसे अस्पताल खोले जाएंगे। यही नहीं, आंध्र प्रदेश, पूर्वांचल, पश्चिम बंगाल और विदर्भ में एम्स की चार शाखाएं खुलेंगी। सरकार ने इस बात का भी फैसला किया कि देश में 12 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे।

58-मोदी सरकार का इरादा महिला और बाल कल्याण विकास पर डेढ़ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने का है। सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की भी शुरुआत की। निर्भया कोष से मदद लेकर दिल्ली में महिलाओं के लिए संकट प्रबंधन केंद्र खोलने का भी फैसला किया गया।

59-सभी तरह के निवेश के लिए अब होगा एक ही KYC यानि KNOW YOUR CUSTOMER फॉर्म। यही नहीं मोदी सरकार के निर्देश के बाद रिजर्व बैंक ने ये भी तय कर दिया कि बैंक अकाउंट खोलने के लिए सिर्फ एक ही दस्तावेज काफी होगा। यानि पहचान के लिए अलग, पते के लए अलग दस्तावेज देने के झंझट से मुक्ति मिली।

60-किसानों पर मोदी सरकार ने तोहफों की बरसात की। इस साल के अंत तक किसान टीवी चैनल शुरू होगा। खेत में मिट्टी की जांच के लिए हेल्थ कार्ड की योजना भी शुरू करने का ऐलान किया गया। इस जांच के लिए 100 से ज्यादा चलती-फिरती प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी।

61-पूर्वोत्तर पर भी खास ध्यान। पूर्वोतर में रेल संपर्क बढ़ाने के लिए एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया गया। इसके अलावा अरुण प्रभा नाम से 24 घंटे का एक टीवी चैनल शुरू करने की भी तैयारी है। वाजपेयी सरकार की परंपरा पर चलते हुए पूर्वी राज्यों के लिए अलग से बजट भी आवंटित किया गया।

62-चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के बुनकरों को वायदा किया था कि उनके विकास के लिए योजनाएं शुरू होंगी। ये वायदा पूरा करते हुए बनारस के बुनकरों के लिए अलग से 50 करोड़ का फंड बनाया गया। बनारस में हथकरघा व्यापार सुविधा केंद्र और शिल्प संग्रहालय भी बनेगा।

63-अफसरों के विदेश दौरे पर नरेंद्र मोदी की नजर। मोदी सरकार ने अफसरों की विदेश यात्रा पर नकेल कसते हुए ये नियम बना दिया कि अफसरों को पहले सरकार को पूरी तरह संतुष्ठ करना होगा कि आखिर उनकी विदेश यात्रा जरूरी क्यों है? उनकी विदेश यात्रा से प्रशासन और लोगों को क्या फायदा होगा।

64-मोदी सरकार करेगी भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की कोशिश। मोदी सरकार राज्यों से इस बारे में बात कर रही है कि क्या जमीन अधिग्रहण के लिए 70 के बजाय 50 फीसदी किसानों की मंजूरी को ही जरूरी माना जाए।सरकार का तर्क है कि ये फैसला किसानों के साथ ही उद्योगों के विकास में भी मददगार साबित होगा।

65-हिंदी भाषा का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने अहम कदम उठाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से हिंदी भाषी राज्यों के दफ्तरों को निर्देश दिया गया कि वो सरकारी काम हिंदी में ही करें। सोशल मीडिया में भी हिंदी का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। विवाद से बचने के लिए सरकार ने ये भी कहा कि वो सारी भाषाओं के विकास पर काम कर रही है।

66-ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने ब्राजील गए नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबका ध्यान खींचा। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को स्थिरता, शांति और विकास के लिए काम करना चाहिए। मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाने पर भी जोर दिया।

67-ब्रिक्स बैंक का अध्यक्ष बना भारत। दो साल की माथापच्ची के बाद आखिरकार ब्रिक्स देश एक अंतरराष्ट्रीय बैंक बनाने पर राजी हो गए। ये बैंक 100 अरब डॉलर की पूंजी से शुरू होगा। इस बैंक का मुख्यालय शंघाई में होगा। बैंक का मकसद होगा अहम योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसे की कमी को दूर करना।

68-ब्राजील में चीन के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात भी दिलचस्प रही। ये मुलाकात सिर्फ 40 मिनट के लिए होनी थी, लेकिन जब दोनों नेता आपस में बात करने लगे तो 80 मिनट तक एक दूसरे से बात करते रहे। दोनों देश के नेताओं में सीमा विवाद, आर्थिक रिश्ते और कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे रूट को लेकर बातचीत हुई।

69-सोलह जुलाई को मोदी सरकार ने पर्यावरण की रक्षा के लिए बड़ा आदेश दिया। मंत्रालयों को आदेश दिया गया कि किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन साफ करते वक्त पेड़ नहीं काटे जाएंगे। अगर पेड़ काटना बहुत जरूरी होगा तो उस पेड़ को वहां से निकालकर दूसरी जगह लगाया जाएगा। मोदी की कमान में गुजरात सरकार ऐसा पहले भी करती रही थी।

70-18 जुलाई को मोदी सरकार ने दिल्ली का बजट पेश किया। बजट में लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया। बिजली संकट से जूझते देश की राजधानी के लोगों को 260 करोड़ रुपए सब्सिडी भी दी गई। सरकार ने ये भी ऐलान किया कि दिल्ली में एक नया आधुनिक अस्पताल भी बनेगा।

71- मोदी सरकार हिंदी के साथ ही संस्कृत के विकास पर भी गंभीर नजर आई। CBSE ने अपने सभी स्कूलों को निर्देश दिया कि वो भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत सप्ताह मनाएं। हालांकि कुछ राज्यों ने इसका विरोध भी किया।

72- मोदी सरकार ने लक्ष्य रखा कि अगले 3 से 4 साल के भीतर देश के हर गांव में टेलीफोन कनेक्शन होगा। हर गांव में इटंरनेट पहुंचाने की मुहिम की कामयाबी के लिए ये होना बहुत जरूरी भी है। मौजूदा वक्त में देश के सिर्फ 44 फीसदी गावों में ही टेलीफोन कनेक्शन है।

73-महंगाई से जूझते लोगों को बड़ी राहत देते हुए मोदी सरकार ने ऐलान किया कि वो रसोई गैस और केरोसीन ऑयल की कीमत में इजाफा नहीं करेगी। यही नहीं सरकार ने एक महीने में सब्सिडी वाला सिलेंडर सिर्फ एक बार ही मिलने की बाध्यता भी खत्म कर दी।

74-मोदी सरकार ने तय किया कि वो भ्रष्टाचार का खुलासा करने वालों को सुरक्षा देगी। तमाम मंत्रालयों और विभागों के चीफ विजिलेंस ऑफीसर्स को ये आदेश दिया गया कि वो भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले को सुरक्षा देने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं।

75-24 जुलाई को सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कड़ा संदेश दिया। अमेरिकी दबाव के बावजूद मोदी सरकार ने WTO प्रोटोकॉल रूल के समर्थन से साफ इनकार कर दिया। मोदी सरकार ने कहा कि इस प्रोटोकॉल का समर्थन करने के बाद देश में गरीबों के लिए चल रहे खाद्य कार्यक्रमों में अड़चनें आतीं।

76-बीमा सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने विदेशी निवेश की सीमा 26 फीसदी से बड़ाकर 49 फीसदी कर दी। सरकार ने ये भी तय किया कि बीमा कंपनियों का मैनेजमेंट भारतीय प्रमोटरों के ही पास रहेगा। इस फैसले ने देश की बीमा कंपनियों को नया जीवनदान दिया। इसे मोदी सरकार के पहले बड़े आर्थिक फैसले के तौर पर देखा गया।

77-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वो सांसदों पर चल रहे आपराधिक केसों की पड़ताल एक साल के भीतर निपटाएं। चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने दागी नेताओं पर सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। आपको बता दें कि ADR नाम की संस्था के मुताबिक मौजूदा लोकसभा के 34 फीसदी सांसदों पर आपराधिक केस चल रहा है।

78-देश के हवाई यात्रियों को राहत देते हुए मोदी सरकार ने एक साथ 6 नई एयरलाइंस के लाइसेंस को हरी झंडी दिखाई। इन एयरलाइंस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई थी। 6 नई एयरलाइंस में से 3 घरेलू रूट पर उड़ेंगी जबकि 3 अंतरराष्ट्रीय रूट पर।

79-28 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने MYGOV नाम से वेबसाइट लॉन्च की। इस वेबसाइट के जरिए मोदी सरकार गंगा सफाई, डिजिटल क्रांति जैसे जैसे अहम मुद्दों पर देश के लोगों की राय मांग रही है। इस वेबसाइट पर अब तक देश के हजारों लोग अपनी राय दे चुके हैं।

80-सेना में महिलाओं को ज्यादा अधिकार देते हुए मोदी सरकार ने फैसला किया कि अब महिला अफसरों को पूरी बटालियन की कमांड भी सौंपी जाएगी। पहल ऐसा नहीं था। सरकार के फैसले के बाद अब एविएशन, सिग्नल और इंजीनियर्स बटालियन की कमान महिला अफसर भी संभाल सकेंगी।

81-कभी मोदी को वीजा देने से मना करने वाला अमेरिका और झुकता नजर आया। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी से मुलाकात की मोदी के मुरीद जॉन केरी ने हिंदी में सबका साथ-सबका विकास बोलकर सबका ध्यान खींचा। सितंबर में मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले इस मुलाकात को बेहद अहम माना गया।

82-दस्तावेजों को Attested कराने के झंझट से मुक्ति दिलाते हुए मोदी सरकार ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वो सेल्फ सर्टिफिकेशन पर जोर दे। सरकार ने कहा कि तमाम सरकारी कार्रवाइयों में हलफनामों को भी कम से कम करने के तरीके खोजे जाएं। सरकार ने कहा कि गजटेड ऑफिसर से अटेस्ड कराने में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

83-4 अगस्त को नरेंद्र मोदी नेपाल यात्रा पर गए। 17 साल बाद कोई भारतीय पीएम द्विपक्षीय वार्ता के लिए नेपाल पहुंचा। भारत ने पन-बिजली योजनाओं के लिए नेपाल सरकार के साथ समझौता किया। भारत ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वो 1950 में हुई भारत-नेपाल ट्रीटी पर बातचीत के लिए तैयार है।

84-CSAT परीक्षा पर अहम फैसला लेते हुए सरकार ने तय किया कि अब मेरिट लिस्ट में अंग्रेजी पेपर के नंबरों को नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार ने 2011 में सिविल सर्विसेस की परीक्षा देने वाले छात्रों को एक और मौका दिए जाने की भी बात कही। इस फैसले ने हिंदी भाषा के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत दी।

85-मिजोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद मोदी सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। राज्यपाल के तौर पर कमला बेनीवाल का कार्यकाल खत्म होने में दो महीने बाकी रहते उन्हें हटाया गया था। ऐसे में विपक्ष ने सरकार पर बदले की राजनीति करने का भी आरोप लगाया।

86-जुवैनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव को मंजूरी देते हुए सरकार ने तय कर दिया कि अब गंभीर अपराधों के मामले में 16 साल से बड़े किशोरों को भी वयस्क की तरह सजा दी जा सकेगी। ये फैसला लेने की जिम्मेदारी सरकार ने जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड पर छोड़ दी कि आरोपी पर मुकदमा बालिग के तौर पर चलाएं।

87-पीएम बनने के बाद 12 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। लद्दाख में पन बिजली परियोजना का उद्घाटन करते हुए मोदी ने प्रकाश, पर्यावरण और पर्यटन का नारा दिया। यहीं पर मोदी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वो आतंक के नाम पर छद्म युद्ध में लगा हुआ है।

88-जजों की नियुक्ति के लिए राज्यसभा में न्यायिक नियुक्ति आयोग बिल पास होते ही पुराना कॉलेजियम सिस्टम खत्म हो गया। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता में कमी के आरोप के चलते कॉलेजियम सिस्टम की आलोचना हो रही थी। अब नए सिस्टम के तहत न्यायिक आयोग सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति करेगा।

89-सरकार ने तय किया कि नक्सल प्रभावित सभी 10 राज्यों में मोबाइल की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए करीब दो हजार नए टॉवर भी लगाए जाएंगे। प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी बीएसएनएल को दी गई है जो पहले ही इन इलाकों में साढ़े तीन सौ टॉवर लगा चुकी है।

90-मोदी ने 15 अगस्त को ही देश से ये वायदा किया कि अगले साल 15 अगस्त तक कोई भी स्कूल ऐसा नहीं होगा जहां बच्चों के लिए शौचालय ना हो। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से ये भी कहा कि वो सांसद निधि का इस्तेमाल स्कूलों में शौचालय बनवाने में करें। ताकि बच्चे शौचालय ना होने की वजह से पढ़ाई बीच में ना छोड़ें।

91-डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत मोदी सरकार का लक्ष्य 2019 तक हर भारतीय के हाथ में स्मार्टफोन देने का है। मकसद ये कि मोबाइल फोन के जरिए देश का हर नागरिक सरकार की हर योजना के साथ सीधे जुड़ा हो। सरकार की तैयारी ढ़ाई लाख पंचायतों और स्कूलों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की है।

92-मोदी ने ऐलान किया कि इसी साल 2 अक्टूबर से स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया जाएगा। मोदी ने देश से ये वायदा लिया कि 2019 तक देश का हर शहर, हर सड़क और हर गली साफ-सुथरी होगी। उन्होंने कहा कि ये काम सिर्फ सरकार से नहीं हो सकता इसमें लोगों की मदद की भी जरूरत है।

93-मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना का भी ऐलान किया। इस योजना के तहत 2016 तक हर सांसद को अपने इलाके में एक आदर्श गांव बनाना होगा। इसके बाद सांसद को 2019 तक दो और गावों को आदर्श गांव में बदलना होगा। इस योजना का औपचारिक ऐलान 11 अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण की जयंती पर होगा।

94-मोदी सरकार ने तय किया कि वो रामसेतु के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने देगी। रामसेतु के बीच से जहाजों के लिए रास्ता बनवाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस समुद्री रास्ते के पक्ष में दलील ये दी जाती है कि इससे वक्त और पैसे दोनों की बचत होगी। लेकिन सरकार ने कहा कि लोगों की भावनाओं को दरकिनार नहीं किया जाएगा।

95-मना करने के बावजूद कश्मीर के अलगाववादियों से बातचीत के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बैठक रद्द कर दी। मोदी सरकार ने पाकिस्तान से टो दूक कहा कि वो या तो अलगाववादियों से बात कर ले या फिर भारत सरकार से। इस फैसले से मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ये संदेश दिया कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।

96-तबादलों के दौरान ऐसी महिलाओं को तरजीह मिले जो अपने परिवार से अलग, दूसरे शहरों में रह रही हैं। केंद्र सरकार ने खासतौर पर बैंकों को निर्देश दिया कि महिला कर्मचारियों की तैनाती उनके घर के नजदीक ही की जाए ताकि उनमें असुरक्षा की भावना कम हो।

97-योजना आयोग के दिन खत्म होने का ऐलान करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के लोगों से नई संस्था के बारे में सुझाव मांगा। सरकार का कहना था कि 64 साल पुराना, योजना आयोग वक्त के हिसाब से खुद को बदल नहीं पाया। इसलिए एक नई संस्था की जरूरत है। अब ये नई संस्था 21वीं सदी के मुताबिक विकास से जुड़े सुझाव देगी।

98-मोदी सरकार ने तय किया कि उत्तर पूर्वी राज्यों में जमीन से आसमान में मार करने वाली आकाश मिसाइल की 6 स्क्वैड्रन तैनात की जाएगी। ऐसा चीन के लड़ाकू विमानों और ड्रोन की तैनाती के बाद किया गया। सरकार पहले ही तेजपुर और छाबुआ में सुखोई-30 विमान की तैनाती कर चुकी है।

99-देश के हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल वेबसाइट फ्लिपकार्ट के साथ अहम समझौता किया। अब केंद्र सरकार की मदद से हथकरघा उद्योग का बनाया सामान फ्लिपकार्ट पर बेचा जाएगा। इस नई पहल से बुनकरों का तो फायदा होगा ही, उद्योग की कमाई भी बढ़ेगी।

100-पंद्रह अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ‘जन-धन योजना’ का ऐलान किया था। इस योजना के तहत देश के हर नागरिक के पास बैंक अकाउंट होने का लक्ष्य रखा गया। दो हफ्ते के भीतर ही ये योजना पूरे देश में शुरू कर दी गई। 28 अगस्त को योजना के पहले दिन ही एक करोड़ से ज्यादा नए लोगों के बैंक अकाउंट खुले।

शनिवार, 30 अगस्त 2014

वैज्ञानिकों ने हिमालय में ढूंढी कमाल की बूटी रोडिओला / Scientists Discovered in the Himalayas the herb Rodiola


भारतीय वैज्ञानिकों ने हिमालय के ऊपरी इलाके में एक अनोखे पौधे की खोज की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह पौधा एक ऐसी औषधि के रूप में काम करता है जो हमारे इम्युन सिस्टम को रेग्युलेट करता है, हमारे शरीर को पर्वतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढलने में मदद करता है और हमें रेडियोऐक्टिविटी से भी बचाता है। यह खोज सोचने पर मजबूर करती है कि क्या रामायण की कहानी में लक्ष्मण की जान बचाने वाली जिस संजीवनी बूटी का जिक्र किया गया है, वह हमें मिल गई है? रोडिओला नाम की यह बूटी ठंडे और ऊंचे वातावरण में मिलती है। लद्दाख में स्थानीय लोग इसे सोलो के नाम से जानते हैं। अब तक रोडिओला के उपयोगों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। स्थानीय लोग इसके पत्तों का उपयोग सब्जी के रूप में करते आए हैं। लेह स्थित डिफेंस इंस्टिट्यूट ऑफ हाई ऐल्टिट्यूड (डीआईएचएआर) इस पौधे के चिकित्सकीय उपयोगों की खोज कर रहा है। यह सियाचिन जैसी कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है। डीआईएचएआर के निदेशक आर. बी. श्रीवास्तव के अनुसार, रोडिओला में इम्युमॉड्युलैटरी (प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना), ऐडप्टोजैनिक (कठिन वातावरण परिस्थितियों में शरीर को ढालना) और रेडियो-प्रोटेक्टिंग क्षमताएं है। इसकी वजह इसमें मौजूद सेकंडरी मेटाबोटिटेस और फोटोऐक्टिव कंपाउंड्स हैं।



सोमवार, 25 अगस्त 2014

सोलह (१६) संस्कार / 16 SANSKARS


-शीतांशु कुमार सहाय
हिन्दू धर्म अथवा सनातन धर्म भारत का सर्वप्रमुख धर्म है। इसमें पवित्र सोलह संस्कार संपन्न किए जाते हैं। हिंदू धर्म की प्राचीनता एवं विशालता के कारण ही उसे 'सनातन धर्म' भी कहा जाता है। बौद्ध, जैन, ईसाई, इस्लाम आदि धर्मों के समान हिन्दू धर्म किसी भी व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित किया गया धर्म नहीं, बल्कि प्राचीन काल से चले आ रहे विभिन्न धर्मों एवं आस्थाओं का बड़ा समुच्चय है। महर्षि वेदव्यास के अनुसार मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक पवित्र सोलह संस्कार संपन्न किए जाते हैं।

गर्भाधान संस्कार - यह ऐसा संस्कार है जिससे हमें योग्य, गुणवान और आदर्श संतान प्राप्त होती है। शास्त्रों में मनचाही संतान के लिए गर्भधारण किस प्रकार करें इसका विवरण दिया गया है। इस संस्कार से कामुकता का स्थान अच्छे विचार ले लेते हैं। यह वैज्ञानिक स्तर पर भी साबित किया जा चुका है।

पुंसवन संस्कार - यह संस्कार गर्भधारण के दो-तीन महीने बाद किया जाता है। मां अपने गर्भस्थ शिशु की ठीक से देखभाल करने योग्य बनाने के लिए यह संस्कार किया जाता है। पुंसवन संस्कार के दो प्रमुख लाभ- पुत्र प्राप्ति और स्वस्थ, सुंदर गुणवान संतान है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार - यह संस्कार गर्भ के चौथे, छठवें और आठवें महीने में किया जाता है। इस समय गर्भ में पल रहा बच्च सीखने के काबिल हो जाता है। उसमें अच्छे गुण, स्वभाव और कर्म आएं, इसके लिए मां उसी प्रकार आचार-विचार, रहन-सहन और व्यवहार करती है। भक्त प्रह्लाद और अभिमन्यु इसके उदाहरण हैं।

जातकर्म संस्कार - बालक का जन्म होते ही इस संस्कार को करने से गर्भस्त्रावजन्य दोष दूर होते हैं। नालछेदन के पूर्व अनामिका अंगूली (तीसरे नंबर की) से शहद, घी और स्वर्ण चटाया जाता है।

नामकरण संस्कार - जन्म के बाद ११वें या सौवें दिन नामकरण संस्कार किया जाता है। ब्राrाण द्वारा ज्योतिष आधार पर बच्चे का नाम तय किया जाता है। बच्चे को शहद चटाकर सूर्य केदर्शन कराए जाते हैं। उसके नए नाम से सभी लोग उसके स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

निष्क्रमण संस्कार - निष्क्रमण का अर्थ है बाहर निकालना। जन्म के चौथे महीने में यह संस्कार किया जाता है। हमारा शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जिन्हें पंचभूत कहा जाता है, से बना है। इसलिए पिता इन देवताओं से बच्चे के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। इस संस्कार में शिशु को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाने का विधान है। भगवान् भास्कर के तेज तथा चन्द्रमा की शीतलता से शिशु को अवगत कराना ही इसका उद्देश्य है। इसके पीछे मनीषियों की शिशु को तेजस्वी तथा विनम्र बनाने की परिकल्पना होगी। उस दिन देवी-देवताओं के दर्शन तथा उनसे शिशु के दीर्घ एवं यशस्वी जीवन के लिये आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। जन्म के चौथे महीने इस संस्कार को करने का विधान है। तीन माह तक शिशु का शरीर बाहरी वातावरण यथा तेज धूप, तेज हवा आदि के अनुकूल नहीं होता है इसलिये प्राय: तीन मास तक उसे बहुत सावधानी से घर में रखना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे उसे बाहरी वातावरण के संपर्क में आने देना चाहिए। इस संस्कार का तात्पर्य यही है कि शिशु समाज के सम्पर्क में आकर सामाजिक परिस्थितियों से अवगत हो।

अन्नप्राशन संस्कार - गर्भ में रहते हुए बच्चे के पेट में गंदगी चली जाती है, उसके अन्नप्राशन संस्कार बच्चे को शुद्ध भोजन कराने का प्रसंग होता है। बच्चे को सोने-चांदी के चम्मच से खीर चटाई जाती है। यह संस्कार बच्चे के दांत निकलने के समय अर्थात ६-७ महीने की उम्र में किया जाता है। इस संस्कार के बाद बच्चे को अन्न खिलाने की शुरुआत हो जाती है।

चूड़ाकर्म (मुंडन) संस्कार - बच्चे की उम्र के पहले वर्ष के अंत में या तीसरे, पांचवें या सातवें वर्ष के पूर्ण होने पर बच्चे के बाल उतारे जाते हैं जिसे वपन क्रिया संस्कार, मुंडन संस्कार या चूड़ाकर्म संस्कार कहा जाता है। इससे बच्चे का सिर मजबूत होता है तथा बुद्धि तेज होती है।    

विद्यारंभ संस्कार - जीवन को सकारात्मक बनाने के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा का शुरू होना ही विद्यारंभ संस्कार है। गुरु के आश्रम में भेजने के पहले अभिभावक अपने पुत्र को अनुशासन के साथ आश्रम में रहने की सीख देते हुए भेजते थे। विद्यारम्भ संस्कार के क्रम के बारे में हमारे आचार्यो में मतभिन्नता है। कुछ आचार्यो का मत है कि अन्नप्राशन के बाद विद्यारम्भ संस्कार होना चाहिये तो कुछ चूड़ाकर्म के बाद इस संस्कार को उपयुक्त मानते हैं। मेरी राय में अन्नप्राशन के समय शिशु बोलना भी शुरू नहीं कर पाता है और चूड़ाकर्म तक बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति जगने लगती है। इसलिये चूड़ाकर्म के बाद ही विद्यारम्भ संस्कार उपयुक्त लगता है। विद्यारम्भ का अभिप्राय बालक को शिक्षा के प्रारम्भिक स्तर से परिचित कराना है। प्राचीन काल में जब गुरुकुल की परम्परा थी तो बालक को वेदाध्ययन के लिये भेजने से पहले घर में अक्षर बोध कराया जाता था। माँ-बाप तथा गुरुजन पहले उसे मौखिक रूप से श्लोक, पौराणिक कथायें आदि का अभ्यास करा दिया करते थे ताकि गुरुकुल में कठिनाई न हो। हमारा शास्त्र विद्यानुरागी है। शास्त्र की उक्ति है सा विद्या या विमुक्तये अर्थात् विद्या वही है जो मुक्ति दिला सके। विद्या अथवा ज्ञान ही मनुष्य की आत्मिक उन्नति का साधन है। शुभ मुहूर्त में ही विद्यारम्भ संस्कार करना चाहिये।

कर्णवेध संस्कार - इसका अर्थ है- कान छेदना। परंपरा में कान और नाक छेदे जाते थे। यह संस्कार जन्म के छह माह बाद से लेकर पांच वर्ष की आयु के बीच किया जाता था। यह परंपरा आज भी कायम है। इसके दो कारण हैं, एक- आभूषण पहनने के लिए। दूसरा- कान छेदने से एक्यूपंक्चर होता है। इससे मस्तिष्क तक जाने वाली नसों में रक्त का प्रवाह ठीक होता है।

यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार -  उप यानी पास और नयन यानी ले जाना। गुरु के पास ले जाने का अर्थ है उपनयन संस्कार। बालक को जनेऊ पहनाकर गुरु के पास शिक्षा अध्ययन के लिए ले जाया जाता था। आज भी यह परंपरा है। जनेऊ में तीन सूत्र होते हैं। ये तीन देवता- ब्रrा, विष्णु, महेश के प्रतीक हैं। फिर हर सूत्र के तीन-तीन सूत्र होते हैं। ये सब भी देवताओं के प्रतीक हैं। आशय यह कि शिक्षा प्रारंभ करने के पहले देवताओं को मनाया जाए। जब देवता साथ होंगे तो अच्छी शिक्षा आएगी ही।

वेदारंभ संस्कार -  ज्ञानार्जन से सम्बन्धित है यह संस्कार। वेद का अर्थ होता है ज्ञान और वेदारम्भ के माध्यम से बालक अब ज्ञान को अपने अन्दर समाविष्ट करना शुरू करे यही अभिप्राय है इस संस्कार का। शास्त्रों में ज्ञान से बढ़कर दूसरा कोई प्रकाश नहीं समझा गया है। स्पष्ट है कि प्राचीन काल में यह संस्कार मनुष्य के जीवन में विशेष महत्व रखता था। यज्ञोपवीत के बाद बालकों को वेदों का अध्ययन एवं विशिष्ट ज्ञान से परिचित होने के लिये योग्य आचार्यो के पास गुरुकुलों में भेजा जाता था। वेदारम्भ से पहले आचार्य अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने एवं संयमित जीवन जीने की प्रतिज्ञा कराते थे तथा उसकी परीक्षा लेने के बाद ही वेदाध्ययन कराते थे। असंयमित जीवन जीने वाले वेदाध्ययन के अधिकारी नहीं माने जाते थे। हमारे चारों वेद ज्ञान के अक्षुण्ण भंडार हैं।

केशांत संस्कार - अर्थ है केश यानी बालों का अंत करना, उन्हें समाप्त करना। विद्या अध्ययन से पूर्व भी केशांत किया जाता है। मान्यता है गर्भ से बाहर आने के बाद बालक के सिर पर माता-पिता के दिए बाल ही रहते हैं। इन्हें काटने से शुद्धि होती है। शिक्षा प्राप्ति के पहले शुद्धि जरूरी है, ताकि मस्तिष्क ठीक दिशा में काम करे।

समावर्तन संस्कार -  अर्थ है फिर से लौटना। आश्रम में शिक्षा प्राप्ति के बाद ब्रrाचारी को फिर दीन-दुनिया में लाने के लिए यह संस्कार किया जाता था। इसका आशय है ब्रrाचारी को मनोवैज्ञानिक रूप से जीवन के संघर्षो के लिए तैयार करना।

विवाह संस्कार - वि यानी विशेष रूप से, वहन यानी ले जाना। विवाह का अर्थ है पुरुष द्वारा स्त्री को विशेष रूप से अपने घर ले जाना। सनातन धर्म में विवाह को समझौता नहीं संस्कार कहा गया है। यह धर्म का साधन है। दोनों साथ रहकर धर्म के पालन के संकल्प के साथ विवाह करते हैं। विवाह के द्वारा सृष्टि के विकास में योगदान दिया जाता है। इसी से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त होता है। विवाहाग्नि संस्कार विवाह के पहले तक पिता द्वारा जलाई गई अग्नि में आहूति दी जाती थी। विवाह के साथ ही व्यक्ति स्वयं अपनी अग्नि घर में प्रज्‍जवलित करता था। पति-पत्नी दोनों सुबह, दोपहर और शाम को इसमें घी और दूध की आहूति देते थे। विवाह के बाद अपनी अलग अग्नि जलाने का अर्थ है अपना अलग चूल्हा करना। यानी अपनी जिम्मेदारियां स्वयं उठाना। आज भी घर का बंटवारा होने का मतलब दो चूल्हे होना लिया जाता है। हमारे शास्त्रों में आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख है- ब्राह्म,  दैव,  आर्ष,  प्रजापत्य,  आसुर,  गन्धर्व (Love Marriage),  राक्षस एवं  पैशाच। वैदिक काल में ये सभी प्रथाएं प्रचलित थीं। समय के अनुसार इनका स्वरूप बदलता गया। वैदिक काल से पूर्व जब हमारा समाज संगठित नहीं था तो उस समय उच्छृंखल यौनाचार था। हमारे मनीषियों ने इस उच्छृंखलता को समाप्त करने के लिये विवाह संस्कार की स्थापना करके समाज को संगठित एवं नियमबद्ध करने का प्रयास किया। आज उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है कि हमारा समाज सभ्य और सुसंस्कृत है।

अंत्येष्टि संस्कार - इसका अर्थ है अंतिम यज्ञ। आज भी शवयात्रा के आगे घर से अग्नि जलाकर ले जाई जाती है। इसी से चिता जलाई जाती है। आशय है विवाह के बाद व्यक्ति ने जो अग्नि घर में जलाई थी उसी से उसके अंतिम यज्ञ की अग्नि जलाई जाती है। मृत्यु के साथ ही व्यक्ति स्वयं इस अंतिम यज्ञ में होम हो जाता है। हमारे यहां अंत्येष्टि को इसलिए संस्कार कहा गया है कि इसके माध्यम से मृत शरीर नष्ट होता है। इससे पर्यावरण की रक्षा होती है। अन्त्येष्टि को अंतिम अथवा अग्नि परिग्रह संस्कार भी कहा जाता है। आत्मा में अग्नि का आधान करना ही अग्नि परिग्रह है। धर्म शास्त्रों की मान्यता है कि मृत शरीर की विधिवत् क्रिया करने से जीव की अतृप्त वासनायें शान्त हो जाती हैं। हमारे शास्त्रों में बहुत ही सहज ढंग से इहलोक और परलोक की परिकल्पना की गयी है। जब तक जीव शरीर धारण कर इहलोक में निवास करता है तो वह विभिन्न कर्मो से बंधा रहता है। प्राण छूटने पर वह इस लोक को छोड़ देता है। उसके बाद की परिकल्पना में विभिन्न लोकों के अलावा मोक्ष या निर्वाण है। मनुष्य अपने कर्मो के अनुसार फल भोगता है। इसी परिकल्पना के तहत मृत देह की विधिवत क्रिया होती है।

रविवार, 24 अगस्त 2014

चौंसठ कलाओं में निपुण भगवान श्रीकृष्ण व बलराम / Sixty-four Arts Expert Lord Krishna and Balram



-शीतांशु कुमार सहाय
श्रीकृष्ण और बलराम जगत के स्वामी हैं। दोनों भाइयों ने केवल गुरु के एक बार बोलनेभर से ही 64 दिन-रात में 64 अद्भुत कलाओं को सीख लिया। श्रीकृष्ण का सांसारिक धर्म का पालन कर गुरुकुल जाना, वहाँ अद्भुत 64 कलाओं व विद्याओं को सीखने के पीछे भी असल में गुरुसेवा व ज्ञान की अहमियत दुनिया के सामने उजागर करने की ही एक लीला थी। यह इस बात से भी जाहिर होता है कि साक्षात् जगतपालक विष्णु के अवतार होने से श्रीकृष्ण स्वयं ही सारे गुण, ज्ञान व शक्तियों के स्रोत थे। सारी विद्याएँ व ज्ञान उनसे ही निकला है और वे स्वयंसिद्ध है, फिर भी उन दोनों ने मनुष्य की तरह बने रहकर उन्हें छुपाए रखा। पुस्तकीय ज्ञान से व्यक्ति पैसा और सम्मान तो बटोर सकता है, किंतु मन की शांति नहीं। शांति के लिए अहम है– सेवा। खुद की कोशिशों से बटोरा ज्ञान अहंकार पैदा कर सकता है व अधूरापन भी, किंतु गुरु सेवा से पाया ज्ञान इन दोषों से बचाने के साथ संपूर्ण, विनम्र व यशस्वी बना देता है। श्रीकृष्ण व बलराम ने भी अंवतीपुर (आज का उज्जैन) में गुरु संदीपन से केवल 64 दिनों में ही गुरु सेवा व कृपा से 64 कलाओं में दक्षता हासिल की। गुरु से मिले इन कलाओं और ज्ञान के अक्षय व नवीन रहने का आशीर्वाद 'श्रीमद्भगवद्गगीता' के रूप में आज भी जगद्गुरु श्रीकृष्ण के साक्षात् ज्ञानस्वरूप का दर्शन कराता है। श्रीमद्भगवद्गगीता हर युग में जीने की कला उजागर करनेवाला विलक्षण धर्मग्रंथ है। गुरु संदीपन ने श्रीकृष्ण व बलराम को सारे वेद, उनका गूढ़ रहस्य बतानेवाले शास्त्र, उपनिषद, मंत्र व देवताओं से जुड़े ज्ञान, धनुर्वेद, स्मृति सहित सारे धर्मशास्त्रों, तर्कविद्या या न्यायशास्त्र का ज्ञान दिया। संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैध व आश्रय जैसे 6 रहस्योंवाली राजनीति भी सिखाई।


64 प्रकार की कलाएँ ये हैं---
1- गानविद्या  2- विभिन्न प्रकार के वाद्य बजाना  3- नृत्य  4- नाट्य  5- चित्रकारी   6- बेल-बूटे बनाना  7- चावल और पुष्पादि से पूजा के उपहार की रचना करना  8- फूलों की सेज बनान  9- दाँत, वस्त्र और अंगों को रंगना  10- मणियों की फर्श बनाना  11- शय्या-रचना  12- जल को बाँध देना  13- विचित्र सिद्धियाँ दिखलाना  14- माला आदि बनाना  15- कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना  16- कपड़े और गहने बनाना  17- फूलों के आभूषणों से शृँगार करना  18- कानों के पत्तों की रचना करना  19- सुगन्धित वस्तुएँ- इत्र, तैल आदि बनाना  20- इंद्रजाल-जादूगरी  21- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना  22- हाथ की फुर्ती कें काम  23- विभिन्न प्रकार के खाने की वस्तुएँ बनाना  24- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना  25- सूई का काम  26- कठपुतली बनाना, नाचना  27- पहेली  28- प्रतिमा आदि बनाना  29- कूटनीति  30- ग्रंथों के पढ़ाने की चातुरी  31- नाटक, आख्यायिका आदि की रचना करना  32- समस्यापूर्ति करना  33- पट्टी, बेंत, बाण आदि   नाना  34- गलीचे, दरी आदि बनाना  35- बढ़ई की कारीगरी  36- गृह आदि बनाने की कारीगरी  37- सोने, चाँदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा  38- सोना-चाँदी आदि बना लेना  39- मणियों के रंग को पहचानना  40- खानों की पहचान  41- वृक्षों की चिकित्सा  42- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति  43- तोता-मैना आदि की बोलियाँ बोलना  44- उच्चाटनकी विधि  45- केशों की सफाई का कौशल  46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना  47- म्लेच्छ-काव्यों को समझ लेना  48- विभिन्न देशों की भाषा का ज्ञान  49- शकुन-अपशकुन जानना, शुभाशुभ बतलाना  50- नाना प्रकार के मातृकायन्त्र बनाना  51- रत्नों को नाना प्रकार के आकारों में काटना  52- सांकेतिक भाषा बनाना  53- मन में रचना करना  54- नयी-नयी बातें निकालना  55- छल से काम निकालना  56- समस्त कोशों का ज्ञान  57- समस्त छन्दों का ज्ञान  58- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या  59- द्यू्त क्रीड़ा  60- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण  61- बालकों के खेल  62- मन्त्रविद्या  63- विजय प्राप्त करानेवाली विद्या  64- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या।

शनिवार, 23 अगस्त 2014

दो तरह के श्रीकृष्णाष्टकम् के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है / Two Srikrishnashtkm




श्रीकृष्णाष्टकम्

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् ।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

अतसीपुष्पसङ्काशं हार नूपुर शोभितम् ।
रत्नकङ्कण केयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्र निभाननम् ।
विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरम् ॥

मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम् ।
बर्हिपिञ्छाव चूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नील जीमूत सन्निभम् ।
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

रुक्मिणीकेलिसंयुक्तं पीताम्बर सुशोभितम् ।
अवाप्त तुलसी गन्धं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

गोपिकानां कुचद्वन्द कुङ्कुमाङ्कित वक्षसम् ।
श्रीनिकेतं महेष्वासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

श्रीवत्साङ्कं महोरस्कं वनमाला विराजितम् ।
शङ्खचक्रधरं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥

कृष्णाष्टकमिदंपुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥

श्रीकृष्णाष्टकं 

भजे ब्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैवनन्दनन्दनम।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
अनङ्गरङ्गसागरं नमामिकृष्णनागरम्।।१।।

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
विघूतगोपशोचनं भजामिपद्यचक्षुषम्।
करारविन्दभूषणं स्मितावलोकसुन्दरं
महेन्द्रमानदारणं नमामिकृष्णवारणम्।।२।।

कदम्बपुष्पकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं
ब्रजाङ्गनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्।
यशोदया समोदया सगोपया दयानिधि
उदूखले कृतग्रहं नमामि नन्दनन्दनम्।।३।।

नवीनगोपनागरं नवीनकेलिमन्दिरं
नवीनमेघसुन्दरं भजे ब्रजैकसुन्दरम्।
सदैवपादपङ्कजं मदीयमानसेनिजं
दधातुनन्दबालक: समस्तभक्तपालक:।।४।।

समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकमोदनं
नमामिकुञ्जमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् !
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं
रसालवेणुगायकं नमामिकुञ्जनायकं !!

भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं
यशोमतीकिशोरकं नमामिचित्तचोरकम् !
दृगन्तकान्तभंगिनं सदासदालसंगिनं
दिनेदिनेनवंनवं नमामिनन्दसम्भवं !!

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं
सुरद्विषन्निकन्दनं नमामिगोपनन्दनं !
नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलं पटम्
नमामिमेघसुन्दरं तदित्प्रभालसत्पटम् !!

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
नमामिकुञ्जकानेन प्रवृद्धवन्हिपयिनं !
यदातदा यथातथा तथैवकृष्णसत्कथा
मयासदैवगीयतां तथाकृपाविधीयताम् !!

प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्ययःपुमान्
भवेत्सनन्दनन्दनेभवेभवेसुभक्तिमान् !

375 साल का हुआ चेन्नै / 375 YEARS OLD CHENNAI


पुराने समय में मद्रास के नाम से मशहूर चेन्नई शहर शुक्रवार 22 अगस्त को 375 वर्ष का हो गया। दक्षिण भारत में स्थित इस ऐतिहासिक तटीय शहर के जन्मदिन के मौके पर उत्सव मनाया जा रहा है। इस शहर के जन्मदिवस के अवसर पर इतिहासकारों सहित स्वयंसेवकों के एक समूह के जरिए 17 अगस्त के बाद से ही कार्यक्रमों की एक लंबी सूची तैयार की जा रही थी। इस शहर की स्थापना 22 अगस्त 1639 को की गयी थी। ब्रिटिश युग के समय की बहुत सारी यादें और उस दौर की दुनिया का आकर्षण इस शहर के साथ जुड़ा हुआ है। वर्ष 1996 में डीएमके सरकार द्वारा इस शहर का नाम मद्रास से बदलकर चेन्नई रखा गया था। पुराने समय का शांत शहर आज गंगनचुंबी इमारतों, शहर की सीमा बढ़ाते हुए बहुत सारे मॉल, आईटी कार्यालयों के बनने के बाद एक हलचल भरे महानगर में बदल गया है।

चेन्नै सेण्ट्रल रेलवे स्टेशन

मद्रास उच्च न्यायालय

कॉरपोरेशन ऑफ चेन्नै


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

बैंक के बचत खाते पर ब्याज की गणना करें / Calculate Interest On Savings Bank Account


अधिकतर लोगों को यह जानकारी नहीं है कि बैंक उनके बचत खाते पर ब्याज की गणना कैसे करता है। पिछले वर्ष तक प्रत्येक बैंक में ब्याज की दर समान थी जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्तूबर 2011 में ब्याज की दर को विनियमित नहीं किया था। प्रत्येक बैंक अब अपनी बचत खाता ब्याज दर निश्चित करने के लिए स्वतंत्र है, विषय की एकरूपता रू.1लाख तक बरकरार रखी गई है। एक बैंक, बचत बैंक में जमा 1 लाख रुपये से अधिक की राशि पर विभेदक ब्याज दरें प्रदान कर सकती है। हालांकि, अनिवासी (बाहरी) लेखा योजना एवं साधारण अनिवासियों के लिए ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। कितनी पुरानी दरों की गणना की गई है? पहले, अप्रैल 1, 2010 तक बैंक ब्याज दरों की गणना अलग विधि द्वारा करते थे। यह प्रत्येक महीने के 10वें और अंतिम दिन के बीच खाते में उपलब्ध न्यूनतम शेष राशि पर आधारित था। यह विधि ग्राहकों के लिए लाभदायक नहीं थी जैसे कि उदाहरण के लिए यदि आपने अपने बचत खाते में रू. 2,00,000, 4% की दर से पूरे महीने के लिए रखे महीने की 26 तारीख आपने रू.1,80,000 निकाल लिए। आपको केवल रू.20,000 पर ब्याज मिलेगा जो सिर्फ रू. 65 है। वर्तमान ब्याज दरों की गणना कैसे की जाती है? नई विधि के अनुसार ब्याज ड्रोन की गणना आपकी समापन राशि पर दैनिक आधार पर की जाती है। हालांकि, संचित ब्याज का तिमाही या छमाही में भुगतान किया जाता है जो बैंक पर निर्भर करता है। आरबीआई, एसबी ब्याज दरों को तिमाही आधार पर उधा देने की आशा करता है। नई विधि किस तरह लाभदायक है, यहाँ तुलना दी गई है यदि आप उसी उदाहरण को देखें जिसकी चर्चा हमने ऊपर की है, तो नई विधि द्वारा ब्याज की गणना के अनुसार रू. 2 लाख की राशि पर 4% की दर से 30 दिनों का ब्याज रू.657 हो जाएगा।
मासिक ब्याज = राशि (दैनिक शेष) X (दिनों की संख्या) X ब्याज / वर्ष में दिनों की संख्या. =200000X30X4/100X365 = रू. 657 राशि=200000 दिनों की संख्या=30 ब्याज= 4/100 वर्ष में दिनों की संख्या= 365
नई विधि निश्चित रूप से खाता धारकों के लिए लाभदायक है। अविनियमन के कारण एसबी जमा दरों में वृद्धि हेतु बैंकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

सोमवार, 4 अगस्त 2014

मुर्गा खाने से जा सकती है जान, हो जायें सावधान! / Cock May be Eating Out, Be Careful Go!


अगर आप मुर्गा खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइये! आपका ये शौक आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। बीमार पड़ने पर एंटीबायटिक दवाओं का आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरोमेंट यानी सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पोल्ट्री फॉर्म में चूजों को जल्दी बड़ा करने और वजन बढ़ाने के लिए एंटीबायटिक दिये जाते हैं। सीएसई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पोल्ट्री फॉर्म में चूजों को जल्द-से-जल्द बड़ा करने और उनका वजन बढ़ाने के लिए उन्हें एंटीबायटिक दिये जाते हैं, जो उनके जरिये चिकन खानेवाले लोगों के शरीर में पहुँचता है। ऐसे में बीमार पड़ने पर अगर डॉक्टर आपको एंटीबायटिक दवा देते हैं तो मुमकिन है कि उनका आप पर कोई असर न हो; क्योंकि एंटीबायटिक वाले मुर्गा खाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और इसीलिए एंटीबायटिक दवाएं हम पर बेअसर हो सकती हैं। दवा का असर नहीं होने की वजह से आपकी बीमारी बढ़ सकती है और जानलेवा तक हो सकती है।
सीएसई ने ऐसे किया सर्वे---
सीएसआई ने दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों से चिकन के 70 नमूने लिये। इनमें एंटीबायटिक की मौजदगी जानने के लिए टेस्ट किया गया। 40 प्रतिशत सैंपल में एंटीबायटिक के अंश मिले। 17 प्रतिशत सैंपल में एक से ज्यादा तरह के एंटीबायटिक मिले।
चिकन में एंटीबायटिक क्यों है खतरनाक---
आपको बता दें कि हमारे देश में एंटीबायटिक की बिक्री पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है और न ही चिकन में एंटीबायटिक के अंश की कोई सीमा तय है। इसलिए पोल्ट्री मालिक बिना सोचे-समझे चूजों को एंटीबायटिक दवाएं देते हैं। मुर्गा में मौजूद ये एंटीबायोटिक दवाएं इंसान के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती हैं। ऐसी हालत में बीमारी होने पर दवा का असर कम होने की आशंका बढ़ जाती है। दवा का असर न होने की वजह से बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरोमेंट की माँग है कि पोल्ट्री इंडस्ट्री में एंटीबायटिक की बिक्री पर रोक लगे।

शनिवार, 2 अगस्त 2014

मैत्री दिवस की शुभकामनाएँ! / Happy Friendship Day!



मित्रता वह रिश्ता है जिसे हम स्वयं बनाते हैं। दोस्त या मित्र हम खुद चुनते हैं। मित्रता का दिन यानी मैत्री दिवस (फ्रेंडशिप डे) विश्वभर में मनाया जा रहा है। वैसे तो सप्ताह भर पहले से ही फ्रेंडशिप वीक को लोग सेलिब्रेट कर रहे हैं। पर, अगस्त के पहले रविवार को ही मैत्री दिवस को विशेष तरीके से मनाया जाता हैं। मेरी ओर से मैत्री दिवस की पूर्व सन्घ्या पर सभी मित्रों को उत्तरोत्तर विकास की शुभकामनाएँ! आज भले ही हमारे फेसबुक फ्रेंड, कॉलेज फ्रेंड, स्कूल फ्रेंड व ट्यूशन फ्रेंड बनते हैं लेकिन चुनना होगा इनमें से कि कौन वास्तव में मित्र है। जो दिल के सबसे करीब हो और दोस्ती की मर्यादा कायम रख सके, वही असल मित्र है। मालूम ही है आपको कि दोस्ती के तार दिल से ही जुड़े होते हैं।

बच्चों को पढ़ाई जाए गीता और महाभारत / Children Should be Taught the Gita and the Mahabharata


-शीतांशु कुमार सहाय
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एआर दवे ने यह सुझाव दिया कि 'भगवद्गीता' और 'महाभारत' को पहली कक्षा से ही छात्रों को पढ़ाना शुरू कर देना चाहिए। न्यायाधीश ने नई दिल्‍ली में शनिवार 2 अगस्त 2014 को कहा कि भारतीय को अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटना चाहिए और बच्‍चों को शुरुआती उम्र में ही महाभारत और भगवद्गीता पढ़ाई जानी चाहिए। वह 'भूमंडलीकरण के दौर में समसामायिक मुद्दे और मानवाधिकारों के समक्ष चुनौतियाँ' विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। दवे ने कहा-- ''जो लोग बहुत धर्मनिरपेक्ष हैं या तथाकथित तौर पर धर्मनिरपेक्ष हैं, वह इस बात से सहमत नहीं होंगे लेकिन अगर मैं भारत का तानाशाह होता तो मैं गीता और महाभारत क्‍लास वन की पढ़ाई में शामिल करवाता। यही वह तरीका है, जिससे आप सीख सकते हैं कि जिंदगी कैसे जी जाए। मुझे नहीं पता कि लोग मुझे धर्मनिरपेक्ष कहते हैं या नहीं लेकिन अगर कोई चीज कहीं अच्‍छी है तो हमें उसे लेने से गुरेज नहीं करना चाहिए।'' न्यायाधीश एआर दवे ने कहा कि सभी की अच्छाई को बाहर लाकर हम हर जगह हिंसा रोक सकते हैं और उसके लिए हमें अपनी जड़ों की ओर वापस जाना होगा। यह सम्मेलन गुजरात लॉ सोसाइटी ने आयोजित की थी। जस्टिस दवे ने पहली क्लास से ही बच्चों को भगवद् गीता और महाभारत पढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि जो बहुत ज्यादा तथाकथित धर्मनिरपेक्ष है वह सहमत नहीं होगा।
गुरु-शिष्‍य परंपरा से दूर होगा आतंकवाद / Guru-disciple Tradition will be away from Terrorism---
न्यायाधीश एआर दवे ने कहा, "गुरु-शिष्‍य परंपरा खत्‍म हो चली है। अगर यह परंपरा बनी रहती तो हमें हिंसा या आतंकवाद जैसी समस्‍याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम दुनियाभर में आतंकवाद के मामले देख रहे हैं। इनमें से अधिकतर देश लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था वाले हैं। अगर लोकतंत्र में सभी लोग अच्‍छे हों तो वे जाहिर तौर पर किसी अच्‍छे को ही चुनेंगे। फिर वो शख्‍स किसी को नुकसान पहुँचाने के बारे में नहीं सोचेगा।"